Aug 15, 2019

Morning Yoga | अच्छे स्वास्थ के लिए सुबह करे ये योगासन

Morning Yoga अष्टांग योग में योग के प्रमुख आठ अंगों का वर्णन किया गया है। इन सभी अंगों के अभ्यास एवं आचरण का चमत्कारी लाभ हमारे शरीर पर देखने को मिलता है। योगाभ्यास न केवल हमारे शरीर, बल्कि हमारे अंतर्मन और आत्मा को भी निष्पाप और प्रकृति के प्रति समर्पित भावना की वृद्धि करता है। योग हमें अपनी वास्तविकता का बोध कराता है। नियमित योगाभ्यास कर मनुष्य उत्तम स्वास्थ और आत्मिक शांति को प्राप्त कर सकता है। आज हम आपको कुछ ऐसे Morning Yoga योगासनों से अवगत कराने जा रहे है , जिसका नित्य अभ्यास कर आप सुंदर और खुशहाल जीवन की कामना कर सकते है।

      Morning Yoga | अच्छे स्वास्थ के लिए सुबह करे ये योगासन

Morning Yoga | अच्छे स्वास्थ के लिए सुबह करे ये योगासन





Precautions To Note Before Starting Morning Yoga | योगाभ्यास करने से पूर्व ध्यान देने योग्य बाते

  • अच्छे और सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने के लिए ये आवश्यक है ,की योगासनों का अभ्यास करते समय आपका पेट खाली हो और आपका शरीर आसनों के लिए पूरी  तरह सक्षम हो।
  • किसी व्याधि या बिमारी के लक्षण होने पर अपने चिकित्सक (डॉक्टर ) की सलाह अनुसार योग की शुरुवात करनी चाहिए।
  • एकांत  वातावरण में अपने आतंरिक स्थिति में प्रवेश करना आसान होता है। पर अगर आप नए है तो अपने किसी साथी को अपने समीप रखे ,जिससे योगाभ्यास करते समय किसी सहायता की आवश्यकता होने पर ,आपका मित्र आपकी मदद के लिए तत्पर हो।
  • योगासन का अभ्यास करते समय शरीर पर अधिक दबाव ना डाले ,इससे लाभ के स्थान पर हानि की संभावना रहती है। नियमित रूप से योग आसनों का अभ्यास करते हुए ही शरीर लचीला और संतुलित बन पाता है।
  • योगाभ्यासी व्यक्ति को अधिक मसालेदार एवं उत्तेजित पदार्थों से बचना चाहिए। 
  • इसके अतिरिक्त नशा पानी से भी परहेज रखना चाहिए। ये सभी चीजे शरीर पर घातक परिणाम करती है। ये चीजे आपको आपके ध्येय से भटकाती है। इसलिए इनसे दुरी बनाकर रखे। तो आइये जानते है इन चमत्कारी आसनों के बारे में






  1. सिद्धासन योग | Siddhasana Yoga



सिद्धासन योग | Siddhasana Yoga





  • सिद्धासन को योग में वर्णित मुख्य और प्रभावकारी आसनों में से माना जाता है। 
  • बड़े बड़े योगी और सिद्ध साधु ध्यान लगाते समय इस आसन का अभ्यास करते है। 
  • योग में इस आसन को समस्त सिद्धियों को प्रदान करनेवाला माना गया है। 
  • सामान्यतः इसका अभ्यास योगी ध्यान या अन्य योग साधना के समय करते  है। 
  • नियमित इस आसन का अभ्यास मनुष्य की जीवन शक्ति को बढाकर प्राणों को उर्ध्व बनाता है। 
  • यह मन की अस्थिरता दूर कर शरीर एवं आत्मा को स्थिर रखता है। इसलिए इसके अनगिनत गुणों को देख इसे अपने दैनिक योगसत्र में शामिल करना चाहिए।





  • How To Do Siddhasana | सिद्धासन कैसे करे


  1. सिद्धासन का अभ्यास करने के लिए दोनों पैरों को सामने फैलाकर बैठ जाए। 
  2. दोनों हथेलियों को फर्श पर आराम करने दे। 
  3. अपने मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी) को सीधा रखे। 
  4. बाएं पैर को घुटने से मोड़कर एड़ी को गुदा और अंडकोष के बिच में रखे। 
  5. ऐसा करते समय अपने बाएं पैर के तलवे को दाहिनी जांघ से सटाकर रखे। 
  6. इसीप्रकार अपने दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर एड़ी को शिश्न पर दबाकर रखे।  
  7. अपनी पीठ और छाती को तानकर रखे। और हाथों को घुटनों पर सहज मुद्रा में रखे। 
  8. अपने अंतर्मन में झांके और अपना पूरा ध्यान भृकुटि के मध्य (दोनों आँखों की मध्यशिरा  ) पर केंद्रित करे। 
  9. इस अवस्था में मस्तिक्ष को शांत और मन को निर्मल बनाये रखे।





अधिक पढ़े -  सिद्धासन कैसे करे और इसके क्या लाभ है?



2.  उष्ट्रासन योग | Ustrasana Yoga

उष्ट्रासन योग | Ustrasana Yoga


  • इस आसन का अभ्यास कमर ,छाती और गले पर एक विशिष्ट खिंचाव उत्पन्न करता है। 
  • यह आसन रीढ़ को मजबूत एवं लचीला बनाता है ,इसका सीधा प्रभाव नाभिचक्र पड़ता जिससे पेट संबंधित परेशानियां दूर रहती है। 
  • यह व्यक्ति को ऊर्जावान और मजबूती प्रदान करता है। 
  • इसका नियमित अभ्यास थायरॉइड एवं पिट्यूटरी ग्रंथि को सक्रीय एवं नियंत्रित रखता है। 
  •  शरीर एवं दिमाग को ताजगी का अनुभव करने के लिए आप इसे सुबह के योगसत्र में शामिल कर सकते है।




  • How To Do Ustrasana Yoga | कैसे करे



  1. उष्ट्रासन का अभ्यास करने के लिए घुटनो के बल बैठ जाए। 
  2. दोनों हाथ कूल्हों पर रखे। 
  3.  कमर और छाती को सीधी रेखा में रखे। 
  4. दोनों हाथों को एक-एक करते हुए पीछे ले जाए ,और एड़ियों को छूने का प्रयास करे। 
  5. अपनी पीठ को कमान देकर पीछे की और झुके। 
  6. सिर को पीछे ले जाए और आसन में स्थिर बने रहे। 
  7. इसका अभ्यास करते समय हाथ ,कमर ,गले के खिचाव को महसूस करे। 
  8. सुबह इसका अभ्यास आप ५ से ८ मिनट तक कर सकते है।










3. हलासन योग | Halasana Yoga 

हलासन योग | Halasana Yoga




  • हलासन का अभ्यास शरीर को लचीला एवं तरोताजा रखता है। 
  • साथ ही नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास हमें कई गंभीर बीमारियों से बचाता है। 
  • इसका अभ्यास शरीर और मस्तिक्ष को नयी प्राणवायु प्रदान करता है। 
  • सुबह केवल ५ मिनट का अभ्यास आपको दिनभर स्वस्थ और ऊर्जावान बनाये रखने के लिए काफी है।




  • How To Do Halasana | कैसे करे



  1. हलासन के लिए जमीन पर पीठ के बल लेट जाए। 
  2. दोनों हाथो को अपने बगल में फर्श पर रखे।
  3.  श्वास छोड़ते हुए दोनों पैरों को एकसाथ ऊपर उठाये और पैरों के तलवों को सर के ऊपर फर्श पर टिका दे।  
  4. ऐसा करते समय घुटनों को सीधा रखे। 
  5. संतुलन बनाने के लिए हथेलियों को फर्श पर एक दूसरे में फसाकर बांध दे। 
  6. कुछ समय इसी अवस्था में बने रहे। 
  7. कुछ देर बाद पुनः सामान्य अवस्था में आ जाए। 
  8. सुबह इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के साथ जोर जबरदस्ती ना करे। नियमित सराव से इस आसन को साधा जा सकता है।










4. सर्वांगासन योग | Sarvangasana Yoga

सर्वांगासन योग | Sarvangasana Yoga





  • अपने नाम के अनुरूप ही सर्वांगासन का अभ्यास शरीर के अंग प्रत्यंग को स्वस्थ रखने में मदद करता है। 
  • इसके अभ्यास से शुद्ध खून का बहाव मस्तिक्ष की तरफ होने लगता है। 
  • यह गले के रोग ,छाती के रोग ,थॉयरॉइड ,पेट की समस्याएं ,आँखों के रोग ,मानसिक तनाव ,बेचैनी ,अस्थिरता ,आलस्य जैसे अनगिनत रोगों में फायदेमंद साबित होता है। 
  • यह कमर को लचीला और शक्तिशाली बनाता है। 
  • इसका अभ्यास हलासन से पूर्व करना सरल और फायदेमंद साबित होता है।





  • How To Do Sarvangasana | कैसे करे


  1. सर्वांगासन के लिए जमीन पर चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाए। 
  2. श्वासों के आवागमन को सामान्य होने दे। 
  3. दोनों पैरों को एकसाथ हवा में ऊपर उठाये ,संतुलन के लिए अपने दोनों हथेलियों को कमर के निचे रखे।  
  4. पैरों को ऊपर ले जाकर संपूर्ण शरीर का भार दोनों कंधों पर समान रूप से वितरित करे। 
  5. कुछ देर इसी अवस्था में रुके और पुनः १ मिनट के विश्राम के बाद आसन को दोहराये। 
  6. सुबह इसका अभ्यास करना अत्यंत फायदेमंद है। 
  7. सुबह केवल ५ से १० मिनट का अभ्यास आपको स्वस्थ और तनावरहित जीवन प्रदान करता है। 
  8. इसका अभ्यास करते समय पेट खाली होना आवश्यक है। 
  9. साथ ही गंभीर गले की जकड़न या कमर की समस्या से पीड़ित होनेपर इसका अभ्यास ना करे।









5. सेतु बंधासन योग | Setu Bandhasana Yoga

सेतु बंधासन योग | Setu Bandhasana Yoga




  • हमेशा स्वस्थ एवं प्रसन्न रहने के लिए सेतु बंधासन एक लाभदायी आसन है।  
  • सुबह केवल १० मिनट का अभ्यास आपको कई गंभीर बिमारियों से बचाता है। 
  • इस आसन का नियमित अभ्यास फेफड़े ,कमर एवं पेट की मांसपेशियों पर विशेष प्रभाव डालता है। 
  • हाइपोथोरॉइड ,अनिद्रा ,बेचैनी ,फेफड़ों की समस्याओं को आप नियमित इसका अभ्यास कर दूर रख सकते है। 
  • इसलिए आज से ही इसे अपने दैनिक योगसत्र में शामिल करे।




  • How To Do Setu Bandhasana Yoga | कैसे करे



  1. सेतु बंधासन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर पीठ के बल लेट जाए। 
  2. दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर अपने नितंब (हिप्स) के पास ले आये। 
  3. इस अवस्था में ध्यान रखे की तलवे फर्श से सटे रहे। 
  4. दोनों हाथों को कमर के निचे से ले जाए और एड़ियों को पकड़ ले। 
  5. अब दोनों पैरों पर समान रूप से वजन डालते हुए कमर को ऊपर उठाये और एक सीधी रेखा में रखे। 
  6. जिससे आपकी शरीर की रचना किसी सेतु की तरह दिखाई देगी। 
  7. इस आसन का अभ्यास करते समय आपकी ठोड़ी आपकी छाती से सटी रहेगी। 
  8. शुरुवात में इसका अभ्यास कठिन लगता है पर वास्तविकता में है नहीं। 
  9. २-३ दिन के अभ्यास से ही आप आसानी से इस आसन में महारथ हासिल कर सकते है।









6. पवनमुक्तासन योग | Pawanmuktasana Yoga 

पवनमुक्तासन योग | Pawanmuktasana Yoga





  • इस आसन का अभ्यास विशेषकर वायुविकारों में लाभदायक माना जाता है ,पर इसके अतिरिक्त इसके कई अन्य लाभ है जो हमारे शरीर एवं मन के फायदेमंद है। 
  • पवनमुक्तासन का अभ्यास करना अत्यंत सरल है। 
  • सुबह केवल  ५ मिनट इसका अभ्यास करना अच्छे स्वास्थ के पर्याप्त है।  
  • जब आप पीठ के बल किये जाने वाले आसनों को करते है ,उसी समय इसका अभ्यास करना सरल होता है।





  • How To Do Pawanmuktasan Yoga | कैसे करे



  1. इस आसन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाए। 
  2. पेट एवं छाती की मांसपेशियों को रिलैक्स करे। 
  3. दोनों पैरों को घुटनों से मोडे ,दोनों हाथों से पैरों को पकड़कर ,घुटनों को पेट के ऊपरी हिस्से पर लगाए। 
  4. कुछ समय इसी स्थिति में बने रहे ,और पुनः सामान्य अवस्था में आ जाए। 
  5. उपरोक्त क्रिया को  ३ से ४ बार दोहराये।









7. भुजंगासन योग | Bhujangasana Yoga 

भुजंगासन योग | Bhujangasana Yoga




  • भुजंगासन पेट के बल लेटकर किया जाने वाला अभ्यास है।  
  • इसका अभ्यास पेट ,छाती ,गर्दन एवं कमर की मांसपेशियों पर विशेष खिंचाव उत्पन्न करता। 
  • यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को विकसित करता है। 
  • साथ ही कमर एवं पेट को लचीला और शारीरिक रचना को सुधारने में फायदेमंद है। 
  • सुबह ७-१० मिनट का अभ्यास अच्छे स्वास्थ और तरोताजा रहने के लिए पर्याप्त है।






  • How To Do Bhujangasana Yoga | कैसे करे



  1. भुजंगासन का अभ्यास करने के लिए पेट के बल लेट जाए। 
  2. ध्यान रखे की पैरों का ऊपरी हिस्सा आसन करते समय फर्श से सटा होना चाहिए।
  3.  दोनों हाथों को छाती के पास ले जाकर ,कोहनी से मोड कर हथेलियों को फर्श पर रख दे। 
  4.  हाथों के सहारे शरीर के नाभि तक के भाग को ऊपर उठाये। 
  5. पीठ को कमान दे ,एवं गर्दन को पीछे की ओर खींचे। 
  6. कुछ देर इस स्थिति में बने रहे और पुनः सामान्य स्थिति में आ जाए। 
  7. इसी क्रिया को २-३ बार दोहराये।








8. धनुरासन योग | Dhanurasana Yoga 

धनुरासन योग | Dhanurasana Yoga





  • धनुरासन का अभ्यास करते समय शरीर को धनुष्य की तरह कमान दी जाती है। 
  • इसका अभ्यास करते समय पेट खाली होना आवश्यक है। 
  • साथ ही जिन्हे स्लिप डिस्क या कमर संबंधित कोई परेशानी है ,उन्हें इस आसन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। 
  • इस आसन का अभ्यास फेफड़ों को विस्तारित और ताकदवर बनाता है। 
  • यह कमर को लचीला और आकर्षक बनाने में विशेष कारीगर है। 
  • इसके नित्य अभ्यास से साधक को विशेष संतुलन की प्राप्ति होती है। 
  • रोजाना केवल १० मिनट के  अभ्यास से आप अच्छे स्वास्थ और शारीरिक रचना को बेहतर बना सकते है। 
  • आसन  की शुरुवात करते समय अपने किसी साथी या प्रशिक्षक को जरूर साथ रखे।



  • How To Do Dhanurasana | कैसे करे



  1. धनुरासन का अभ्यास करने के लिए ,जमीन पर चटाई बिछाकर पेट के बल लेट जाए। 
  2. दोनों पैरों को घुटने से मोड़कर ऊपर उठाये , दोनों हाथ पीछे ले जाकर यथाशक्ति दोनों पैरों को पकड़ ले। 
  3. ऐसा करते समय दोनों घुटनों के बिच उचित अंतर बनाये रखे। 
  4. अपनी छाती एवं गर्दन को ऊपर उठाकर जितना पीछे ले जा सके , ले जाए। 
  5. जीतनी देर इस अवस्था में रुक सकते है ,उतनी देर रुकने का प्रयत्न करे। 
  6. और पुनः सामान्य अवस्था में आ जाए। 
  7. पहली बार इसका अभ्यास करते समय शरीर को अत्यधिक ना ताने और धीरे धीरे प्रयास करे। 
  8. प्रतिदिन अभ्यास से शरीर को संतुलित करना आसान हो जाता है।


अधिक जानकारी के लिए पढ़े - धनुरासन कैसे करे , इसके क्या लाभ है ?



9. बालासन योग | Balasana Yoga

बालासन योग | Balasana Yoga





  • बालासन का अभ्यास साधक के अंदर शांति एवं समर्पित भावना को बढ़ाता है। 
  • योगसत्र के समाप्ति के दौरान या अंतिम चरण में जब आप इस आसन का अभ्यास करते है, तो ये आपके शरीर और मस्तिक्ष की थकावट को दूर कर आपको नयी ऊर्जा से भर देता है।


  • How To Do Balasana | कैसे करे



  1. आसन के अभ्यास के लिए चटाई बिछाकर, पैरों को घुटनों से मोड़कर  एड़ियों पर बैठ जाए। 
  2. अपने शारीरिक वजन को दोनों एड़ियों पर समान रूप से वितरित करे। 
  3. दोनों हाथों को एकसाथ ऊपर ले जाये। 
  4. श्वास छोड़ते हुए निचे आये एवं अपने मस्तक को फर्श पर टिका दे। 
  5. कंधो को ढीला छोड़े। 
  6. कुछ देर इसी अवस्था में बने रहे ,कुछ समय बाद वापस सामान्य अवस्था में लौट आये। 
  7. उपरोक्त विधि को ४ से ५ बार दोहाराये।


अधिक जानकारी के लिए पढ़े - बालासन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है ?


ऊपर मैंने आपको "Morning Yoga | अच्छे स्वास्थ के लिए सुबह करे ये योगासन " के बारे में जानकारी दी। क्या आपके लिए यह जानकारी उपयोगी थी ? अपनी राय आप कमेंट बॉक्स में दे सकते है।  किसी वस्तु विषय को अपने तक सिमित ना रख , दूसरों तक पहुँचाना एक महान भावना को जन्म देती है। इसलिए इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर  करना ना भूले।



Feb 15, 2019

Garbhasana In Hindi | गर्भासन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है

Garbhasana संस्कृत: गर्भासन ,गर्भ -भ्रूण ,आसन- मुद्रा
योग में वर्णित गर्भासन एक योगासन है। इसका अभ्यास करते समय व्यक्ति का शरीर भ्रूण (गर्भ में पलनेवाले  शिशु) की तरह दिखाई देता है। इसीकारण इसे गर्भासन के नाम से नामित किया गया है। इस आसन में संपूर्ण शरीर का वजन कूल्हों पर संतुलित किया जाता है। यह शरीर की संतुलन शक्ति को बढ़ाता है ,साथ ही उत्तेजना को शांत कर मस्तिक्ष को शांत रखता है।  प्रस्तुत लेख Garbhasana In Hindi  के संपूर्ण जानकारी पर आधारित है,जिसका अभ्यास आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।




Garbhasana In Hindi | गर्भासन योग 

Garbhasana In Hindi  गर्भासन योग






  • How To Do Garbhasana | गर्भासन कैसे करे



  1. इस आसन का अभ्यास किसी शांत और हवादार जगह पर करे। जमीन पर चटाई बिछाकर पद्मासन में बैठ जाए। 
  2. मेरुदंड (रीढ़  की हड्डी ) को सीधा रखे।
  3.  अपने दोनों हाथों को  जाँघों और बछड़ों के बिच डाले। 
  4. दोनों हाथों की कोहनियों को ,बछड़ों की मांसपेशियों में चारों तरफ घुमाये। जिससे आपके हाथों को आसानी  से मोड़ा जा सके। 
  5. शरीर को अपने कूल्हों पर संतुलित करने के लिए , श्वास छोड़ते हुए दोनों हाथों के साथ पैरों को ऊपर उठाये। 
  6. अपने दाहिने हाथ से अपना बाय कान पकडे।
  7.  इसीतरह बाए हाथ से अपना दाहिना कान पकडे। 
  8. इस स्थिति में जीतनी देर संभव हो संतुलन बनाये रखे। 
  9. आसन के दौरान श्वास गति को सामान्य बनाये रखे। 
  10. सामन्य स्थिति में आने के लिए कानों को छोड़े और कम से कम ३-४ बार मुद्रा को दोहराये। 
  11. इस आसन का अभ्यास करते समय ,आप अपना ध्यान नाक के अग्रभाग या प्राकृतिक श्वास पर केंद्रित कर सकते है।








Garbhasana Benefit | गर्भासन के लाभ



  1. प्रतिदिन इस आसन का अभ्यास मस्तिक्ष की धमनियों को आराम पहुंचाता है। 
  2. यह उत्तेजना ,क्रोध ,मानसिक विकार ,अत्यधिक तनाव में फायदेमंद है। 
  3. एकाग्रता क्षमता को बढ़ाकर बुद्धि को ओजस्वी बनाता है।
  4.  आध्यात्मिक मार्ग को प्रशस्त कर ,आंतरिक ऊर्जा को बढ़ाता है। 
  5. इसका अभ्यास पेट की आंतरिक मांसपेशियों को मालिश कर उन्हें स्वस्थ बनाता है। 
  6. इससे भूक खुलकर लगती है। 
  7. मोटापा दूर कर वजन कम करने में सहायक है। 
  8. यह आपकी शारीरिक मुद्रा में सुधार लाने के लिए सर्वोत्तम आसन है। 
  9. समस्त मूत्रविकार ,शुक्रक्षय ,कमजोरी ,स्वप्नदोष ,शीघ्रपतन इत्यादि समस्याओं को दूर रखता है। 
  10. यह मुद्रा आपकी शारीरक एवं मानसिक संतुलन में वृद्धि करता है।
  11. इसका नियमित अभ्यास साधक में सहनशीलता ,लचक,धैर्य एवं स्थिरता जैसे गुणों को उजागर करता  है। 










Begainner Tips | शुरुवात के लिए कुछ टिप्स



  1. पहली बार इस आसन का अभ्यास करते समय बछड़ों की मांसपेशियों में हाथों को फ़साना कष्टदायी हो सकता है। 
  2. इसे आसन बनाने के लिए पहले २ से ३ हफ़्तों तक कुक्कुटासन और तुलासन का अभ्यास करना चाहिए। 
  3. जब आपका शरीर पूरी तरह संतुलित और तैयार हो, तभी गर्भासन का अभ्यास करे। 
  4. शुरुवात में पैरों को ऊपर उठाते समय संतुलन नहीं बन पाता इसलिए संतुलन बनने तक आप दीवार के सहारे इसका अभ्यास कर सकते है। 
  5. अगर अभ्यास करते समय हाथ कानों तक ना पहुंच पाए तो दोनों हाथों से नमस्कार मुद्रा बनाकर आसन का अभ्यास करे।







Some Things You Need To Know | ध्यान देने योग्य बाते



  • यह आसन खाली पेट करना आवश्यक है। 
  • सुबह योगसत्र के बिच इसका अभ्यास करना चमत्कारी परिणाम देता है। 
  • पर अगर आप शाम के समय योगाभ्यास करते है तो अपने भोजन और अभ्यास के बिच ४ से ५ घंटे का समय छोड़ना याद रखे।







Garbhasana Precautions | गर्भासन में सावधानी



  1. जिन्हे कूल्हों पर कोई घाव या तकलीफ हो उन्हें इस आसन से बचना चाहिए। 
  2. जो लोग बवासीर की समस्या से ग्रस्त है ,वो इसका अभ्यास ना करे। 
  3. इस आसन में पारंगत होने के लिए पद्मासन में महारथ प्राप्त करना आवश्यक है ,जो पद्मासन नहीं लगा सकते या पद्मासन के समय पीड़ा का अनुभव करते है उन्हें आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।





गर्भासन से पूर्व किये जाने वाले आसन








गर्भासन के बाद किये जाने वाले आसन







इस लेख में मैंने आपको Garbhasana In Hindi के बारे में जानकारी दी। क्या यह लेख आपके लिए उपयोगी था ? आप अपनी प्रतिक्रिया कमेंट के माध्यम से दे सकते है। गर्भासन के अभ्यास के लिए धैर्य ,सहनशीलता और नियमितता का होना आवश्यक है। इन्ही तीन सीढ़ियों पर चलकर आप सफलता के शिखर तक पहुंच सकते है। लेख पसंद आनेपर इसे अपने स्नेही और मित्रों तक जरूर बाटें।








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Feb 6, 2019

Katichakrasana | कटिचक्रासन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है

Katichakrasana संस्कृत: कटिचक्रासन ,कटी -कमर ,चक्र - पहिया ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित कटिचक्रासन एक सरल योगासन है। इसे हर कोई अपने स्वास्थ अनुसार कर सकता है। ये  एक सरल और चमत्कारी आसन है। इसका अभ्यास करते समय कमर को दोनों तरफ मोड़ा जाता है। इसीकारण यह कटिचक्रासन के नाम से प्रचलित है। अनावश्यक चर्बी से छुटकारा पाकर ,शरीर को लचीला बनाने के लिए इस आसन का अभ्यास आवश्यक है। प्रस्तुत लेख में  "Katichakrasana" की संपूर्ण जानकारी देने जा रहे है ,  जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगी।


Katichakrasana Yoga | कटिचक्रासन योग 

Katichakrasana Yoga | कटिचक्रासन योग








  • How To Do Katichakrasana | कटिचक्रासन कैसे करे



  1. इस आसन का अभ्यास किसी स्वच्छ और एकांत जगह पर करे। जमीन पर चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाए। 
  2. अपने कंधों और मेरुदंड को सीधा तान कर रखे। 
  3. दोनों पैरों में कम से कम आधे से एक फिट का आवश्यक अंतर ले । 
  4. दोनों हाथों को कंधों के बराबर ऊपर उठाये। जिससे आपके  दोनों हाथ और कंधे एक सीधी रेखा बनाएंगे। 
  5. एक लंबी श्वास भरे और श्वास छोड़ते हुए अपनी दाहिनी और मुड़े। 
  6. दाहिनी और मुड़ते समय इस बात का ध्यान रखे की, आपकी कमर के ऊपरी भाग को मोड़ना है। किसी भी अवस्था में अपने पैरों को अपनी जगह से ना हिलाये। 
  7. गर्दन को दाहिनी और मोड़कर रखे। 
  8. जितनी देर इस अवस्था में रुकना संभव हो उतनी देर श्वास को बाहर रोककर आसन में बने रहे। 
  9. कुछ देर बाद पुनः सामान्य अवस्था में आ जाए।
  10.  इसी क्रम को अपने बायीं और से करे। 
  11. दिनभर में आप इसे १० से १५ बार दोहरा सकते है। 
  12. आसन के दौरान थकावट महसूस होनेपर कुछ देर विश्राम करे।
  13.  इस मुद्रा का अभ्यास करते समय साधक अपना ध्यान रीढ़ का निचला हिस्सा या मूलाधार चक्र पर केंद्रित करता है।






Katichakrasana Benefit | कटिचक्रासन के लाभ



  1. नियमित  इस आसन का अभ्यास शरीर को लचकदार एवं हल्का बनाता है। 
  2. इससे कमर आकर्षक और सुंदर दिखने लगती है। 
  3. यह शरीर में मौजूद अतिरिक्त वसा को दूर कर वजन कम करने में सहायक है।  
  4. इसके अभ्यास से आलस्य दूर होकर शरीर और दिमाग को तरोताजा करता है।  
  5. यह मेरुदंड से जुडी समस्त नाड़ियों को शुद्ध करता है। 
  6. मेरुदंड और कमर को मजबूती प्रदान करता है। 
  7. गर्दन एवं कंधों की मांसपेशियों को खोलता है। 
  8. नियमित रूप से इसका अभ्यास किया जाए, तो ये संपूर्ण शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन (शुद्धिकरण) करता है।
  9.  पाचनक्षमता को मजबूत बनाकर भूक को बढ़ाता है। 
  10. यह कब्ज ,मंदाग्नि ,अम्लता ,तनाव ,मलावरोध ,हाइपोथॉयरॉइड जैसे रोगों में लाभदायक है।







Some Points You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बातें



  1. इस आसन का अभ्यास खाली पेट किया जाना चाहिए। 
  2. सुबह सवेरे इसका अभ्यास करना सकारात्मक लाभ प्रदान करता है। 
  3. आप चाहे तो शाम के समय भी इसका अभ्यास कर सकते है ,बस आपको अपने भोजन और अभ्यास के बिच ५ से ६ घंटे का समय छोड़ना आवश्यक है। 
  4. जिससे आपका खाना आसानी से पच जाए और आप नई ऊर्जा के साथ कटिचक्रासन का अभ्यास कर सके।







Katichakrasana Precautions | कटिचक्रासन में सावधानी



  1. यह आसन गर्भवती स्त्रियों के लिए नहीं है। 
  2. इसके अलावा अगर आप हर्निया ,पेट या रीढ़ की सर्जरी या स्लिप डिस्क  से पीड़ित है तो भी इसका अभ्यास ना करे।








कटिचक्रासन से पहले किये जाने वाले आसन









कटिचक्रासन के बाद आप इन आसनों का अभ्यास कर सकते है।






आज मैंने आपको Katichakrasana के बारे में उपयुक्त जानकारी दी। कटिचक्रासन योग की शुरुवात करने के लिए भी एक सरल और फायदेमंद आसन है। जिसे कोई भी चाहे वो नया हो या पुराना हर कोई आसानी से कर सकता है। क्या यह लेख आपके लिए उपयोगी था ? आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दे। साथ ही लेख पसंद आनेपर अपने दोस्तों के साथ जरूर बाटे।









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Jan 27, 2019

Mahavir Asana | महाविरासन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है

Mahavir Asana संस्कृत : महाविरासन ,महावीर - पराक्रमी ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित महाविरासन एक योगासन है। पवनपुत्र हनुमान जो विशेषतः बल बुद्धि के देवता है , उनका एक नाम महावीर भी है। ठीक उन्ही की तरह यह आसन भी शक्ति का खजाना है। इसलिए यह महाविरासन के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त इसे "मारुती आसन" के नाम से भी लोग जानते है। इसका अभ्यास साधक में शौर्य और पराक्रम की भावना को उजागर करता है। प्रस्तुत लेख में Mahavir Asana की संपूर्ण जानकारी देने जा रहे है ,जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगी।





Mahavir Asana | महाविरासन योग 

Mahavir Asana | महाविरासन योग






  • How To Do Mahavir Asana | महाविरासन कैसे करे



  1. इस आसन का अभ्यास किसी शांत और एकांत जगह पर करे। जमीन पर चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाए। 
  2.  बाए पैर को एक से दो फिट पीछे ले जाकर ,पंजे को जमीन से सटाकर रखे। 
  3. दाहिने पैर को घुटने से मोड़ कर ,धड़ का झुकाव आगे की और रखे। जब आप ऐसा करते है तो आपका बाया पैर जो पीछे है ,उसे (जमीन से सटाकर ) स्थिर रखे। 
  4. धड़ को आगे झुकाते समय अपने मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी ) को कमान दे ,और अपनी छाती को  फुलाये। 
  5. अपने दोनों हाथों से मुट्ठी बांधे (अपने अंगूठे को अंदर दबाकर) दोनों हाथों को छाती से ८ से १० इंच आगे ले जाए। 
  6.  एक लंबी श्वास लेकर , दोनों मुठियों को जोरदार दबाये और अपने गर्दन की मांसपेशियों को सख्त करे। श्वास बाहर छोड़ दे। 
  7. पुनः श्वास लेते हुए  पेट को फुलाये और धीरे-धीरे श्वास बाहर छोड़े। 
  8. इसप्रकार २ मिनट तक आसन में रहते हुए इस क्रिया को जारी रखे। 
  9. २ मिनट के बाद वापस सामान्य अवस्था में आकर कुछ देर विश्राम करे। 
  10. उपरोक्त क्रिया को अपने दूसरे पैर के साथ भी करे। इसीप्रकार पैरों को बदलकर ५-५ बार करे। 
  11. इस आसन का अभ्यास करते समय संपूर्ण शरीर को सजग और तान कर रखे। 
  12. मन में साहस और पराक्रम की दिव्य भावना को उजागर होने दे। 
  13. इस मुद्रा का अभ्यास करते समय साधक अपना ध्यान किसी एक बिंदु पर नहीं बल्कि संपूर्ण शरीर पर केंद्रित करता है। (संपूर्ण शरीर एवं आत्मा के प्रति सजग रहता है )






Mahavir Asana Benefit | महाविरासन के लाभ



  1. प्रतिदिन इस आसन का अभ्यास संपूर्ण शरीर को मजबूत रखता है। 
  2. इसके अभ्यास से प्राणवायु प्राकृतिक रूप से शरीर में प्रवाहित होती है। 
  3. यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढाकर छाती को चौड़ा एवं मजबूत बनाता है। 
  4. इसका नियमित अभ्यास मोटापे को दूर कर वजन कम करने में सहायक है।  
  5. यह कद को बढ़ाता है एवं शरीर को हल्का रखता है। 
  6. इसका नियमित अभ्यास शरीर में खून का  संचार बढ़ाता है ,और रक्त को शुद्ध करता है। 
  7. शारीरिक रचना में सुधार लाने के लिए यह अत्यंत फायदेमंद आसन है। 
  8. इसका अभ्यास जठराग्नि को प्रदीप्त कर पाचनतंत्र को विकसित करता है। 
  9. यह मंदाग्नि ,कमर दर्द ,वायुविकार ,अतिनिद्रा ,वीर्यविकार इत्यादि समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। 
  10. नित्य इस आसन का अभ्यास व्यक्ति में धैर्य ,शक्ति ,साहस ,शौर्य जैसे गुणों को बढ़ाता है।







Some Point You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते



  1. इस आसन का अभ्यास खाली पेट करे। 
  2. सुबह सूर्योदय के समय शुद्ध वायु प्रवाहित होती है। यह इस आसन के लिए उपयुक्त समय है।  
  3. आप चाहे तो इसका अभ्यास अपने शाम के सत्र में भी कर सकते है। बस अपने पेट को कुछ खाली रखना याद रखे। जिससे आप सकारात्मक  ऊर्जा के साथ इस आसन का अभ्यास कर पाए।







Mahavir Asana Precautions | सावधानी



  1. जिन्हे उच्च रक्तचाप या हृदयरोग की समस्याएं है ,वो इस आसन का अभ्यास ना करे।
  2. गर्भवती स्त्रियों के लिए यह आसन नहीं है। 
  3. अगर आपको कोई गंभीर शारीरिक या मानसिक बिमारी है ,तो आपको इस आसन का अभ्यास करने से पूर्व अपने चिकित्सक (डॉक्टर) की सलाह लेना आवश्यक है।








महाविरासन से पूर्व किये जानेवाले आसन









महाविरासन के बाद किये जानेवाले आसन







इस  लेख में मैंने आपको "Mahavir Asana" के बारे में जानकारी दी। क्या यह जानकारी आपके लिए उपयुक्त थी ? आप अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में दे सकते है। इसे अपने दोस्तों के साथ बांटना ना भूले। महाविरासन का अभ्यास जीवन में संयम ,धैर्य ,बल ,साहस ,स्वास्थ जैसे अनगिनत गुणों को  लेकर आता है। यह रचना आंजनेय हनुमानजी को समर्पित है ,जो बल ,बुद्धि और विद्या के स्वामी है।

Jan 21, 2019

Urdhva Padmasana | उर्ध्व पद्मासन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है

Urdhva Padmasana  संस्कृत : उर्ध्व पद्मासन ,उर्ध्व - ऊपर की ओर ,पद्म -कमल ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित उर्ध्व पद्मासन एक उन्नत योगासन है। इसका अभ्यास करते समय शरीर को पूर्ण रूप से कंधो के सहारे संतुलित कर पद्मासन का अभ्यास करना पड़ता है। शुरुवात में योगी हलासन और सर्वांगासन में महारथ पाने के बाद ही इस आसन का अभ्यास करता है। सर्वांगासन या हलासन के अभ्यास से पूर्व अगर इस आसन का अभ्यास किया जाता है ,तो यह साधक के लिए कठिनाईया उत्पन्न कर देता है।  प्रस्तुत लेख में Urdhva Padmasana की संपूर्ण जानकारी देने जा रहे है ,जो आपके लिए लाभदायक साबित होगी।



Urdhva Padmasana | उर्ध्व पद्मासन 

Urdhva Padmasana





  • How To Do Urdhva Padmasana | उर्ध्व पद्मासन कैसे करे



  1. उर्ध्व पद्मासन का अभ्यास किसी शांत और खुली जगह करना चाहिए। जमीन पर चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाए। 
  2. श्वास लेते हुए दोनों पैरों को ऊपर उठाये और उँगलियों को सर के ऊपर टिकाये। 
  3. इस अवस्था में घुटनों को सीधा रखे, आप सहारे के लिए हाथों को पीठ के पीछे ले जा सकते है। योग में यह आसन हलासन के नाम से जाना जाता है। कुछ देर बाद पुनः सामान्य अवस्था में आ जाए। 
  4. दोनों पैरों को ऊपर उठाये, संतुलन बनाने के लिए हाथों का सहारा ले। 
  5. शरीर का वजन अपने दोनों कंधों और हाथों पर विभाजित कर दे। जब आप अपने आप को इस अवस्था में संतुलित पाए ,तो दोनों पैरों से पद्मासन लगाए। 
  6. आप चाहे तो हाथों को पीठ के अलावा दोनों घुटनों पर रख सकते है। 
  7. इस स्थिति में जितनी देर रुकना संभव हो उतनी देर बने रहे। अभ्यासानुसार समय अवधि को १ मिनट तक ले जाए। 
  8.   आसन का अभ्यास करते समय श्वास गति सामान्य बनाये रखे ।
  9. इस आसन का अभ्यास करते समय अपना ध्यान नाक के अग्र भाग या विशुद्ध चक्र पर केंद्रित करना चाहिए। 







Urdhva Padmasana Benefit | उर्ध्व पद्मासन के लाभ


  1. उर्ध्व पद्मासन के नियमित अभ्यास से रक्त संचार मस्तिक्ष की ओर होने लगता है।  
  2. यह संपूर्ण शरीर को लचीला ,शक्तिशाली एवं संतुलित रखता है। 
  3. जठराग्नि को प्रदीप्त कर पाचन शक्ति को बढ़ाता है। 
  4. वात ,पित्त एवं कफ को नियंत्रित रखता है। 
  5. कमर और कंधो को मजबूती प्रदान करता है। 
  6. रोजाना इस आसन का अभ्यास शरीर और आत्मा के प्रति सजगता को बढ़ाता है। 
  7. ध्यान साधक एवं जो ध्यान का अभ्यास करना चाहते है ,उनके लिए यह लाभदायी आसन है।
  8. मानसिक उत्तेजना को शांत कर स्मरणशक्ति और एकाग्रता क्षमता को बढ़ाता है। 
  9. रुसी ,असमय बालों का सफ़ेद होना इत्यादि रोगों से बचाता है। 
  10. पीनियल एवं पिट्यूटरी ग्रंथि को प्रभावित कर थॉयरॉइड को नियंत्रित करता है। 
  11. तनाव ,अवसाद ,माइग्रेन  को दूर करने में सहायक है। 
  12. शारीरिक रचना में सुधार कर मोटापा घटाने में सहायक है। 
  13. यह आसन प्राणों को उर्ध्व बनाता है। नवयुवक एवं विद्यार्थियों को इस आसन का लाभ अवश्य लेना चाहिए। 
  14. ये ब्रम्हचर्य को बनाये रखता है।
  15.  स्वप्नदोष ,रक्तदोष एवं वीर्यविकारों से मुक्ति दिलाता है। 
  16. मस्तिक्ष को मेधावी एवं ओजस्वी बनाता है।







Beginner Tips | शुरुवात के लिए टिप्स


  • शुरुवात में इसका अभ्यास करते समय आप कंधों के निचे किसी मुलायम गद्दे या कंबल का प्रयोग करे। 
  • संतुलन बनाने में कठिनाई महसूस होनेपर १-२ हफ़्तों तक दीवार के सहारे सर्वांगासन का अभ्यास करे। 
  • पैरों को ऊपर ले जाने के बाद पद्मासन लगाने में मुश्किल होनेपर ,पद्मासन की जगह सुखासन  का अभ्यास करे। 








Some Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते


  1. इस  आसन का अभ्यास खाली पेट करना आवश्यक है। बेहतर होगा अगर आप इसे सुबह सूर्योदय के समय करे। सुबह के समय दिमाग शांत और पेट खाली रहता है ।
  2.  आप चाहे तो इसे शाम के समय भी कर सकते है ,बस अपने भोजन और अभ्यास के बिच ५ से ६ घंटे का अंतर् छोड़ना याद रखे।







Urdhva Padmasana Precautions | उर्ध्व पद्मासन में सावधानी



  1. इस आसन का अभ्यास करने से पहले सर्वांगासन एवं हलासन में पारंगत होना आवश्यक है। इन आसनों के बिना किया गया अभ्यास कठिनाई दे सकता है।
  2. मेरुदंड से जुडी कोई समस्या होनेपर इसका अभ्यास करने से बचे।
  3. इसके अलावा तीव्र सिरदर्द ,कमर में परेशानी या उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्तियों को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। 
  4. ह्रदय संबंधित परेशानी होनेपर अपने चिकित्स्क (डॉक्टर) की सलाह लेकर ही आसन का अभ्यास करे। 
  5. ४५ की उम्र के बाद इस आसन को नहीं करना चाहिए। 
  6. पहली बार इसका अभ्यास किसी प्रमाणित योग प्रशिक्षक या किसी साथी के सानिध्य में करे।







उर्ध्व पद्मासन से पहले किये जाने वाले आसन










उर्ध्व पद्मासन के बाद किये जाने वाले आसन







ऊपर आपने Urdhva Padmasana के बारे में पढ़ा। क्या यह जानकारी आपको उपयुक्त लगती है ? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में जरूर दे। साथ ही इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर करना ना भूले। उर्ध्व पद्मासन का अभ्यास मुश्किल प्रतीत होता है। पर नियमित अभ्यास से इसे साधा जा सकता है। इसे अपने दैनिक योगसत्र में शामिल करना एक अच्छा निर्णय साबित हो सकता है। क्योंकि मनुष्य जीवन का अधिकांश भाग ,उसके स्वयं के किये गए अच्छे या बुरे निर्णयों पर ही निर्भर करता है।





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Jan 17, 2019

Bird Pose Yoga | पक्षी आसन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है

Bird Pose Yoga संस्कृत : पक्षी आसन ,पक्षी - पंछी , आसन -मुद्रा
योग में वर्णित पक्षी आसन एक प्रमुख योगासन है। योग में यह आसन पक्षियों की प्रेरणा से लिया गया है। इसीकारण यह पक्षी आसन के नाम से जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे "Bird Pose" भी कहा जाता है। इसके नियमित अभ्यास से ही ,योगी अपने प्राणवायु को वश में कर ,अपनी साधना को सिद्ध करने में सक्षम होते है । निचे Bird Pose Yoga की संपूर्ण जानकारी देने जा रहे है ,जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध होगी।


Bird Pose Yoga | पक्षी आसन 

Bird Pose Yoga | पक्षी आसन









  • How To Do Pakshi Asana (Bird Pose) पक्षी आसन कैसे करे





  1. पक्षी आसन के अभ्यास के लिए ,जमीन पर चटाई बिछाकर दंडासन में (दोनों पैरों को सामने फैलाकर) बैठ जाए। 
  2. अब दोनों पैरों को जितना संभव हो ,उतना फैलाये। 
  3. ऐसा करते समय घुटनों को सीधा एवं जमीन से सटाकर रखे। 
  4. कमर को सीधा रखे। 
  5. दोनों हाथों को कंधों के बराबर ऊपर उठाकर ,हवा में सीधी रेखा बनाये। 
  6.  दाहिने हाथ को सर के ऊपर से ले जाकर बाएं पैर के अंगूठे को पकड़े। 
  7. ऐसा करते समय कमर को बाई और झुकाये। एवं अपने बाएं हाथ को नाभि के पास आराम करने दे। 
  8. श्वास की  गति को सामान्य बनाये रखे। 
  9. इसीप्रकार उपरोक्त क्रिया को हाथ बदलकर अपने बाए हाथ से करे। 
  10. इस तरह इसे बिना रुके 8  से 12 बार करे। 
  11. आसन समाप्त करने के लिए दोनों हाथों से  दोनों पैरों के अंगूठों को पकडे। 
  12.  जितना संभव हो उतना आगे झुककर छाती एवं गर्दन को फर्श से सटाने का प्रयास करे। 
  13. कुछ देर इसी अवस्था में रुके और वापस सामान्य स्थिति में आ जाए।









Bird Pose Yoga Benefit | पक्षी आसन के लाभ





  1. प्रतिदिन इस आसन के अभ्यास से मेरुदंड सहित समस्त नाड़ियाँ लचीली एवं शुद्ध होती है। 
  2. यह शरीर की बनावट को सुधारता है।
  3.  उत्तेजना  को शांत कर मन को एकाग्र करता है। 
  4. स्मरणशक्ति एवं आत्मिक बल में वृद्धि करता है। 
  5. यह शरीर में रक्तपरिसंचलन को सुचारु करता है। 
  6. उच्च रक्तचाप ,बवासीर,धातु रोग ,प्रमेह ,मूत्र विकार ,स्वप्नदोष ,मलावरोध इत्यदि रोगों से छुटकारा दिलाता है। 
  7. यह मोटापे को दूर कर वजन घटाने में सहायक है। 
  8. पेट संबंधित सभी बीमारियों में आराम दिलाता है। 
  9. भूक को बढ़ाता है ,तथा रोगप्रतिकारक शक्ति को मजबूत करता है।  
  10. मधुमेह एवं हाइपोथॉयरॉइड से ग्रस्त व्यक्तियों को इस आसन का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। 
  11. इसका रोजाना अभ्यास करने से शरीर स्वस्थ एवं हल्का महसूस करता है। 
  12. यह जीवनशक्ति को बढाकर प्राणों को उर्ध्व बनाने में सहायक है। 





Some Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते



  • सुबह ब्रम्हमुहूर्त के समय इस आसन का अभ्यास आनंद की अनुभूति कराता है। 
  • इसका अभ्यास करने के लिए आपका पेट खाली होना आवश्यक है। आप चाहे तो शाम के  समय भी इसका अभ्यास कर सकते है। बस अपने भोजन और अभ्यास के बिच आवश्यक अंतर् छोड़ना याद रखे।







Bird Pose Yoga Precautions | पक्षी आसन में सावधानी



  1.  जिन्हे स्लिप डिस्क या कमर संबंधित कोई परेशानी है ,उन्हें इस आसन का अभ्यास अपनी सुविधा अनुसार धीरे धीरे करना चाहिए।
  2. आसन की शुरुवात माध्यम गति से करे ,फिर अभ्यास अनुसार आप गति को बढ़ा सकते है। 





पक्षी आसन से पहले किये जाने वाले आसन 






पक्षी आसन के बाद किये जाने वाले आसन 





इस लेख में आपने Bird Pose Yoga के बारे में पढ़ा । क्या आपको यह जानकारी उपयोगी लगी ? आप अपनी प्रतिक्रिया कमेंट कर के दे सकते है। साथ ही इसे अपने साथियों के साथ जरूर शेयर करे। अपने योगसत्र में इस आसन को जरूर शामिल करे ,यह आपको आंतरिक विजय की अनुभूति कराता है।




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Jan 14, 2019

Prarthana Asana (Pray Pose) प्रार्थनासन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है

Prarthana Asana  संस्कृत : प्रार्थनासन , प्रार्थना - याचना या दुआ करना ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित प्रार्थनासन एक सरल और लाभदायी योगासन है। संस्कृत भाषा में इस आसन को प्रणामासन के नाम से भी जाना जाता है।  पाश्चिमात्य संस्कृति में इसे "Pray Pose" के नाम से नामित किया गया है। प्रार्थना एक आसान तरिका है ,जिसके द्वारा एक व्यक्ति अपना संदेश या मन की बात  ईश्वर तक पहुंचा सकता है। सूर्यनमस्कार की १२ स्थितियों का अभ्यास करते समय भी इस आसन का अभ्यास किया जाता है।  आप योग की शुरुवात करते समय या योगसत्र के अंतिम चरण में भी इस आसन का अभ्यास कर सकते है। इस लेख में Prarthana Asana (Pray Pose) की संपूर्ण जानकारी साझा करने जा रहे है ,जो आपके लिए उपयोगी साबित होगी।




Prarthana Asana (Pray Pose) | प्रार्थनासन योग 

Prarthana Asana (Pray Pose) | प्रार्थनासन योग





  • How To Do Prarthana Asana Yoga | प्रार्थनासन कैसे करे


प्रार्थनासन का अभ्यास दो विधियों द्वारा किया जाता है। प्रस्तुत दोनों विधियों में से आप किसी भी एक विधि का अभ्यास कर सकते है।


  • पहली विधि 
  1. जमीन पर चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाए। 
  2. मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी ),छाती एवं गर्दन को सीधी रेखा में रखे। 
  3. ४ से ५ बार लंबी गहरी श्वास ले। 
  4. श्वास छोड़ते हुए दोनों हाथों को कोहनी से मोड़कर छाती के बिच लेकर आये। 
  5. दोनों हथेलियों के तलवों को एक दूसरे के साथ जोड़ दे।
  6.  जितनी देर इस अवस्था में रुकना संभव हो उतनी देर बने रहे। 
  7. इस विधि का अभ्यास करते समय अपने मन में ईश्वर के प्रति समर्पण और विश्वास की भावना रखनी चाहिए। एवं आँखों को बंद कर ईश्वर से मंगल कामना करनी चाहिए।







  • दूसरी विधि


  1. प्रार्थनासन की दूसरी विधि का अभ्यास करने के लिए निचे चटाई बिछाकर सामान्य अवस्था में बैठ जाए। 
  2. दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर  ,एड़ियों एवं पंजो को जोड़ दे। 
  3. दोनों हाथों को सामने लाकर नमस्कार की मुद्रा में जोड़े। 
  4. कोहनियों को जाँघों पर रखे और हाथों की उँगलियों को ठोड़ी से सटाकर रखे। जिससे उँगलियों का ऊपरी भाग ठोड़ी से स्पर्श करता रहे।
  5.  इसी अवस्था में बने रहे।  
  6. इस आसन का अभ्यास करते समय श्वास को जितना संभव हो उतना गहरा और लंबा लेना चाहिए।






Prarthana Asana (Pray Pose) Benefit | प्रार्थनासन के लाभ 

Prarthana Asana (Pray Pose) Benefit





  1. नियमित रूप से प्रार्थनासन का अभ्यास मन को शांति प्रदान करता है। 
  2. यह उत्तेजना को शांत कर दिमाग को ताजा एवं चिंतामुक्त करता है। 
  3. नित्य इसका अभ्यास उच्च रक्तचाप के रोगियों को आराम दिलाता है। 
  4. यह स्मरणशक्तिवर्धक है ,इसके अभ्यास से बुद्धि कुशाग्र और तेजस्वी बनती है। 
  5. इसका अभ्यास व्यक्ति के मनोमय कोष को प्रभावित करता है ,जिसके कारण पुरानी से पुरानी बीमारिया आसानी से दूर होने लगती है। 
  6. यह आसन धारणा शक्ति को बलवान बनाता है। 
  7. एकाग्रता क्षमता को बढ़ाता है। 
  8. खून में शुद्ध प्राणवायु का संचार करता है। 
  9. खून को बढाता है। 
  10. अनीमिया जैसी बीमारियों में लाभदायी है। 
  11. इसका अभ्यास व्यक्ति में समर्पण की भावना को बढ़ाता है। 
  12. मानसिक तनाव एवं अवसाद में फायदेमंद है।







Some Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते



  1. अन्य आसनों की तरह ही इस आसन का अभ्यास खाली पेट किया जाना चाहिए। 
  2. सुबह सूर्योदय के समय इसका अभ्यास आपको सकारात्मक परिणाम दिलाता है। आप चाहे तो अपने योगसत्र की शुरुवात ही आप प्रार्थनासन से कर सकते है।




Prarthana Asana Precautions | प्रार्थनासन में सावधानी



  • प्रार्थनासन का अभ्यास किसी भी उम्र का व्यक्ति सरलता से कर सकता है।








प्रार्थनासन से पहले आप इन आसनों का अभ्यास कर सकते है 






प्रार्थनासन के बाद किये जाने वाले आसन 







इस लेख मैंने आपको Prarthana Asana के बारे में जानकारी दी। क्या यह जानकारी आपके लिए उपयोगी थी ? अपनी प्रतिक्रिया आप कमेंट बॉक्स में दे सकते है। इसे अपने दोस्तों एवं साथियों के साथ शेयर करना ना भूले।







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Dec 18, 2018

Upavistha Konasana Pose | उपविष्ठ कोणासन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है

Upavistha Konasana Pose संस्कृत : उपविष्ठ कोणासन ,उपविष्ठ - बैठे ,कोणासन - कोण मुद्रा
योग में वर्णित उपविष्ठ कोणासन शरीर को अच्छा खिंचाव  देता है।  यह बैठे आसनों में से एक बेहतरीन आसन है। इस आसन का अभ्यास व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से उन मुद्राओं के लिए तैयार करता है ,जिनका अभ्यास बैठकर किया जाता है। इसका अभ्यास करते समय पैरों को फैलाया जाता है। और मेरुदंड को आधारस्तंभ बनाकर धड़ को फर्श पर टिकाया जाता है। निचे Upavistha Konasana Pose की सरल जानकारी देने जा रहे है ,जो आपके स्वास्थ के लिए उपयुक्त साबित होगी।



Upavistha Konasana Pose | उपविष्ठ कोणासन योग 

Upavistha Konasana Pose







  • How To Do Upavistha Konasana | उपविष्ठ कोणासन कैसे करे



  1. इस आसन का अभ्यास किसी शांत जगह पर करे। 
  2. जमीन पर चटाई बिछाएं ,पैरों को सामने फैलाकर ,खड़े बैठ जाए। 
  3. मेरुदंड को सीधा रखे। पैरों को कंधों के समांतर फैलाये ,जिससे वो आपकी श्रोणि से ९० डिग्री का कोण बनाये।  
  4. ऐसी अवस्था में आपकी श्रोणि आरामदायक महसूस होनी चाहिए। दोनों हाथों को कूल्हों के पीछे जमीन पर टिका दे। 
  5. लंबी श्वास के साथ कमर को आगे की तरफ कमान दे और कंधों के किनारों को प्रसारित करे। कुछ समय इसी अवस्था में बने रहे। 
  6. धीरे धीरे हाथों को सामने की और ले जाए। एवं हाथों से दोनों तलवों को पकड़ ले। 
  7. तलवों को पकड़ते समय  केवल तलवों के मध्य भाग को पकड़ना है। इसके विपरीत अगर आप पैर के ऊपरी हिस्से या अंगूठे को पकड़ते है ,तो आगे झुकते समय कठिनाई हो सकती है। 
  8. श्वास छोड़ते हुए मेरुदंड को कमान दे। आगे बढे और ठोडी को फर्श पर टिकाएं। 
  9. श्वास गति को सामान्य बनाये रखे।
  10.  कम से कम १ मिनट तक आसन में बने रहे। 
  11. कुछ समय बाद श्वास लेते हुए पुनः सामान्य अवस्था में आ जाए। इस क्रिया को ३ से ४ बार दोहराये। 
  12. इस आसन का अभ्यास करते समय आप अपना ध्यान नाक के अग्रभाग पर ,भृकुटि के मध्य या श्वासों के आवागमन पर केंद्रित कर सकते है। 







Upavistha Konasana Benefits | उपविष्ठ कोणासन के लाभ 


  1. नियमित इस आसन का अभ्यास कमर के निचले हिस्सों को एक बेहतरीन खिचाव देता है। 
  2. यह आपके पैर ,कंधों की मांसपेशियां ,कोहनियों को मजबूत बनाता है।
  3.  इसका अभ्यास जठराग्नि को प्रज्वलित कर भूक को बढ़ाता है।
  4.  पेट अंगों की मालिश कर पाचनक्षमता को सुदृढ़ बनाता है।
  5.  अनावश्यक चर्बी को दूर कर वजन कम करने में सहायक है।  
  6. छाती को चौड़ा कर फेफड़ों को स्वस्थ बनाये रखता है। 
  7. कमर को लचीला और आकर्षक बनाता है। 
  8. मेरुदंड को बल देता है तथा कटिस्नायुशील को दूर रखने में मदद करता है। 
  9. हार्मोन्स को नियंत्रित रखता है एवं पुरुषत्व को बढ़ाता है। 
  10. इसके नियमित अभ्यास से दिमाग शांत रहता है।
  11.  यह गुर्दों को स्वच्छ और निरोगी बनाये रखता है। 
  12. समस्त वायुविकार इसके नियमित अभ्यास से खत्म हो जाते है। 
  13. इसका अभ्यास साधक में सहनशीलता ,धैर्य ,साहस , दयाभाव को जगाता है। 








Begainner Tips | शुरुवात के लिए टिप्स 



  1. शुरुवाती साधकों को ,जो पहली बार इसका अभ्यास करना चाहते है ,उनके लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण आसन साबित हो सकता है। 
  2. यदि आप आगे झुकते समय तकलीफ महसूस करते है ,तो इससे बचने के लिए पैरों को घुटनों से थोड़ा झुकाया जा सकता है। 
  3. श्रोणि को स्थिर एवं सहज रखने के लिए निचे तकिया या कंबल का प्रयोग करे। 







Upavistha Konasana Precautions | उपविष्ठ कोणासन में सावधानी 



  • यदि आप ऊसन्धि या रान नाड़ी की समस्या से पीड़ित है तो इस आसन का अभ्यास करने से बचे। 
  • यह आसन गर्भवती स्त्रियों के लिए नहीं है। 







Some Points You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बातें 



  1. सुबह ब्रम्हमुहूर्त में योगाभ्यास करना शरीर और आत्मा के लिए उपयुक्त माना जाता है। 
  2. इस आसन का अभ्यास करने से पहले आपका पेट खाली होना आवश्यक है। 
  3. किसी कारण अगर आप सुबह योगाभ्यास नहीं कर पाते , तो इसका अभ्यास आप शाम के समय भी कर सकते है। बस अपने अभ्यास और भोजन में ५ घंटे का अंतर् रखना याद रखे। 






उपविष्ठ कोणासन से पहले आप इन आसनों का अभ्यास कर सकते है। 









उपविष्ठ कोणासन के बाद किये जाने वाले आसन 






ऊपर आपने Upavistha Konasana Pose के बारे में जाना। नियमित अभ्यास के द्वारा इस आसन को साधा जा सकता है। यह आसन आपको साहस की पराकाष्ठा की अनुभूति कराएगा। क्या ये जानकारी उपयोगी थी ? आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में दे सकते है। इसे अपने साथियों के साथ शेयर करना ना भूले।







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Dec 13, 2018

Shalabhasana Yoga | शलभासन योग कैसे करे , इसके क्या लाभ है

Shalabhasana Yoga संस्कृत : शलभासन , शलभ - टिड्डी ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित शलभासन एक सरल योगासन है। शलभ या टिड्डी एक कीड़ा है ,जो मुख्यतः घास पर पाया जाता है। इस आसन का अभ्यास करते समय व्यक्ति  की रचना  टिड्डी किटक के समान दिखाई देती है ,इसीलिए यह शलभासन के नाम से जाना जाता है।  इसका अभ्यास मेरुदंड में एक अच्छा खिंचाव पैदा कर मांसपेशियों को मजबुत बनाता है। निचे Shalabhasana Yoga की आवश्यक जानकारी देने जा रहे है। जो आपके लिए उपयुक्त साबित होगी।



Shalabhasana Yoga | शलभासन योग 

Shalabhasana Yoga | शलभासन योग






  • How To Do Shalabhasana | शलभासन कैसे करे





  1. इस आसन का अभ्यास किसी शांत और स्वच्छ जगह पर करे। 
  2. जमीन पर चटाई बिछाकर पेट के बल लेट जाए। 
  3. दोनों हाथों को जाँघों के निचे फर्श से सटाकर रखे। 
  4. एक लंबी गहरी श्वास लेते हुए दोनों पैरों  को घुटनों से बिना मोड एकसाथ हवा में ऊपर उठाये। 
  5. इस स्थिति में शरीर का पूरा वजन आपकी निचले हिस्से की पसलियों तथा पेट पर पड़ता है। 
  6. कम से कम १ मिनट तक इस मुद्रा में रुकने का प्रयत्न करे। 
  7. कुछ देर रुकने के बाद श्वास छोड़ते हुए पैरों को निचे लाये और शरीर को आराम दे। 
  8. कुछ देर विश्राम के बाद पुनः इस क्रिया को दोहाराये। दिनभर में आप इस आसन का अभ्यास ४ से ५ बार कर सकते है।







Shalabhasana Benefits | शलभासन के लाभ



  1. नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास संपूर्ण शरीर को सक्रिय और तरोताजा करता है। 
  2. इसका अभ्यास शरीर में  रक्त संचालन को बढ़ाता है। 
  3. खून को परिशुद्ध कर रोगप्रतिकारक क्षमता का विकास करता है।
  4.  इसका अभ्यास हाथ ,कंधे ,जांघ ,एवं कूल्हों की मांसपेशियों को मजबूती  प्रदान करता है। 
  5. शरीर के आंतरिक अंगों की मालिश कर उन्हें सक्रीय करता है। 
  6. यह आपकी शारीरिक रचना में सुधार लाने के लिए बेहतरीन आसनों में से एक है।
  7.  यह छाती को चौड़ा एवं फेफड़ों को मजबूत बनाता है। 
  8. पीठदर्द से होनेवाली परेशानियों से राहत दिलाता है। 
  9. इसके नित्य अभ्यास से चयापचय संस्था नियंत्रित और स्वस्थ बनी रहती है। 
  10. हार्मोन्स संबंधित समस्याओं को दूर कर उन्हें नियंत्रित रखने में मदद करता है। 
  11. इसका नियमित अभ्यास थॉयरॉइड को दूर रखने में सहायक है । 
  12. ह्रदय को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाता है। 
  13. शारीरिक तथा मानसिक संतुलन में वृद्धि करता है। 
  14. यह दिमाग को तनावरहित एवं शांत बनाये रहता है। 
  15. अवसाद ,डिप्रेशन ,चिंता को दूर कर स्मरणशक्ति  में बढ़ोतरी करता है। 
  16. त्वचा को चमकदार बनाता है। 
  17. अत्यधिक चर्बी को दूर कर वजन घटाने में सहायक है।  
  18. बालों की समस्याएं ,असमय बालों का सफ़ेद होना रोकता है। 
  19. गले के अधिकतर रोग ख़त्म करता है। 
  20. थकान ,अनिद्रा ,भय ,इत्यादि मानसिक विकारों का शमन करता है। 
  21. यह उत्साह ,निर्भयता ,कठोरता ,सहनशीलता जैसे भावों को जगाता है।







Shalabhasana Precautions | सावधानी  



  • गर्दन या मेरुदंड पर गंभीर चोट या अन्य समस्या होनेपर इस आसन को ना करे।
  • यह आसन गर्भवती स्त्रियों के लिए नहीं है।
  • गंभीर सिरदर्द या माइग्रेन से पीड़ित होनेपर इसका अभ्यास ना करे।









Beginner Tips | शुरू करने के लिए टिप्स



  • पहली बार इस आसन का अभ्यास किसी मुलायम चटाई या कंबल पर करना चाहिए। 
  • शुरुवाती समय में संतुलन बनने तक अपने किसी साथी या गुरु के सानिध्य में इसका अभ्यास करे।








Some Points You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते



  1. इस आसन का अभ्यास खाली पेट करे। 
  2. सुबह सूर्योदय के समय इसका अभ्यास करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। 
  3. आप शाम के समय भी इस आसन का अभ्यास कर सकते है। बस आपको भोजन और अभ्यास के बिच कम से कम ५ घंटे का समय छोड़ना आवश्यक है।






शलभासन के पहले किये जाने वाले आसन














शलभासन के बाद निचे दिए गए आसनों का अभ्यास करे







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