Dharna Yoga In Hindi Complete Guide

 Dharna Yoga In Hindi Complete Guide योग विज्ञानं में योग के आठ अंगों का वर्णन देखने को मिलता है ,यम,नियम ,आसन, प्राणायाम,प्रत्याहार ,धारणा,ध्यान और समाधी जो अष्टांग योग या राज योग के नाम से विख्यात है। इन आठ अंगों में से, मै इस लेख में सबसे महत्वपूर्ण अंग Dharna Yoga In Hindi के बारे में बताने जा रहा हूँ । 

Introduction Of Dharna In Yoga  



  • धारणा का परिचय - What Is Dharna In Yoga
  1. योगशास्त्र में धारणा को सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है ,क्योंकि इसके बिना ध्यान और समाधि तक मनुष्य पहुंच ही नहीं पाता। 
  2. धारणा के अभ्यास में मन को किसी एक बिंदु पर स्थिर किया जाता है ,जिससे आगे चलकर साधक को ध्यान के अभ्यास में चिंतन या मनन करने के लिए उपयोगी होता है।
  3.  इस अंग में मन को किसी वस्तु या विचार पर केंद्रित करने का अभ्यास करवाया जाता है। मन में परमात्मा का Dhyan करते हुए ,अपने मन में उठ रहे गलत विचारों पर संयम रखना ही Dharna कहलाती है। 
  4. जब व्यक्ति किसी विचार को मन में धारण कर,उस विचार के बारे में सारी बाते मन में जान लेना,ये Dharna ही तो है। 
  5. पर ये विचार स्वयं मन के द्वारा उत्पन्न होते है ,ये अपनी स्वेच्छा से उत्पन्न नहीं होते ,और न ही हम उस धारणा को रोकने में समर्थ होते है ,क्योंकि हम इन धारणाओं से अनजान रहते है। 
  6. पर जब कोई योगद्वारा अपने मन को संयमित कर Dharna Sidhhi Yoga का अभ्यास कर लेता है।  तो वो महापुरुषों की श्रेणी में आने लगता है ,उसके लिए कोई भी कार्य मुश्किल नहीं रहता ,वो दुनिया के हर एक कार्य को करने में समर्थ हो जाता है ,और ये Dharna Sidhhi से ही हो सकता है। 
  7. हकीकत में Dharna जन्म से ही हर प्राणी में होती है ,चाहे आप कहि भी हो ,कुछ भी कर रहे हो ,आप हर समय धारणा से जुड़े रहते है। 
  8. पर ये आपकी इच्छा से नहीं बल्कि आपके मन मुताबिक होता है ,पर जब आप अपने मन के बहकावे में न आकर ,अपने मन को अपनी इच्छा अनुसार की वस्तु विचार पर एकाग्रित कर  केंद्रित करने का प्रयास करते  है ,तो वही Dharna ,इच्छा धारणा में परिवर्तित हो जाती है। 
  9. अब आप मन के अनुसार कार्य ना करकर ,मन पर विजय प्राप्त कर लेते है ,और अब आपका मन आपके कहे नुसार कार्य करने पर विवश हो जाता ,यही Dharna Sidhhi कहलाती है।
  10.  जब कोई व्यक्ति मन में संकल्प किये  हुए कार्य को ,पूर्ण करके ही दम लेता है ,उस कार्य को अधूरा नहीं छोड़ता ,तो समजलेना चाहिए की उसमे Dharna Shakti प्रबल है। 





Dharna Yoga In Hindi - धारणा योग


Dharna Yoga In Hindi - धारणा योग
Dharna in Yoga


  1. Dharna Sidhhi Yoga का अभ्यास करने से पूर्व Pranayama का पूर्ण रूपसे अभ्यास करना आवश्यक है। 
  2. प्राणायाम  का अभ्यास करने से नाभि और अन्य स्थानोंपर वायु स्थिर हो जाती है ,निरंतर अभ्यास के कारण ये वायु स्थिरता में परिवर्तित हो जाती है ,इस कारण व्यक्ति जब चाहे वायु को किसी भी स्थान पर रोक सकता है।
  3.  नियमित अभ्यास से व्यक्ति के शरीर से विकार दूर होकर ,मनुष्य दिव्य और पापमुक्त हो जाता है। 
  4. Dharna Sidhhi  के अभ्यास के कारण उसके शरीर के सुष्म चक्र जागृत होने लगते है ,समस्त दिव्य शक्तियाँ उसमे विकसित होने लगती है।  
  5. मणिपुर चक्र जो नाभि में स्थित होता है ,उसमे स्थिरता आनेपर जठराग्नि को बढ़ने की शक्ति उत्पन्न हो जाती है ,जिसके कारण व्यक्ति जब चाहे तब अपनी जठराग्नि को बढाने में सक्षम होता है। 
  6. मणिपुर चक्र में स्थिरता आते ही मल मूत्र को बाहर निकालने वाले अंग सुचारु रूप से कार्य करने लगते है। 
  7. इसकारण शरीर निरोगी और हल्का महसूस करने लगता है ,त्वचा तेजस्वी और चेहरे पर अनोखा तेज आ जाता है। 
  8. इसीप्रकार मस्तिक्ष में संयम करने से व्यक्ति को आलौकिक शक्तियों को जान पाने का सामर्थ्य प्राप्त होता है। 
  9. ह्रदय में संयम करने से व्यक्ति का माया ,ममता ,स्नेह ,दयाभाव ,इत्यादि से नाता टूट जाता है ,और उसका ह्रदय कठोर और मन  स्थिर हो जाता है। 
  10. ये सभी Benefits Of Dharna In Yoga है। जो आपको नियमित Dharna Sidhhi Yoga के अभ्यास से प्राप्त होते है। { पढ़े - धारणा सिद्धि योग विधि }




Time and Diet  For Dharna Sidhdhi Yoga - धारणा योग के लिए समय और भोजन 


  • Best Time To Do Dharna Sidhhi Yoga - धारणा सिद्धि के लिए समय - 
  1. Dharna Sidhhi Yoga का अभ्यास करने के लिए एक निश्चित समय का चुनाव आवश्यक है। 
  2. इसके लिए आप सुबह प्रातकाल या शाम दोनों ही समय उपयुक्त होते है। 
  3. बस आपको इस योग के लिए किसी ऐसे स्थान का चुनाव करना होगा ,जो स्वस्छ ,हवादार हो। और जहाँपर आपको शारीरिक या मानसिक रूप से कम से कम सक्रीय होना पड़े। 
  4. यदि आप योगासनों का अभ्यास करते है ,तो इसके साथ आप Dharna का भी अभ्यास कर सकते है। बस आपको इन दोनों के बिच कम से ३० मिनट का समय रखना है।  ,जिससे योगासनों के बाद आपका शरीर थोड़ा विश्राम ले सके। 

  • Mentality In Dharna Sidhhi Yoga - धारणा सिद्धि में मानसिकता 

  1. Dharna Yoga का अभ्यास शांत एवं आनंदी मानसिकता से करना चाहिए। 
  2. अभ्यास करते समय किसी भी प्रकार का तनाव ,चिंता या आलस्य को दूर रखे,और अपने मन में क्रोध ,इर्षा ,उत्तेजना जैसे विकारों को ना आने दे। 
  • Diet In Dharna Sidhhi Yoga - धारणा सिद्धि योग में भोजन
  1.  Dharna Sidhhi Yoga का अभ्यास करते समय सात्विक और यौगिक आहार लेना चाहिए। 
  2. तामसिक एवं अत्यधिक मिर्च मसाले और गरम पदार्थों का सेवन ना करे। तथा नशीले पदार्थों का सेवन वर्ज्य करे।   



इस लेख में आपको "Dharna Yoga In Hindi" के बारे में उचित जानकारी मिल चुकी होगी। जब आप प्राणायाम की क्रियाओं में निपुण हो जाते है ,तो आप धारणा का अभ्यास सरलता के साथ कर सकते है। 
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