ओंकार ध्यान Omkar meditation



ओंकार ध्यान क्या है ?और इसे कैसे करना चाहिए। Omkar meditation

Omkar Dhyan Technique & Benefits Of Meditation

योगग्रंथों में विभिन्न प्रकार की ध्यान साधनाये बतायी गयी है ,इन्ही में से एक ओंकार ध्यान साधना है। ॐ शब्द का वर्णन वेदों और उपनिषदों में बताया गया है ,योगशास्त्र में भी ॐ उच्चारण एवं ओंकार ध्यान का बड़ा ही महत्व है ,वैदिक संहिता में तो ॐ को ही जीवन का लक्ष्य माना गया है। यहातक की अगर देखा जाए ,तो हिन्दू पुराणों में सभी मन्त्रों की शुरुवात भी ॐ से ही होती है। ॐ का सम्बन्ध जितना इस ब्रम्हांड से है ,उतना ही हमारे शरीर से भी है।
वैज्ञानिकों की खोज से ये बात सिद्ध हो चुकी है की नियमित ॐ का शारीरिक या मानसिक जप से ही मनुष्य कई प्रकार के रोगों पर विजय प्राप्त कर लेता है। ओंकार ध्यान साधना करके आप अपने जीवन में मानसिक शांति और दैवी सम्पदा का अनुभव कर सकते है। इस ध्यान साधना को करने की दो स्थितियाँ बतायी गयी है ,इन दोनों  स्थितियों में से आप अपने प्रकृति के अनुसार किसी भी स्थिति का आचरण कर इसका लाभ प्राप्त कर सकते है। 
how to do Omkar Meditation
Onkar mediatation

  • पहली विधि - ध्यान साधना शुरू करने के लिए सबसे पहले किसी शांत जगह पर किसी ध्यानात्मक आसन में बैठ जाए ,जैसे पद्मासन ,सिद्धासन,स्वस्तिकासन इत्यादि। अब अपने दोनों हाथों को आपस में मिलाकर अंजुली बनाले ,और उसे अपने नाभि के पास रखे। अब अपनी कमर ,गर्दन, और छाती को सीधा कर ,धीरे से अपनी आँखे बंद करले। अब अपने दिमाग से सारे विचारों को छोड़कर ,लम्बी श्वास भरे और धीरे से छोड़े ,इस प्रकार ५ बार इस क्रिया को करे। 
  • अब ओंकार जप का प्रारम्भ करे ,इस अवस्था में आपको आपका सारा ध्यान केवल ओंकार पर केंद्रित करना है ,इस अवस्था में मन के साथ अपने शरीर को भी ओंकार में लीन कर दे। ओंकार जप की क्रिया लयबद्ध और शांत भाव से करे। 
  • इसप्रकार जप करने से शरीर में एक अदृश्य तरंगे निर्माण होती है ,जिसका कम्पन आप इस अवस्था में अनुभव कर सकते है। ये कम्पन ओंकार ध्वनि के कारण ही उत्पन्न होता है। धीरे धीरे ये कंपन  शरीर में पूर्ण रूप से फैलने लगता है और आप  परम आनंद का अनुभव करते है। 
  • ओंकार ध्यान करते समय ॐ का उच्चारण बिना रुके लगातार करते रहना चाहिए जैसे ॐ ॐ ॐ ॐ.... इससे आपकी भावनाये एवं मन को किसी भी प्रकार की गतिविधि करने के लिए रुकावट पैदा होगी ,और आप शून्यता की तरफ बढ़ते चले जाएंगे। इसप्रकार ध्यान करने से ध्यान का स्थान ओंकार मय हो जाता है। आपके शरीर से ओंकार ऊर्जा निकलकर बाहरी वातावरण में फ़ैल जायेगी ,और फिरसे वातावरण में टकराकर सुनाई देने लगेगी। इस ध्वनि तरंग को सुनकर आप का रोम रोम प्रसन्न एवं पुलकित होने लगेगा। जिससे शरीर शांत एवं आत्मा शुद्ध होती है ,इस साधना में अन्नमय और प्राणमय कोष दोनों प्रभावित होते है ,इसलिए शरीर के अंदर की कई बीमारिया इस साधना को करने से दूर हो जाती है। इस ध्यान विधि द्वारा शरीर ॐ रूपी महासागर में स्नान करके ,पवित्र ,शीतल,शांत,कोमल ,तेजस्वी और सुन्दर हो जाता है। 
  • वेदों अनुसार शरीर, तत्व और प्राण से बना है ,और ध्वनि शरीर का ही अंश है ,इसलिए यथासंभव ॐ का प्रतिदिन १५ मिनट तक,पूरी ऊर्जा लगाकर  जाप अवश्य करना चाहिए। 
  • दूसरी विधि - पहली विधि में बतायेनुसार ॐ का मुख से जाप करना होता है ,परन्तु दूसरी विधि में ओंकार का केवल मन में जाप करना होता है। इसके लिए किसी ध्यानात्मक आसन में बैठकर मुँह को बंद करके अपनी जीभ को तालु से लगादे। ध्यान रखे इस विधि में आपको किसी भी प्रकार से अपनी जीभ ,मुँह ,और कंठ का उपयोग नहीं करना है। इस विधि में आपको लयबद्ध तरीके से अपने मन में ही जोर -जोर से ॐ का उच्चारण करना है। इस क्रिया को बिना रुके अपने मन में ही करना है। इसप्रकार इसका अभ्यास करने से ॐ की ध्वनि मन में ही पल्लवित  होती रहती है ,और पूर्ण शरीर में कंपन और आनंद का अनुभव कराती है।  
  • मन में ही बिना रुके जाप करते हुए ,ॐ ध्वनि को अपने सर से लेकर पाँव तक भर दे ,इस अवस्था में पारंगत हो जाने पर ॐ ध्वनि का अपने आप ही जाप होने लगता है। इस तरह ओंकार ध्यान साधना से धारणा शक्ति में वृद्धि होती है ,समाधि के लिए भी ये साधना अत्यंत उपयुक्त है। 
  • ये क्रिया विशेष रूप से मनोमय कोष और विज्ञानमयकोश को प्रभावित करती है ,मनोमय और विज्ञानमय कोशों की शुद्धि से आनंदमय कोष के द्वारा परमानन्द की प्राप्ति होती है। इसके फलस्वरूप साधक को सुष्म शरीर का बोध हो जाता है ,जिससे सुष्म शरीर में किसी भी तरह का दोष प्रवेश नहीं कर पाता। अन्नमयकोश और प्राणमयकोश शरीर में किसी भी रोग को ठहरने नहीं देते। जिससे व्यक्ति हमेशा स्वस्थ ,सजग,और तेजस्वी बना रहता है। 
  • ओंकार ध्यान की दोनों ही विधियां सरल और उत्तम फलदायी है ,आप इसका नियमित रूप से अभ्यास करके इसका लाभ प्राप्त कर सकते है। इसलिए इसका अनुभव अवश्य ले। 
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