Vipassana Dhyan In Hindi Complete Guide

Vipassana Dhyan In Hindi Complete Guide योगशास्त्र में ध्यान को तीन भागों में बाटा है ,धारणाध्यान और समाधि। धारणा में मन को सभी बाहरी वस्तुओं से हटाकर किसी एक वस्तु पर ध्यान को केंद्रित किया जाता है ,और जब मन पूर्ण रूप से एकाग्र हो जाए वही से ध्यान की शुरुवात होती है। ध्यान का उद्देश्य ही मन को सत्य के पास लाकर पूर्णानंद की प्राप्ति कराना है। Dhyan का अंत ही समाधि है ,और समाधि ही योग का लक्ष्य है। आज मै आपको ध्यान की ऐसी एक विधि के बारे में बताने जा रहा हूँ,जिसका अभ्यास सभी लोग कर सकते है ,फिर चाहे वो बच्चा हो या वृद्ध ,रोगी हो या निरोगी सभी के लिए ये विधि विशेष फलदायी है। खासकर युवा पीढ़ी को इस विपासना ध्यान साधना को जरूर करना चाहिए। ताकि उनका कोई फायदा ना उठा पाए ,उनकी दिशाभूल ना हो सके। विपासना ध्यान हमारे पूर्ण शरीर और आत्मा पर कार्य करता है ,Vipassana Dhyan In Hindi के नियमित अभ्यास से हम कई दुखों से मुक्ति पा सकते है ,साथ ही बड़ी से बड़ी परेशानी  का हल निकाल सकते है।


Vipassana Dhyan In Hindi - विपस्सना ध्यान योग 

Vipassana Dhyan In Hindi - विपस्सना ध्यान योग
Vipasana Dhyan


  • Origin of Vipassana - विपासना की उत्पति 

प्राचीन समय से ही लोग दुखों से मुक्ति और मोक्ष पाने के लिए इच्छुक रहते थे। दरअसल इसी इच्छा के कारण बौद्ध धर्म  का उदय हुआ। मोक्ष प्राप्त करना ही बौद्ध धर्म का महानतम कार्य है ,और इसी कार्य के कारण ये पुरे एशिया में फैलाया गया। महात्मा बुद्ध के बारे में आप लोग जानते ही होंगे ,बुद्ध का अर्थ है जो शुद्ध हुआ हो। यानी जो शुद्ध हुआ वही बुद्ध है। जब महात्मा बुद्ध से दुःख देखा नहीं गया ,तो वो सत्य का पता लगाने अपने घर का त्याग कर तपस्या करने के लिए निकल गए ,जब उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। 

तब उन्होंने चार महान सत्यों के बारे में इस दुनियाँ को बताया।


{ आप यह भी पढ़ सकते है - ध्यान क्या है ?What is meditation?}

  1. १ पहला सत्य ये था की ,ये संसार दुखों से भरा पड़ा है। जन्म , मरण ,रोग ,बुढ़ापा ,इन सभी घटनाओं के साथ दुःख जुड़ा हुआ है। 
  2. २ दूसरा सत्य था की ,व्यक्ति अपने लोभ और लालसा के कारण ही हमेशा दुःख को प्राप्त करता है। 
  3. ३ तीसरा सत्य यह था की ,अगर हमें इन दुखों को दूर करना है ,तो हमें अपने मन से लोभ ,लालसा, इत्यादि विकारों का त्याग करना आवश्यक है। 
  4. ४ चौथा और अंतिम सत्य ये था की ,अगर हमें इन दुःखोंसे मुक्ति प्राप्त करनी है ,तो हमें अष्टांगिक मार्ग का चयन करना होगा। (सत्य बोलना ,सत्य का भाव ,सत्य का ज्ञान ,सत्य साधना ,अच्छे विचार ,अच्छे कर्म ,हमेशा अच्छे कार्यों में मग्न रहना )
  5. Vipassana Dhyan साधना सबसे पहले बुद्ध ने हस्तांतरित की और धीरे धीरे इसका प्रसार हुआ। 
  6. इस पूरी दुनिया में इस Dhyan Sadhana का लाभ लेकर महात्मा बुद्ध जैसे २१ बुद्ध हुए पर उन्हें कोई जानता नहीं।  
  7. क्योंकि उन्होंने ये विधि अपने तक ही सिमित रखी ,पर बुद्ध को आज हर कोई जानता है ,क्योंकी उन्होंने Vipassana का शुद्ध रूप में प्रसार किया।  आज भी इस साधना का शुद्ध रूप से प्रचार होना आवश्यक है। Vipassana Dhyan Sadhana एक ऐसी साधना है, जिसका अभ्यास हर कोई आसानी से कर सकता है। 

  • Vipassana Meditation Steps 
  1.  Vipassana Dhyan Sadhana में सबसे पहले Anapan Sadhana करना आवश्यक है ,Anapan Sadhana के लिए हमें अपनी नासिका पर ध्यान लगाना होता है ,और मूकदर्शक बनकर ,आते हुए और जाते हुए श्वासों के प्रति सजग रहना पड़ता है। 
  2. सबसे पहले किसी ध्यानात्मक आसन या पद्मासन में बैठ जाए। 
  3. Vipassana Dhyan Sadhana को एकांत में या किसी ऐसे स्थान पर करे जहा आपको कोई डिस्टर्ब ना कर पाए। 
  4.  अपने दोनों हाथों को आपस में मिलाकर शांति से बैठ जाए। 
  5. अपनी आँखे बंद करके अपने दिमाग को तनावरहित करे। अब अपने नासिका पर ध्यान केंद्रित करे ,और आते  हुए और जाते हुए श्वासों के प्रति सजग रहे। 
  6. आपको इसमें कुछ भी शारीरिक या मानसिक क्रिया नहीं करनी है। 
  7. पहले पहले आपका मन भटकेगा,तरह तरह के विचार आपके सामने लाएगा,पर फिरसे आप उसे श्वासों लगाने का अभ्यास करे। 
  8. अगर कोई भी विचार या उद्वेग आपके मन में आये ,तो उससे जुड़े नहीं ,सिर्फ अनजान बने रहकर उन्हें देखते रहे ,और अपना Dhyan सिर्फ श्वासों पर लगाए रखे।  
  9. श्वास लेते समय या जाते समय कोई भी जोर जबरदस्ती न करे ,प्राकृतिक रूप से जैसी श्वास चल रही है ,वैसेही उसे चलने दे। 
  10. आपको बस श्वासों के प्रति सजग रहकर उन्हें देखना है ,आप स्वतः अपने मन से श्वास ना ले ,ये श्वास अपने आप चलती रहनी चाहिए। 
  11. श्वास आ रही है ,श्वास जा रही है ,इस अवस्था में जब भी कोई विचार या भावना आपके मन में आये तो तुरंत  सजग होकर अपनी श्वासों पर Dhyan केंद्रित करे। 
  12. जब आप इसका अभ्यास पूर्ण रूप से कर लेंगे तो धीरे धीरे अपनी साधना को बढाए। 
  13. अब देखे की ये श्वास जाती कहापर है और निकलती कहा से है।
  14.  धीरे धीरे जब Dhyan गाढ़ा होता जाएगा ,वैसे वैसे अपने शरीर के भीतर झाकने की कोशिश करे और अभ्यास को आगे बढ़ाते जाए। 
  15. Vipassana Dhyan Sadhana करने के लिए जीतनी आपकी आयु है ,उतने मिनट तक आपको रोजाना Dhyan करना चाहिए।  
  16. जैसे अगर मेरी आयु २७ वर्ष है ,तो मुझे कम से कम २७ मिनट तक Dhyan करना चाहिए। 





इस लेख में आपको "Vipassana Dhyan In Hindi" के बारे में जानकारी मिली ,जो आपके लिए काफी लाभदायक सिद्ध होगी। 

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