Dhyan In Hindi Complete Guide

Dhyan In Hindi Complete Guide पुरातन काल से ही ध्यान का बड़ा महत्व है ,पुराने जमाने में बड़े बड़े तपस्वी और योगी ध्यान के आधार पर ही आलौकिक शक्तियों के स्वामी थे। अष्टांग योग के आठ अंगों में से ध्यान पांचवे स्थान पर आता है। ध्यान, सारे विषयों से अपने मन को हटाकर केवल एक ही स्थान पर अपना ध्यान केंद्रित करने की विधि है जो हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ध्यान यानि सजग होना ,पर किसके प्रति ? ध्यान , अपने स्वयं के व्यवहार के प्रति सजग  होने की कला है। ध्यान दूसरों के दोषों को ना देखकर ,अपनी त्रुटियों को स्वीकार कर,उन त्रुटियों को दूर करने की कला है। ध्यान के निरंतर अभ्यास द्वारा अपने मन की चंचलता पर विजय प्राप्त कर ,किसी वस्तु विषय पर अपने मन को केंद्रित किया जा सकता है। इस लेख में Dhyan In Hindi के बारे में जानेंगे।  
ध्यान ही योग की अंतिम स्थिति है ,ध्यान के अभ्यास के बाद ही व्यक्ति को दिव्य शक्तियों का ज्ञान प्राप्त होता और वो अनेक सिद्धियों का स्वामी बन जाता है। जैसे अणिमा ,लघिमा, वाकसिद्धि ,इत्यादि। शरीर के भीतर सुप्त अवस्था में बैठी हुई कुंडलिनी जागरण के लिए भी निरंतर Dhyan का अभ्यास करते रहना आवश्यक है। हमारे अंदर आसिम शक्तिया भरी पड़ी है ,पर जिस प्रकार किसी बीज को ये पता नहीं होता, की वो आगे चलकर एक बड़ा पेड़ भी बन सकता है। उसीप्रकार हम भी इन शक्तियों से अनजान बने रहते है ,पर Dhyan ही एक ऐसा मार्ग है ,जिसके माध्यम से हम स्वयं का अवलोकन कर ,स्वयं के बारे में जान सकते है। और जो स्वयं को जान लेता है उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं रह जाता। क्योंकि जो इस ब्रम्हांड में है ,वही इस पिंड (शरीर) में भी है। 

 Dhyan In Hindi - ध्यान योग की जानकारी 

 Dhyan In Hindi - ध्यान योग की जानकारी
Dhyan 


Golden Rules To Follow Before You Do Meditation  ध्यान के नियम

  • Dhyan Practice के लिए सुबह ४-५ बजे का समय उपयोगी माना जाता है। 
  • इस समय Dhyan लगाने पर ,मन की चेतन अवस्था में जाना आसान हो जाता है। 
  • आप अगर Pranayama या आसनों का अभ्यास करते है तो उसके बाद Dhyan का अभ्यास करे। 
  • दिन में दो बार आधे -आधे घंटे तक Dhyan Practice करना चाहिए। 
  • Dhyan  करते समय हमेशा उस आसन  का प्रयोग करे जिसमे बैठने पर आपको नींद ना आये ,जैसे सुखासन ,पद्मासन ,स्वस्तिकासन का उपयोग करे. 
  • ध्यान करते समय आपका शरीर एवं दिमाग तनावमुक्त रखे ,Dhyan के लिए बैठते समय अपने मेरुदंड को सीधा रखे ,इससे रक्तसंचार सुचारु रूप से होता है ,अपनी गर्दन को सीधा और अपनी छाती को तना हुआ रखे। 
  • Meditation Technique से शरीर में श्वासों की गति धीमी हो जाती है ,जिससे अमाशय की गति भी मंद हो जाती है। जिससे Dhyan करनेवाला आराम महसूस करने लगता है।  
  • Dhyan में लीन होने से मन एकाग्र हो जाता  है ,शरीर की ऊर्जा कम खर्च होती ,शरीर में कार्बन डायोक्साइड कम मात्रा में बनता है।
  • Meditation करते रहने से खून साफ़ होता है और  शरीर के सभी विकार  दूर होकर  व्यक्ति निरोगी ,तनावमुक्त और आनंदी जीवन जीता है।
  • अगर सटीक भाषा में कहुँ , तो आप जिस प्रकार बिना कुछ बोले ,बिना कुछ करे "Dhyan In Hindi" को पढ़ रहे है ,बस वही ध्यान है। 
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