Complete Guide To Kapalbhati Pranayama In Hindi

Kapalbhati Pranayama In Hindi  भारतीय संस्कृति में योग का विशेष रूप से स्थान है।  इसी भूमि पर बड़े बड़े महयोगियों ने जन्म लिया है , योग में यम , नियम ,आसन,  प्राणायाम , प्रत्याहार , ध्यान , धारणा और समाधी इन आठ अंगो का समावेश है।  इसीको को अष्टांग योग भी कहा जाता है। योग के चौथे अंग प्राणायाम में कपालभाति प्राणायाम का समावेश होता है। इस प्राणायाम अभ्यास में रेचक क्रिया करके ,तेज गति से श्वास को बाहर धकेला जाता है। पहले योग की इन क्रियाओ को गुप्त रखा जाता था , इसकी व्याप्ति जंगलो में स्थित गुफाओं तक ही सीमित थी।  पर धीरे धीरे इसे सब जानने लगे और इसका प्रयोग करने लगे। इस लेख में Kapalbhati Pranayama In Hindi की विस्तारित प्रक्रिया समझाने जा रहे है ,जो आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगी।

Kapalbhati Pranayama In Hindi - कपालभाति प्राणायाम विधि 

Kapalbhati Pranayama In Hindi - कपालभाति प्राणायाम विधि
 Kapalbhati Pranayama Steps 

क्या आपको पता है ? की Kapalbhati Pranayama की खोज सर्वप्रथम किसने की ? नवनाथों में से जो मच्छिंद्रनाथ है , उन्होंने ही इस Pranayama की खोज की जो संपूर्ण मानवता के लिए किसी वरदान से कम नहीं।  Kapalbhati Pranayam दो अक्षरों से मिलकर बना है कपाल + भाति , इसका सीधा अर्थ निकलता है,की जिस Pranayam  को करने से मनुष्य के मस्तक पर ओज और तेज की छलक आये उसे कपालभाति प्राणायाम कहा जाता है।  वैसे तो कपालभाति प्राणायाम से सभी रोग ठीक हो सकते है , पर कुछ विशेष अंगो पर इसका भारी प्रभाव देखने को मिलता है।  जैसे इसे करने से वात, पित्त, और कफ दोष दूर हो जाते है।  धारणा शक्ति विकसित करता है और श्वास रोगो से मुक्ति दिलाता है। कुंडलिनी शक्ति को भी इसी Pranayama से आप जाग्रत कर सकते है बस आपको हररोज इसका नियमित अभ्यास करना होगा। 
  • Kapalbhati Pranayama Steps 
  1.  Kapalbhati Pranayama Practice करने के लिए सुबह सूर्योदय से पूर्व का समय अच्छा  माना जाता है।  
  2. अभ्यास करने के लिए सर्वप्रथम किसी स्वच्छ , हवादार और एकांत स्थान में चटाई  बिछाकर बैठ जाये।  
  3. याद रखे इसका अभ्यास हमेशा खाली पेट ही करे।  आप सिद्धासन या रोजाना आप जैसे बैठते है वैसे भी इसका अभ्यास कर सकते है।  
  4. अभ्यास करने से पहले ५ बार लंबे स्वर में ॐ का उच्चारण करे और इसके बाद तनावमुक्त होकर Kapalbhati Pranayama Steps शुरू करे।  
  5. इस Pranayama  में तेज गति से अपने अंदर की श्वास को बहार फेकना होता है।  
  6. इसी अवस्था में लगातार श्वास जोर से अपनी नाक से बहार फेके , आपको केवल श्वास को बाहर फेकने का कार्य करना है , अंदर ये अपने आप आ जाती है।  
  7. जब आप श्वास बाहर फेकते है तो इसके साथ ही पेट भी अंदर जाता है। ये क्रिया अपने आप होती है इसलिए पेट को अंदर ले जाने के लिए किसी भी प्रकार की जोर जबरदस्ती ना करे।
  8. देखिये जिस तरह किसी खाली बोतल को अगर दबाया जाए ,तो परिणामस्वरूप वो बोतल चपट जाती है। क्योंकि उस बोतल में जो हवा थी ,वो आपके दबाने से बाहर चली गई। इसके विपरीत अगर आप बोतल को छोड़ देते है ,तो फिर से उसमे हवा भर जाती है ,और बोतल सीधी हो जाती है। 
  9. ठीक यही क्रिया  Kapalbhati Pranayama Steps  करते समय भी होती है। पर यहापर आपको एक बदलाव करना होता है।
  10.  वो यह की ,बोतल को दबाने पर ही उसकी वायु को बाहर भेजा जा सकता है। पर आपको वायु को बाहर भेजना है ,बोतल अपने आप दब जायेगी। 
  11. कहने का मतलब की आपको सिर्फ तेजी से वायु को बाहर भेजना है ,पेट अपने आप ही अंदर चला जाता है। 
  12. और जैसे ही आपका पेट सामान्य स्थिति में आता है ,वैसे ही अपने आप शुद्ध वायु आपके शरीर में प्रवाहित होती है। 
  13. Kapalbhati Pranayama Steps  में आपको श्वास अंदर लेने पर कोई भी कार्य नहीं करना पडता ,आपको केवल ध्यान देता होता है श्वास के बाहर जानेपर।    
  14. शुरुवात में आप इसे सिर्फ २ या ३   मिनट तक ही करे और धीरे धीरे समय बढाए।
  15.   Pranayama करते समय अगर थकावट महसूस हो तो थोड़ी देर Pranayam रोककर आराम करे।  
  16. अगर आपको कोई गंभीर बिमारी है तो इसे शांतिपूर्वक करे नियमित करने से आपको लाभ मिलने शुरू हो जाते है। 
  17. Kapalbhati Pranayama को करते समय शुरुवात में पेट में जहा जहा खराबी है , उस जगह थोड़ा दर्द होता है पर नियमित करने से पेट पुनः निरोगी हो जाता है। 
  18. Kapalbhati Pranayama Practice करते समय आप अपने ध्यान को श्वास के बाहर जाने पर केंद्रित कर सकते है। 





Amazing Health Benefits Of Kapalbhati Pranayama - कपालभाति प्राणायाम के लाभ 



  1. Kapalbhati Pranayama Steps करने से व्यक्ति के शरीर में एक नई जीवन शक्ति का प्रवेश होता है। और व्यक्ति ऊर्जावान महसूस करने लगता है। 
  2. इस क्रिया को करने से व्यक्ति के अंदर धारणा शक्ति का विकास होता है और आध्यात्मिक बल बढ़ता है , ये स्मरणशक्ति को बढाकर एकाग्रता क्षमता को बढ़ाता है। 
  3. साथ ही बुद्धि ओजस्वी बनती है। 
  4. बालों का असमय सफ़ेद होना मिटाता है ,चेहरे को तेजस्वी बनाता है साथ ही चेहरे के सभी प्रोब्लेम्स को दूर करता है। 
  5. आँखों के निचे दाग सर्कल को मिटाने में ये Pranayama  विशेष लाभकारी है तथा आंखों की रौशनी को बढ़ाता है।  
  6. ये सिरदर्द , तनाव , जोड़ों का दर्द , आखों के रोग , मधुमेह ,अस्थमा जैसी बहुतसी बिमारियों को ठीक करने में सक्षम है। 
  7. Kapalbhati Pranayama Steps करने से प्राणशक्ति जाग्रत हो जाती है , श्वास का आवागमन नियमित होकर साधक को दीर्घायु बनाता है। 
  8. पेट के समस्त रोगो के लिए Kapalbhati Pranayama रामबाण उपाय है। 
  9.  गुप्तरोग , संतानहीनता , जैसी समस्याएं समाप्त हो जाती है। 
  10. Kapalbhati Pranayama Practice से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलने लगते है ,और अंदर से शरीर स्वच्छ और निरोगी बनता है। 
  11. षट्कर्म में वर्णित अनेक क्रियाओं में से Kapalbhati Pranayama भी षटक्रिया है,जिसे आप शरीर का शुद्धिकरण करने के लिए उपयोग में ला सकते है। 
  12. रोजाना Kapalbhati Pranayama का अभ्यास शरीर के अंग प्रत्यंगों में नयी चेतना का संचार करता है ,जिससे व्यक्ति स्फूर्ति और चैतन्यता का अनुभव करता है। 
  13. नियमित Kapalbhati Pranayama करने वाले साधक की बुद्धि अति तिष्ण और कुशाग्र हो जाती है ,वो अपने दैनिक जीवन के संकटों को ज्यादातर अपनी बुद्धि का प्रयोग करके ही हल कर देता है। 
  14. जब साधक निरंतर Kapalbhati Pranayama Steps करता है ,तो साधक का शरीर समशीतोष्ण स्वरुप का (ना अति ठंडा ना अति गरम) प्रतीत होता है। 
  15. नियमित रूप से इस Pranayama की साधना करना ,आपके व्यक्तित्व को निखरता है और आप में चतुराई ,सहनशीलता ,धैर्य ,प्रतिभाशक्ति ,संयम,संतोष और समर्पण भाव को उजागर करता है। 
  16. ये सभी Benefits Of Kapalbhati Pranayama है। जो आपको Kapalbhati Pranayama का नियमित और सावधानीपूर्वक अभ्यास से प्राप्त होते है।     




Precautions For Kapalbhati Pranayama - कपालभाति प्राणायाम में सावधानी 


  1. Kapalbhati Pranayama का अभ्यास करने के लिए ये आवश्यक है की ,आपका पेट खाली हो। 
  2. शुरुवाती समय में Kapalbhati Pranayama Steps करते समय अत्यधिक तेजी के साथ इस Pranayama  का अभ्यास ना करे। पहली बार आप इसका अभ्यास धीरे धीरे  माध्यम गति के साथ शुरू कर सकते है। 
  3. यह आपके लिए एक अच्छा निर्णय होगा ,जब आप Kapalbhati Pranayama का अभ्यास सुबह सूर्योदय के समय और योगासनों के बाद करे। 
  4.  शारीरिक या मानसिक रूप से किसी गंभीर समस्या से ग्रसित होनेपर अपने डॉक्टर की सलाह लेकर ही Kapalbhati Pranayama का अभ्यास करे। 
  5. गर्भवती स्त्रियों को इस Pranayam का अभ्यास बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। 
  6. ह्रदय या उच्च रक्तचाप की समस्या होनेपर भी चिकित्स्कीय परामर्श अनुसार ही Kapalbhati Pranayama Steps करना चाहिए। 
  7. पहली बार किसी योग्य गुरु या अपने साथी के साथ ही इस Pranayama का अभ्यास करे। 





अब आप "Kapalbhati Pranayama In Hindi" के बारे में जान चुके है। आज से ही अपने दैनिक व्यायामों में कपालभाति प्राणायाम को स्थान दे। 







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