बाघी क्रिया Baghi Kriya

Baghi Kriya योग गुरुओं ने इस क्रिया को बाघ से प्रेरणा लेकर बनाया है ,बाघ जैसे किसी शिकार को खाने के बाद २ या ३ घंटे बाद अपचा हुआ शिकार बाहर निकाल देता है ,और हमेशा ऊर्जाशक्ति से जुड़ा रहता है ,उसी प्रकार इस क्रिया के द्वारा व्यक्ति भी बिना पचा हुआ अन्न बाहर निकाल कर स्वस्थ और निरोगी रहता है। Baghi Kriya का प्रयोग भोजन के ३ -४ घंटे बाद किया जाता है।



Baghi Kriya - बाघी क्रिया 

                                                            
Baghi Kriya - बाघी क्रिया


  • How To Do Baghi Mudra - बाघी क्रिया करने की विधि 
  1. बाघी क्रिया का अभ्यास किसी स्वच्छ हवायुक्त वातावरण में करना अधिक परिणामकारी होता है। 
  2. सबसे पहले जब आपका भोजन हो जाए तो भोजन होने के २-३ घंटे बाद अपने पास इतना पानी अवश्य रखे ,जो ३-४ बार कुल्ला करने के काम आये।
  3.  आप जितना पानी पि सकते है ,उतना पानी पि ले। 
  4. अब कागासन की स्थिति में बैठकर अपनी तीनों अंगुलिया (तर्जनी ,मध्यमा,अनामिका )को एकसाथ मिलाकर अपने जीभ के पिछले हिस्से को सहलाये। 
  5. ऐसा करने पर आपका मन उलटी करने के लिए करेगा ,उलटी करते समय अपने हाथ को बाहर निकाल ले। 
  6. इससे उलटी के साथ साथ न पचा हुआ भोजन भी बाहर आ जाएगा ,इस क्रिया को तब तक जारी रखे जबतक अंदर से पानी साफ़ ना निकले। 
  7. ३-४ बार इस क्रिया को करने से साफ़ पानी बाहर आने लगेगा। 
  8. जब साफ़ पानी बाहर आने लगे तो इस क्रिया को यही रोक दे। 
  9. इस क्रिया के अभ्यास के बाद जल नेति का अभ्यास करना उपयुक्त होता है। 
  10. जब ये क्रिया पूर्ण हो जाए तो २० से ३० मिनट बाद  दूध की बनी खीर का सेवन करना चाहिए। 
  11. जिस दिन भी आप इस क्रिया का अभ्यास करे उस दिन हल्का और जल्दी पचनेवाला अन्न ही खाएं।
                             

Health Benefits Of Baghi Mudra - बाघी क्रिया करने के लाभ

  1. ये क्रिया जठराग्नि को प्रदीप्त करती है ,तथा भूक को बढाती है। 
  2. इस क्रिया के अभ्यास से पाचनक्षमता बढ़ती है। 
  3. कमर पतली और छाती को चौड़ी करती है। 
  4. इस क्रिया को करने से शरीर में हल्कापन अनुभव होने लगता है ,शरीर को तेजस्वी और चेहरे को सुंदर बनाती है। 
  5. इससे पेट संबंधित सभी बीमारिया अपने आप ही दूर हो जाती है। 
  6. मोटापा दूर करने और वजन कम करने में ये क्रिया अत्यंत फायदेमंद है।



Precautions  - बाघी क्रिया में सावधानी 

  1. बाघी क्रिया का अभ्यास करते समय हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए। 
  2. इस क्रिया के अभ्यास से पेट पूरी तरह खाली और साफ़ हो जाता है ,इसलिए क्रिया समाप्त होनेपर दूध से बनी खीर का सेवन अवश्य करे। 
  3. ये क्रिया बहुत ही कठिन है ,इसलिए इसे किसी योग्य गुरु के सानिध्य में ही करे। 




षट्कर्मों की क्रियाओं में से "Baghi Kriya" करना अत्यंत कठिन प्रतीत होता है। इसलिए ये अच्छी बात होगी अगर आप इसे पहली बार अपने गुरुदेव के सानिध्य में करे।



आप इन्हे भी पढ़ सकते है। 



Previous
Next Post »