Hatha Yoga In Hindi (Complete Guide)

 Hatha Yoga In Hindi योगसाधना की सभी क्रियाये हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है , परंतु इन सबमे हठयोग का अपना एक अलग ही महत्व है। योगगुरु Hatha Yoga In Hindi का वर्णन करते हुए बताते है ,की हठयोग या षट्कर्म की क्रियाओं के बिना अगर कोई योगसाधना का अभ्यास करता है ,तो उसे बहुतसी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।

 Hatha Yoga In Hindi - हठयोग 

 Hatha Yoga In Hindi - हठयोग

  1. योग में उन्नत अवस्था को प्राप्त करने के लिए हमारा तन और मन स्वस्थ एवं शुद्ध होना आवश्यक है। 
  2. इसीकारण षट्कर्मों की विभिन्न क्रियाओं द्वारा साधक का तन और मन साफ़ किया जाता है ,जिससे आगे चलकर साधक को योगसाधना करना सरल हो जाता है। 
  3. हठयोग का अभ्यास करने वाले साधक को यम,नियम का पालन करना आवश्यक होता है।
  4.  हठयोग में हमें योग के ८ अंगों का वर्णन देखने को मिलता है , यम ,नियम, आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार,ध्यान ,धारणा और समाधि। 
  5. इन सबमे षट्कर्म या हठयोग की क्रिया आसन के साथ आती है ,वैसे अगर देखा जाए तो षट्कर्म और आसन दोनों का कार्य एक समान ही है। 
  6. दोनों अंगों का अभ्यास शरीर को शुद्ध और निरोगी बनाता है।  
  7. परंतु अगर योगगुरुओं की माने तो इन दोनों में से षट्कर्म विधि को ही योगगुरुओं ने आसन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है। 
  8. योगग्रंथों में हठयोग के बारे में ७ प्रमुख अंगों का वर्णन देखने को मिलता है। 
  9. इसके अनुसार शरीर और आत्मा को ,आसन के द्वारा दृढ़ता ,मुद्रा से स्थिरता  ,प्रत्याहार से धीरता ,प्राणायाम से लाघव ,ध्यान के अभ्यास से आत्मा और शरीर के प्रकृति को जानने की शक्ति और समाधी से मुक्ति का अनुभव साधक को प्राप्त होते है। 
  10. मुद्राये भी षट्कर्म का ही अंग माना गया है ,परंतु मुद्रा को समझने से पहले षट्कर्मों का अभ्यास करना अनिवार्य है। 



Importance Of Hatha Yoga - हठयोग का महत्व  

  1. जब हम इस पृथ्वी पर जन्म लेते है ,तब हमारा शरीर अंदर से  बिल्कुल  निकोप और स्वच्छ  रहता है। 
  2. हमारा मन और आत्मा भी पवित्र रहती है ,पर जैसे जैसे हम बड़े होते है ,वैसे वैसे ही प्रदूषित भोजन ,प्रदूषित जल ,प्रदूषित वायु और प्रदूषित मन के द्वारा शरीर के अंदर दूषित तत्व और विकार जमा होते रहते है।  
  3. षट्कर्म या हठयोग की क्रियाओं के अभ्यास से ,शरीर के अंदर से दूषित तत्व निकलकर शरीर स्वच्छ और साफ़ हो जाता है। 
  4. हमारा ये शरीर प्रकृति के तीन गुणों से बना है। वात,पित्त और कफ ,इन तीनों गुणों में से अगर एक गुण भी असंतुलित हो जाए तो मनुष्य रोग की चपेट में आ जाता है। 
  5. षट्कर्म का अभ्यास इन तीनो गुणों को संतुलित बनाये रखने में हमारी मदत करता है ,जिस कारण हमारा शरीर निरोगी ,स्वस्थ और शक्तिशाली बना रहता है। 
  6. योगसाधना का अभ्यास करने के लिए शरीर और मन का निरोगी होना अति आवश्यक है ,षट्कर्मों के इन ७ अंगों को अपने जीवन में अपनाकर मनुष्य आजीवन स्वस्थ और निरोगी जीवन को प्राप्त कर सकता है। 
  7. षट्कर्मों का अभ्यास करने के लिए ७ क्रियाये बतायी गयी है ,नेति ,धौति ,वस्ति ,त्राटक ,न्योली ,गजकर्म और कपालभाति। 
  8. इसके अतिरिक्त योगग्रंथों में कई महर्षियों ने गजकरणी और शंख प्रक्षालन को भी षट्कर्म का ही हिस्सा माना है। 


  • इस लेख में आपने "Hatha Yoga In Hindi" के बारे में जाना ,षट्कर्म का अभ्यास किसी योग्य गुरु की विशेष देखरेख में ही करना चाहिए।  इसके अतिरिक्त षट्कर्म क्रियाये करते समय योग्य आहार विहार ,और यौगिक नियमो का पालन करना भी अनिवार्य है। 


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