Method Of Practice Of Dhaarna In Hindi Complete Guide

Method Of Practice Of Dhaarna In Hindi Complete Guide अष्टांग योग के छठे अंग के रूप में Dharna Sidhhi Yoga का अभ्यास किया जाता है। ये योग की वही प्राचीनतम विधि है ,जिसके बिना योग अपूर्ण है। जब तक आप धारणा का अभ्यास नहीं कर लेते ,तबतक आप ध्यान आदि भी ठीक तरह नहीं कर पाते। धारणा सिद्धि योग की कई साधनाये प्रचलित है ,परंतु इन सब में से एक ही साधना अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ,और वो है किसी एक वस्तु पर अपने मन को एकाग्र कर केंद्रित करना, इस क्रिया में किसी आतंरिक या बाहृय वस्तु पर ध्यान को केंद्रित करना होता है। किसी एक वस्तु पर ध्यान देना ,धारणा सिद्धि योग को साधने का सबसे अचूक और आसान उपाय है। Method Of Practice Of Dhaarna In Hindi में आपको धारणा सिद्धि योग की विधि बताने जा रहे है। 

Method Of Practice Of Dhaarna - धारणा सिद्धि योग का अभ्यास कैसे करे


Method Of Practice Of Dhaarna - धारणा सिद्धि योग का अभ्यास कैसे करे
Practice of Dharna Yoga


  • How To Practice Dharna sidhdhi Yoga Technique - धारणा सिद्धि योग की विधि
  1.  Dharna Sidhhi Yoga का अभ्यास करने के लिए आप किसी भी आतंरिक या बाहरिक वस्तु का प्रयोग कर सकते है। 
  2. अगर आप आंतरिक धारणा सिद्धि योग का अभ्यास करना चाहते है तो आप इसके लिए अपने शरीर में स्थित ऊर्जा चक्रो पर या दोनों भौओं के बिच मन को केंद्रित कर इस योग को कर सकते है। 
  3.  आप किसी बाहृय वस्तु का प्रयोग करना चाहते है तो इसके लिए किसी ऐसी वस्तु का चुनाव करे जिससे मन शांत और एकाग्र हो ,कुछ लोग इस योग के लिए दीपक ,मोमबत्ती या अन्य सामग्री का उपयोग करते है ,पर आप ऐसा बिल्कुल भी ना करे ,ऐसा करना आपकी आखों के सेहत के लिए ठीक नहीं है। 
  4. इसके स्थान पर आप केसर का तिलक ,हरा-भरा फूल जो आपका मन मोह लेता हो,उसका उपयोग कर सकते है। 
  5. आपने देखा होगा की दुनिया में कई सारे शिवमंदिर स्थापित है ,परंतु ज्यादातर मंदिरों में हमें शिवजी की प्रतिमा कम और शिवलिंग ही ज्यादा दिखाई देते है। (इस लेख में मै किसी की भावनाओं का अनादर नहीं करना चाहता ,केवल इसके पीछे के विज्ञानं को बता रहा हूँ। ) 
  6. इसके पीछे भी अगर देखों तो विज्ञानं छुपा है,जब भी हम शिवलिंग पर जल चढ़ाते है , या ध्यान करते है ,या पूजा करते है ,तो आपको कैसा लगता है ? एकदम शांत ,निर्विकार Dharna आपके मन में उस समय उत्पन्न हो जाती है ,जिससे आपको परमशांति का अनुभव प्राप्त होता है। 
  7. बस इसीलिए आपको ज्यादातर शिवलिंग ही देखने को मिलते है ,क्यों की शिवलिंग पर ध्यान आसानी से केंद्रित हो जाता है। 
  8.  इसीतरह आपको Dharna Yoga के लिए वस्तु का चुनाव करना है। 
  9. सबसे पहले आपने जिस भी वस्तु का चुनाव किया है ,उसे अपने नज़रों के सामने रखे ,जिससे आप उस वस्तु को आसानी से देख पाए ,और आँखों पर ज्यादा तनाव ना आये। 
  10. जहाँपर भी आपने उस वस्तु को रखा है ,उससे 4 से ५ फिट की दुरी बनाकर चटाई डालकर ,पद्मासन की स्थिति में बैठ जाए। 
  11. बैठते समय आपका मेरुदंड ,छाती और गर्दन सीधी रखे। 
  12. अब अपनी जांघो पर अपने दोनों हाथो को रखकर आँखे बंद करके अपनी श्वास को बहार निकाले ,श्वास को बहार निकालते समय आपका पेट अंदर की और सिकुड़ना चाहिए। 
  13.  धीरे धीरे श्वास को अंदर ले ,इसी क्रिया को ५ से १० बार करे। अब धीरे से अपनी आँखों को खोलकर सारे विचारों और चिंताओं को भूलकर उस वस्तु की तरफ देखते रहे। 
  14. श्वास को अंदर लेते समय ये भावना रखे की मुझपर  वो परम आनंद परमात्मा , दिव्य और पवित्रता की सारी उर्जाये लुटा रहा है ,और मैं उसे ग्रहण कर रहा हूँ । 
  15. श्वास को छोड़ते समय इस भावना से श्वास को छोड़े की मेरे अंदर के सभी विकार बाहर निकल रहे है ,सारे विचार ,सारि  चिंताओं से मै मुक्त हो रहा हूँ । मै अपने अंदर के सारी गलत ऊर्जाओं को बाहर छोड़ रहा हूँ । 
  16. इसीप्रकार आप नियमित रूप से Dharna Sidhhi Yoga का अभ्यास कर सकते है। 




इस लेख में आपने "Method Of Practice Of Dhaarna In Hindi" के बारे में जाना ,जिसका थोड़े समय के लिए किया गया अभ्यास भी आपको मनशांति प्रदान करने के लिए पर्याप्त है। 

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