Tratak Kriya | त्राटक क्रिया क्या है ? इसे कैसे करे ?

Tratak Kriya योगसाधना के प्रमुख आठ अंग है ,यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार ,ध्यान ,धारणा और समाधी। त्राटक क्रिया ध्यान अभ्यास की क्रिया है ,षट्कर्म यानि हठयोग क्रियाओं में हमें Tratak Kriya का उल्लेख देखने को मिलता है। 

 Tratak Kriya - त्राटक क्रिया 

Tratak Kriya - त्राटक क्रिया



इस क्रिया में किसी एक वस्तु की तरफ एकटक देखकर ,उस वस्तुपर अपना ध्यान केंद्रित करना होता है। इस क्रिया को करने से व्यक्ति में एकाग्रता क्षमता विकसित होकर संमोहन शक्ति का जागरण होता है। इसका अभ्यास किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठकर किया जा सकता है ,जैसे पद्मासन ,वज्रासन ,सुखासन इत्यादि। योगशास्त्र के अनुसार की सूक्ष्म वस्तु की तरफ बिना अपनी आँखों को झपके ,आँखों से पानी निकलने तक देखते रहना ही त्राटक विधि कहलाती है। त्राटक विधि के निरंतर अभ्यास से कुंडलिनी जागरण में भी मदत मिलती है ,तथा इसका अभ्यास किसी शांत और मनभावन वातावरण में करना ही अधिक लाभकारी होता है।

ऐसा जरुरी नहीं की इस क्रिया को केवल दीपक की ज्योति पर ही किया जाए ,अपितु आप इसका अभ्यास किसी वस्तु या बिंदु के साथ और कहींपर भी कर सकते है। जब आपकी त्राटक साधना सिद्ध हो जाए तो आप इसका अभ्यास उगते हुए सूरज या रात्रि की चांदनी पर ध्यान केंद्रित करके भी कर सकते है।





  • Tratak Kriya Steps - त्राटक अभ्यास की विधि
  1.  त्राटक क्रिया का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले किसी ध्यानात्मक आसन में बैठ जाए। 
  2.  अपने से ४ हाथ दुरी पर उस वस्तु को रखे जिस पर आप ध्यान केंद्रित करना चाहते है। 
  3. अगर आप दीपक या मोमबत्ती का प्रयोग करना चाहते है तो दीपक के शुद्ध घी का इस्तेमाल करे।  
  4. या आप किसी बिंदु पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहते है तो छोटे १ रूपया का सिक्का लेकर ,उसके आकार जितना ही हरे या काले रंग का बिंदु बना ले और इसे ठीक अपने सामने दीवार पर चिपका दे। 
  5. पद्मासन में बैठकर उस बिंदु की और बिना पलक  झपकाए देखें ,या अगर आपके सामने दीपक या मोमबत्ती है तो उसके ज्योति पर अपनी आखें टिकाये। 
  6. जबतक आपकी आँखों से पानी ना आये तबतक आपको उस ज्योति पर ध्यान को केंद्रित करके रखना है। 
  7.  जब आपको ऐसा लगे की पानी आनेवाला है तो तुरंत अपनी आखों को बंद करके ,अपने दोनों हाथो के पंजो को रगड़कर ,अपने दोनों हाथों से आँखों को धीरे धीरे सहलाये। 
  8. शुरुवात में जब आप इसका अभ्यास करेंगे तो आपका मन आपको भटकाने की कोशिश करेगा ,आपको ज्योति के आसपास प्रकाश या अलग अलग ज्योतियाँ दिखाई देगी। 
  9. परंतु आपको अपना ध्यान केवल उसी ज्योति पर बनाये रखना है ,जिसपर आप पहले से ध्यान केंद्रित कर रहे है।
  10. इसका निरंतर अभ्यास करने के बाद जब आपको केवल एक ही ज्योति या बिंदु दिखाई देने लगे तो समझ लीजिये की आपका त्राटक सिद्ध हो चूका है।





Health Benefits Of Tratak - त्राटक क्रिया के लाभ

  1. शांभवी मुद्रा को भगवान शिव की मुद्रा माना जाता है ,जो त्राटक क्रिया का अभ्यास करने से सिद्ध हो जाती है। 
  2. आँखों से संबंधित समस्त विकार त्राटक का नियमित अभ्यास करने से दूर हो जाते है। 
  3. इस क्रिया को करने से धारणा शक्ति का विकास होकर एकाग्रता क्षमता बढ़ती है। 
  4. आँखों की रोशनी बढ़ाने के लिए त्राटक रामबाण की तरह काम करता है।
  5. त्राटक क्रिया पूर्ण सिद्ध होने के बाद संमोहन शक्ति का जागरण होता है। 
  6. जिससे व्यक्ति अगर किसी के आँखों में आँखे डालकर उसे कुछ करने के लिए कहता है ,तो वो वही करता है ,जो वो व्यक्ति करने के लिए कहता है।
  7. ये सभी Tratak Kriya Benefits है ,जिसे आप नियमित त्राटक साधना से प्राप्त कर सकते है। 



Precautions For Tratak Technique - त्राटक में सावधानी  

  1. त्राटक का अभ्यास करने के लिए कभी भी केरोसिन का उपयोग या लाइट का उपयोग ना करे। 
  2. इसे केवल दीपक ,मोमबत्ती ,बिंदु या अपने इष्ट देवता के चित्र पर ही करे। 
  3. इसके अभ्यास के लिए ब्रम्हमुहूर्त या मध्यरात्रि का समय अधिक फलदायी रहता है।

अब आप "Tratak Kriya" के बारे में जान गए है। त्राटक क्रिया का अभ्यास आप घर पर भी कर सकते है ,तो आज से इस क्रिया को अपने डेली रूटीन में शामिल करे। ये अवश्य ही आपको सकारात्मक परिणामों से अवगत कराएगी। 


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