Apr 14, 2018

Complete Guide To Kapalbhati Pranayama In Hindi

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Kapalbhati Pranayama In Hindi  भारतीय संस्कृति में योग का विशेष रूप से स्थान है।  योग में यम , नियम ,आसन,  प्राणायाम , प्रत्याहार , ध्यान , धारणा और समाधी इन आठ अंगो का समावेश देखने को मिलता है।  जिसे अष्टांग योग के नाम से जाना जाता है। योग के चौथे अंग प्राणायाम में विभिन्न प्रकार की प्राण क्रियाओं को कर प्राणों को वश में किया जाता है ,जिससे साधक अपने मन को साधने में सक्षम बनता है।  कपालभाति प्राणायाम भी एक उत्कृष्ट और सरल प्राणायाम है। इस प्राणायाम के अभ्यास में रेचक क्रिया करके ,तेज गति से श्वास को बाहर धकेला जाता है। पहले योग की इन क्रियाओ को गुप्त रखा जाता था , इसकी व्याप्ति जंगलो में स्थित गुफाओं तक ही सीमित थी।  पर धीरे धीरे इसका प्रसार होने लगा और लोग इसका प्रयोग मन के साथ साथ शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भी करने लगे। प्रस्तुत लेख में Kapalbhati Pranayama In Hindi की संपूर्ण प्रक्रिया समझाने जा रहे है ,जो आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगी।




Kapalbhati Pranayama In Hindi - कपालभाति प्राणायाम 

Kapalbhati Pranayama In Hindi - कपालभाति प्राणायाम विधि
 Kapalbhati Pranayama Steps 








कपालभाति प्राणायाम की खोज कैसे हुयी ? 


क्या आपको पता है ? की कपालभाति प्राणायाम की खोज सर्वप्रथम किसने की ? अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते है। एक महान योगी जो नवनाथों में से एक है। जिन्होंने मछली के पेट से अवतार धारण किया इसीकारण जिनका नाम मच्छिंद्रनाथ प्रचलित हुआ , उन्होंने ही इस उत्कृष और अत्यंत प्रभावशाली प्राणायाम की खोज की थी। जो आज संपूर्ण मानव जाती के लिए किसी वरदान से कम नहीं। कपालभाति प्राणायाम दो अक्षरों से मिलकर बना है कपाल + भाति , जीसका सीधा अर्थ निकलता है,की जिस प्राणायाम को करने से मनुष्य के मस्तक पर ओज और तेज की छलक उठे उसे कपालभाति प्राणायाम कहा जाता है। जिसके अभ्यास से प्राण उर्ध्व गति प्राप्त करे उसे कपालभाति प्राणायाम कहा जाता है। कपालभाति प्राणायाम के अभ्यास से साधक के सभी रोग ठीक हो सकते है , पर कुछ विशेष अंगो पर इसका भारी प्रभाव देखने को मिलता है।  जैसे इसे करने से वात, पित्त, और कफ दोष दूर हो जाते है।  धारणा शक्ति विकसित करता है और श्वास रोगो से मुक्ति दिलाता है। कुंडलिनी शक्ति को भी इसी प्राणायाम के द्वारा उर्ध्व कर जाग्रत कर सकते है।  बस इसके लिए प्रतिदिन निष्ठापूर्वक अभ्यास करना आवश्यक है । दरअसल इस प्राणायाम का अधिक महत्व इसलिए है ,क्योंकि यह साधक को काल ,भय ,और संताप से दूर रखता है। यानी जो इसका नियमित अभ्यास करता है वो काल के अधीन नहीं होता। इसका अभ्यास बुढ़ापे को रोकने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त यह साधक को निर्भय बनाता है। जो प्रतिदिन इसका अनुभव करता है उसे किसी प्रकार का संताप ग्रसित नहीं करता।  









  • Kapalbhati Pranayama Steps 
  1.  कपालभाति प्राणायाम करने के लिए सुबह सूर्योदय से पूर्व का समय अच्छा  माना जाता है।  
  2. अभ्यास करने के लिए सर्वप्रथम किसी स्वच्छ , हवादार और एकांत स्थान में चटाई  बिछाकर बैठ जाये।  
  3. याद रखे इस प्राणायाम का अभ्यास हमेशा खाली पेट ही करे।  
  4. प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए आप सिद्धासन या सुखासन में बैठकर इसका अभ्यास कर सकते है।  
  5. अभ्यास करने से पहले ५ बार लंबे स्वर में ॐ का उच्चारण करे और इसके बाद तनावमुक्त होकर कपालभाति प्राणायाम की शुरुवात करे।  
  6. इस प्राणायाम का अभ्यास करते समय तेज गति से अपने अंदर की श्वास को बहार फेकना होता है।  
  7. लगातार  जोर से श्वास को बाहर फेके , आपको केवल श्वास को बाहर फेकने का कार्य करना है , अंदर ये अपने आप आ जायेगी ।  
  8. श्वास बाहर फेकते समय साथ ही पेट भी अंदर जाता है। ये क्रिया अपने आप होती है इसलिए पेट को अंदर ले जाने के लिए किसी भी प्रकार की जोर जबरदस्ती ना करे।
  9.  जिस तरह किसी खाली बोतल को अगर दबाया जाए ,तो परिणामस्वरूप वो बोतल चपट जाती है। क्योंकि उस बोतल में जो हवा थी ,वो आपके दबाने से बाहर चली गई। इसके विपरीत अगर आप बोतल को छोड़ देते है ,तो फिर से उसमे हवा भर जाती है ,और बोतल सीधी हो जाती है। 
  10. ठीक यही क्रिया कपालभाति करते समय भी होती है। पर यहापर आपको एक बदलाव करना होता है।
  11.  वो यह की ,बोतल को दबाने पर ही उसकी वायु को बाहर भेजा जा सकता है। 
  12. पर आपको वायु (श्वास) को बाहर भेजना है ,बोतल अपने आप दब जायेगी। 
  13. कहने का मतलब की आपको सिर्फ तेजी से वायु को बाहर भेजना है ,पेट अपने आप ही अंदर चला जायेगा। 
  14. कुछ परिस्थितियों में पेट अंदर नहीं जाता , इसलिए आपको कुछ समय देना आवश्यक है। 
  15. कपालभाति का अभ्यास करते समय आपको श्वास अंदर लेने पर कोई भी कार्य नहीं करना पडता ,आपको केवल श्वास के बाहर जानेपर ध्यान देना होता है ।    
  16. शुरुवात में आप इसे सिर्फ २ या ३  मिनट तक ही करे और  अभ्यासानुसार धीरे धीरे समय बढाए।
  17.   अभ्यास करते समय अगर थकावट महसूस हो तो ,थोड़ी देर अभ्यास रोककर आराम करे।  
  18. कोई गंभीर बिमारी होनेपर  इसका अभ्यास शांतिपूर्वक करे। 
  19. नियमितता के साथ अभ्यास करने से आपको लाभ मिलने शुरू हो जाते है। 
  20. इस प्राणायाम का अभ्यास करते समय ,शुरुवात में जहा जहा पेट के आंतरिक अंगों में खराबी है , उस जगह थोड़ा दर्द होता है,  पर नियमित रूप से अभ्यास करने से पेट पुनः निरोगी हो जाता है। 
  21. कपालभाति प्राणायाम करते समय आप अपना ध्यान श्वास के बाहर जाने पर या नाभि चक्र पर केंद्रित कर सकते है। 





Amazing Health Benefits Of Kapalbhati Pranayama - कपालभाति प्राणायाम के लाभ 



  1. प्रतिदिन इसका अभ्यास करने से व्यक्ति के शरीर में एक नई जीवन शक्ति का प्रवेश होता है। जिससे हर समय व्यक्ति ऊर्जावान महसूस करने लगता है। 
  2. इस क्रिया को करने से व्यक्ति के अंदर धारणा शक्ति का विकास होता है और आध्यात्मिक बल बढ़ता है , ये स्मरणशक्ति को बढाकर एकाग्रता क्षमता को बढ़ाता है। 
  3. साथ ही बुद्धि ओजस्वी बनती है। 
  4. बालों का असमय सफ़ेद होना मिटाता है ,चेहरे को तेजस्वी बनाता है साथ ही चेहरे के सभी प्रोब्लेम्स को दूर करता है। 
  5. आँखों के निचे दाग सर्कल को मिटाने में ये कपालभाति विशेष लाभकारी है तथा आंखों की रौशनी को बढ़ाता है।  
  6. ये सिरदर्द , तनाव , जोड़ों का दर्द , आखों के रोग , मधुमेह ,अस्थमा जैसी बहुतसी बिमारियों को ठीक करने में सक्षम है। 
  7. नित्य इसका अभ्यास करने से प्राणशक्ति जाग्रत हो जाती है , श्वास का आवागमन नियमित होकर साधक को दीर्घायु बनाता है। 
  8. पेट के समस्त रोगो के लिए यह प्राणायाम रामबाण उपाय है। 
  9.  गुप्तरोग , संतानहीनता , जैसी समस्याएं समाप्त हो जाती है। 
  10. नियमित रूप  से इसका अभ्यास करने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलने लगते है ,और अंदर से शरीर स्वच्छ और निरोगी बनता चला जाता है। 
  11. षट्कर्म में वर्णित अनेक क्रियाओं में से कपालभाति प्राणायाम भी एक षटक्रिया है,जिसे आप शरीर का शुद्धिकरण करने के लिए उपयोग में ला सकते है। 
  12. रोजाना इसका अभ्यास शरीर के अंग प्रत्यंगों में नयी चेतना का संचार करता है ,जिससे व्यक्ति स्फूर्ति और चैतन्यता का अनुभव करता है। 
  13. नियमित रूप से इसका अभ्यास  करने वाले साधक की बुद्धि अति तिष्ण और कुशाग्र हो जाती है ,वो अपने दैनिक जीवन के संकटों को ज्यादातर अपनी बुद्धि का प्रयोग करके ही हल कर देता है। 
  14. जब साधक निरंतर कपालभाति का अभ्यास करता है ,तो साधक का शरीर समशीतोष्ण स्वरुप का (ना अति ठंडा ना अति गरम) प्रतीत होता है। 
  15. नियमित रूप से इस प्राणायाम की साधना करना ,आपके व्यक्तित्व को निखरता है और आप में चतुराई ,सहनशीलता ,धैर्य ,प्रतिभाशक्ति ,संयम,संतोष और समर्पण भाव को उजागर करता है। 
 







Kapalbhati Pranayama Precautions | कपालभाति प्राणायाम में सावधानी 


  1. इस प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए ये आवश्यक है की ,आपका पेट खाली हो। 
  2. शुरुवाती समय में कपालभाति करते समय अत्यधिक तेजी के साथ इसका अभ्यास ना करे। पहली बार आप इसका अभ्यास धीरे धीरे  माध्यम गति के साथ शुरू कर सकते है। 
  3. यह आपके लिए एक अच्छा निर्णय होगा ,जब आप कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास सुबह सूर्योदय के समय और योगासनों के बाद करे। 
  4.  शारीरिक या मानसिक रूप से किसी गंभीर समस्या से ग्रसित होनेपर अपने डॉक्टर की सलाह लेकर ही प्राणायाम का अभ्यास करे। 
  5. गर्भवती स्त्रियों को इस प्राणायाम का अभ्यास बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। 
  6. ह्रदय या उच्च रक्तचाप की समस्या होनेपर भी चिकित्स्कीय परामर्श अनुसार ही इसका अभ्यास करे । 
  7. पहली बार किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में इसका अभ्यास करना सकारात्मक परिणाम देता है।  





अब आप "Kapalbhati Pranayama In Hindi" के बारे में जान चुके है। आज से ही अपने दैनिक व्यायामों में कपालभाति प्राणायाम को स्थान दे। 







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