अक्षयतृतीया के महत्त्व को जाने importance of akshaya tritiya 2018

importance of akshaya tritiya 2018 

आज वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि यानि अक्षयतृतीया का पावन पर्व पुरे देश में मनाया जा रहा है , इसलिए मैंने सोचा की क्यों न आज तुम्हे अक्षयतृतीया के महत्त्व के बारे में बता दू।  इसलिए जान लीजिये अक्षयतृतीया के महत्त्व के बारे में और उससे जुडी कुछ खास बाते। (Importance of akshaya tritiya 2018)

  • अक्षय है पुण्य - वेदों और शास्त्रों अक्षयतृतीया के बारे में उल्लेख मिलता है की " न क्षय इति अक्षय "  यानि जिसका कभी क्षय नहीं होता वो अक्षय है , अक्षयतृतीया के दिन किये हुए पुण्य का कभी क्षय नहीं होता और सौभाग्य बना रहता है। 
  • दान का महत्व- अक्षयतृतीया के दिन दिन दान करने का विशेष विधान बताया गया है , इस दिन किया हुआ दान सहज स्वीकार हो जाता है , और उसका कभी नाश नहीं होता , पुण्य बना रहता है, इस दिन विशेषरूप से आटा, चावल और तिल का दान करे।  
  • प्रार्थना होगी स्वीकार - अक्षयतृतीया के दिन अगर आप सच्चे मन प्रभु से प्रार्थना करते है तो आपकी प्रार्थना स्वीकार हो जाती है , या आप किसीसे माफ़ी मांगना चाहते है तो इसी दिन मांग लीजिये , आपको माफ़ी मिल जायेगी। 
  • शॉपिंग करे - अगर अपने पहले से कुछ खरीदने की प्लानिंग की है तो आज इस मौके को अपने हाथ से ना जाने दे , आज आप भूमि, सोना , या चांदी खरीद सकते है। 

Importance of Akshaytrutiaya
Culture


  • श्री विष्णु पूजा का विधान - अक्षयतृतीया के श्री विष्णुजी की पूजा को विशेष फलदायी माना गया है , इसलिए सच्चे मन से अपने हाथों से श्री विष्णुजी की चन्दन अर्पण करना चाहिए और यथासंभव " ॐ नारायण नमो नमः " मन्त्र का जाप करना चाहिए , आप चाहे तो दिनभर इसका मानसिक जाप भी कर सकते है। 
  • साधना होगी सफल - अक्षयतृतीया के दिन की हुयी  साधना विशेष प्रभावकारी होती है , इसलिए आप किसी साधना को शुरू करना चाहते है तो इससे अच्छा और दुर्लभ पर्व आपको कभी नहीं मिलेगा , इसलिए आज ही साधना प्रारंभ करे। 
  • विद्यार्थी करे संकल्प - अगर आपका पढाई में मन नहीं लगता या , आप किसी विशेष परीक्षा की तैयारी कर रहे है तो  आज अपने मन में पढाई करने का संकल्प ले , अक्षयतृतीया के दिन लिया हुआ संकल्प कभी खाली नहीं जाता। 
  • माता लक्ष्मी को करे प्रसन्न- अगर आप माता लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते है , तो शुक्रवार को खीर , ५ फल , ५ सुपारी ,शहद और भोजन को किसी मंदिर में जाकर किस कन्या या वृद्ध स्त्री को दान करे , याद रखे इस क्रिया को आपको हर महीने में १ बार अवश्य करना है। 
  • पितरो से मिलेगा आशीर्वाद - अक्षयतृतीया के दिन पितरो की पूजा का विशेष विधान है , इस दी दो मिटटी के मटको में पानी भरे , और पितरो के नाम का ग्रास निकालकर उनकी पूजा करे , पूजा होने के बाद मटको को किसी ब्राह्मण को दान दे दे। 

कुछ खास बाते - 

  • अक्षयतृतीया के दिन ही श्री बदरीनाथ के कपाट खुलते है। 
  • भगवान् श्रीकृष्ण को भी अक्षतृतीया के दिन ही सुदामा से चावल का दान मिला था , जिसके फलस्वरूप सुदामा अक्षय पुण्य के स्वामी बन गए। 
  • तीनो युगो में से त्रेतायुग की शुरुवात भी अक्षयतृतीया के दिन से ही प्रारंभ हुई। 
  • भगवान् श्रीविष्णु जी के , नर - नारायण , हयग्रीव , और परशुराम अवतार भी इसी दिन हुए। 
  • सतयुग , द्वापरयुग और त्रेतायुग का अंत भी अक्षयतृतीया के दिन ही हुआ। 
  • अक्षयतृतीया के दिन से ही मटके का पानी पिया जाता है आषाढ़ी एकादशी तक। 
  • इसी दिन से देवो के देव महादेव के शिवलिंग पर जलधारा लगायी जाती है। 


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