साक्षी ध्यान का अभ्यास कैसे करे sakshi dhyan in hindi

साक्षी ध्यान का अभ्यास कैसे करे Sakshi Dhyan Practice In Hindi

Benefits ,Rules And Importance Of Sakshi Meditation


योगग्रंथों में अनेक प्रकार की  ध्यान विधिया बतायी गयी है। जिनका एकमात्र उद्देश्य ही अपनी कुण्डलिनी शक्ति को सक्रीय कर ,उस परमात्मा के साथ जुड़ना है। आज मैं ध्यान की एक ऐसी विधि के बारे में बता रहा हु जो बहुत ही सरल है। और आसानी से कही भी आप इसे कर सकते है। इस विधि का नाम साक्षी ध्यान है। इस ध्यान विधि में स्वयं के मन को साक्षी भाव से देखा जाता है ,अगर मन सही कर रहा है उसके प्रति भी ,और किसी गलत कार्यों में लगा हुआ है ,उसके प्रति भी। दोनों ही पक्षों में हमें उसे साक्षी भाव से देखना है। साक्षी ध्यान का अभ्यास 2 विधियों से किया जाता है ,पहली विधि में मन को सारे विचारों से हटाकर शांत करने का और अपना ध्यान अंतरात्मा पर केंद्रित करने पर लगाया जाता है। दूसरी विधि में मन को अपनी श्वास क्रिया पर लगाया जाता है ,और अपनी इच्छानुसार मन को किसी  वस्तुपर केंद्रित कर अपने अंदर की बुराइयों को दूर किया जाता है।
sashi dhyan ka abhyas kaise kre
Sakshi Dhyan

  • पहली विधि -  इस विधि का अभ्यास करने के लिए किसी ध्यानात्मक आसन का प्रयोग करे ,जैसे पद्मासन ,सुखासन ,स्वस्तिकासन ,जिस किसी भी आसन में आप ज्यादा देर तक बैठ सकते है उस आसन में बैठ जाए। इस विधि को करते समय अपनी पीठ ,छाती और गर्दन को सीधा रखे। अपने दोनों हाथो को अपने घुटनों पर रखकर ,अपनी आँखे बंद करे ,अब अपने मन को खुला छोड़ दे ,मन जो कुछ भी करे उसे करने दे ,आपको सिर्फ साक्षी भाव से मन का खेल देखते रहना है ,मन अच्छे विचारो को दर्शाता है या बुरे विचारों को आपको सिर्फ इस घटना के साक्षी बने रहना है ,चाहे फिर वो भूतकाल में जाए या भविष्य में ,मन जहा जहा भी जाए आपको सिर्फ उसीका ध्यान करते जाना है। ध्यान करते करते अगर मन किसी चिंतन में रुकता है ,तो उसे रुकने दे ,आपको केवल अपने साक्षी भाव को जाग्रत रखना है। 
  • ध्यान के लिए समय - साक्षी ध्यान का अभ्यास कम से कम ५ मिनट और ज्यादा से ज्यादा १० मिनट तक करे ,इस अभ्यास में मन को किसी भी तरह से स्थिर और एकाग्र किया जाता है ,इसलिए अपनी एकाग्रता को बनाये रखे ,याद रखे "जब तक आप नहीं चाहेंगे तब तक कोई भी आपकी साधना में विघ्न उत्पन्न नहीं कर सकता ".
  • साक्षी ध्यान के अभ्यास से लाभ जैसे कोई लोहार किसी धातु को आग में पिघलाकर शुद्ध कर देता है ,उसी तरह साक्षी ध्यान के अभ्यास से मन में दबे हुए पुराने से पुराने विचार भी बाहर निकल आते है ,और मन शुद्ध और शक्तिशाली  हो जाता है। 
  • दूसरी विधि - ध्यान की इस विधि में मन को किसी एक ही केंद्र बिंदु पर स्थिर किया जाता है ,पहली विधि से जब मन शांत ,स्वच्छ एवं अंतर्मुखी हो जाए तो ध्यान को साँस पर लगा दीजिये। इस क्रिया में ध्यान को साँस पर एकाग्र किया जाता है। इस विधि में मन पूर्ण रूप से नासिका के अग्रभाग पर केंद्रित होता है। साँस को आते समय और जाते समय केवल साक्षी भाव से देखना है ,धीरे धीरे आपका मन स्थिर होगा ,तो उसे अपनी नाभि पर केंद्रित करे और भावना रखे ,की श्वास क्रिया के द्वारा ,नाभि जो ऊपर निचे हो रही है ,उसपर मन बैठकर झूल रहा है। इस विधि को कम से कम ५ मिनट और ज्यादा से ज्यादा १० मिनट तक करे। इस अवस्था में चित्त के दोष तत्काल दिखाई देने लगते है ,इस प्रकार हम अपने मन को पहचान कर उसे सही दिशा  की और अग्रेसर कर सकते है। अगर आपके जीवन में कोई समस्या है तो इस ध्यान की अवस्था में उस समस्या का समाधान मिल जाता है। 
  • साक्षी ध्यान के अभ्यास के कुछ नियम है .
  • ध्यान का अभ्यास दिनभर में कम से कम ३० मिनट तक दो बार करे। ध्यान के अभ्यास के लिए सुबह ३.३० से ५ बजे ब्रम्हमुहूर्त का समय अधिक उपयुक्त रहता है। इस मन अचेतन अवस्था में रहता है और ध्यान लगाने में आसानी होती है। 
  • प्रातकाल ध्यान करने से पूर्व शौच से निवृत्त होकर चेहरा पानी से धोकर ही ध्यान करने बैठे ,इससे आलस्य  नहीं आएगा। 
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                 


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