Gomukhasana (Cow-Face-Pose) In Hindi Complete Guide

Gomukhasana (Cow-Face-Pose) In Hindi Complete Guide योगशास्त्र में वर्णित गोमुखासन सरल और प्रभावी आसनों में से एक है। इसका अभ्यास छोटा बड़ा ,स्त्री पुरुष कोई भी कर सकता है। बहुत ही साधारण सा दिखने वाला ये आसन ,शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी है। गोमुखासन शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है ,जिसका शब्दशः अर्थ गो + मुख+आसन।  संस्कृत में गाय को गो कहा जाता है और चेहरे को मुख के नाम से संबोधित करते है। गोमुखासन का अभ्यास करते समय व्यक्ति के शरीर की आकृति ,गाय के चेहरे के समान दिखाई देती है। इसीलिए योगशास्त्र में इस आसन को गोमुखासन के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में गाय को परम पवित्र माना गया है ,शास्त्रों के अनुसार सभी देवी देवतायें गाय के अंदर ही निवास करते है। गाय निर्मित वस्तु भी कभी निरुपयोगी नहीं होती ,यहा तक की गाय का यूरिन (गोमूत्र) भी कैंसर जैसी भयानक बीमारियों को दूर करने में मनुष्य जाती की सहायता करता है।  ठीक इसीप्रकार गोमुखासन का अभ्यास भी साधक के शरीर और आत्मा को पवित्र कर देता है। इस लेख में हम Gomukhasana In Hindi का विस्तार से वर्णन करने जा रहे है।


Gomukhasana In Hindi - गोमुखासन योग  

Gomukhasana In Hindi - गोमुखासन योग
Gomukhasana (Cow-Face-Pose)

  • Gomukhasana Steps 


  1.  गोमुखासन का अभ्यास करने के लिए किसी ऐसे स्थान का चुनाव करे ,जो स्वच्छ ,शांत और खुला हो।  
  2. सबसे पहले जमीन पर चटाई डालकर सामान्य स्थिति में बैठ जाए। 
  3.  अपने बाएं पैर को घुटने से मोड़ कर ,अपने दाएं नितंब (हिप्स) के निचे रखे। 
  4. इस स्थिति में बाएं पैर के घुटने से लेकर उँगलियों तक का भाग फर्श से जुड़ा होना चाहिए। 
  5. अब अपने दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर अपनी बायीं जांघ पर रखे ,इस अवस्था में ध्यान दे की दोनों घुटने ठीक एक दूसरे के ऊपर आने चाहिए। 
  6. अपने बाएं हाथ को कोहनी से मोड़कर ,पीठ के पीछे ले जाए और दाहिने हाथ को दाहिने कंधे के ऊपर से ले जाकर निचे की तरफ ,यानी जिस दिशा में आपका बायां हाथ हो ,खींचने का प्रयत्न करे। 
  7.  इन दोनों हाथों को पीठ के पिछले हिस्से में ही ,एक दूसरे से मिलाने की कोशिश करे ,मिलते है तो ठीक है ,नहीं तो नियमित अभ्यास से ये मिल जाते है ।  
  8. अभ्यास के समय अपने मेरुदंड ,छाती और सर को तानकर रखे ,और लम्बी एवं गहरा श्वास ले। 
  9. जब तक इस आसन में रुक सकते है ,रुकने का प्रयास करे। 
  10. आसन के दौरान अपने ध्यान को श्वास - प्रश्वास पर लगाए और अपने कंधे ,हिप्स ,जाँघे और कमर में खिचाव को महसूस करे।
  11. ज्यादा जोर जबरदस्ती से इसे ना करे ,शुरुवाती समय में अगर दोनों हाथों का मिलान संभव ना हो पाए तो किसी इलास्टिक से बने कपडे को दोनों हाथों से पकड़कर इसका अभ्यास करे। 
  12.  नियमित अभ्यास से आप दोनों हाथों को सरलता के साथ मिला पाएंगे। ये गोमुखासन की एक आवृति हो गयी। 
  13. इसी क्रिया को अब अपने दूसरे पैर के साथ भी करे।
  14. शुरुवात में गोमुखासन का अभ्यास 40 से 60 सेकंड तक ही करे ,फिर जैसे जैसे आपका अभ्यास बढ़ता जाए ,समय अवधि को बढ़ाते जाए। 
  15. Gomukhasana Steps करते समय कई लोगों के मन में एक उलझन रहती है ,वो समझ  नहीं पाते की किस अवस्था में कौन सा हाथ ऊपर से मिलाये और कौनसा हाथ निचे से। 
  16. तो याद रखे की इस आसन का अभ्यास करते समय जिस पैर को आप जांघ के ऊपर रखते है ,उसी हाथ को ऊपर से मिलाये। जैसे अगर आपका बायां पैर जांघ के ऊपर है ,तो आपको बाएं हाथ को  बाएं कंधे के ऊपर से मिलाना चाहिए।
  17. गोमुखासन का अभ्यास करने से पहले आप वीरासन का अभ्यास कर सकते है। {पढ़े - वीरासन और उसके लाभ }






Amazing Health Benefits Of Gomukhasana - गोमुखासन के लाभ 



Amazing Health Benefits Of Gomukhasana - गोमुखासन के लाभ
Gomukhasana 


  1.  गोमुखासन का नित्य अभ्यास करने से कंधे ,हिप्स (नितम्ब),जाँघे ,पैर की मासपेशियाँ  मजबूत बनती  है।
  2.  ये आसन कमर को लचीला एवं पीठ को मजबूती प्रदान करता है। 
  3. इसका अभ्यास छाती को चौड़ा कर फेफड़ों की श्वास लेने की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। 
  4. यह आसन पीठदर्द को कम कर पीठ को मजबूत और निरोगी बनाने में मदत करता है। 
  5. गोमुखासन का अभ्यास साधक को तन से ही नहीं बल्कि मन से भी शुद्ध करता है ,जिससे साधक कई प्रकार से विकारों से अनायास ही छुटकारा पा जाता है।
  6. इससे मस्तिक्ष शांत होकर एकाग्रता क्षमता को विकसित करता है। 
  7. सायटिका यानि कटिस्नायुशील जैसी बिमारियों के उपचार में गोमुखासन सहायक है। 
  8. नित्य Gomukhasana Steps करने से गुर्दे अधिक कार्यशमता के साथ कार्य करने लगते है ,और गुर्दे के विकार दूर होकर शरीर सुदृढ़ और निरोगी बना रहता है। 
  9. अवसाद या मानसिक विकारों में गोमुखासन अभ्यास करना बेहत ही फायदेमंद है। 
  10. जिन्हे मधुमेह (शुगर) की समस्या है उन्हें गोमुखासन को अपने दिनचर्या में अवश्य स्थान देना चाहिए। 
  11. दमा ,अस्थमा जैसी बीमारियों में गोमुखासन परम लाभकारी है। 
  12. जिन महिलाओं को श्वेत प्रदर या मासिक धर्म जैसी समस्याएं है उन्हें गोमुखासन का लाभ अवश्य लेना चाहिए।
  13.  साथ ही जिन भाइयों को गुप्तरोग ,स्वप्नदोष ,जैसी यौन समस्याएं सताती है ,उन्हें भी इस आसन का अभ्यास नियमित रूप से करना चाहिए।
  14. गोमुखासन मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन बढ़ाकर सहनशक्ति जैसे गुणों को उजागर करता है। 
  15.  ये सभी Benefits Of Gomukhasana  है। जिसे आप नियमित अभ्यास से पा सकते है। 




  • Things To Know Before Doing Gomukhasana - ध्यान देने योग्य बातें 
  1. गोमुखासन का अभ्यास करने से पूर्व ये निश्चित कर ले की आपका पेट खाली और साफ़ हो। 
  2. अगर पेट साफ़ नहीं हो रहा है, तो आप षट्कर्म की क्रियाएं या कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास कर अपने पेट को साफ़ कर सकते है। 
  3. गोमुखासन का अभ्यास भोजन के १० घंटे बाद करना चाहिए।
  4.  गोमुखासन का अभ्यास करने के लिए सबसे उत्तम समय ब्रम्हमुहर्त (सुबह) और शाम का होता है। 
  5. अगर आप चाहे तो सुबह अपने दैनंदिन आसनों की शुरुवात ही गोमुखासन से कर सकते है। 






Precautions For Gomukhasana - गोमुखासन में सावधानी 


  1. मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों को गोमुखासन का अभ्यास करते समय थोडीसी मुश्किल हो सकती है ,परंतु  घबराएं नहीं ,नियमित अभ्यास आपको हर मुश्किल को पार करने में मदद करेगा।
  2. कंधे ,गर्दन,और घुटने से पीड़ित व्यक्ति इस आसन को करने से पूर्व अपने चिकत्सक (डॉक्टर) से परामर्श अवश्य करे। 
  3.  गंभीर पीठदर्द से पीड़ित लोग गोमुखासन का अभ्यास करने से बचे।

इस लेख में आप "Gomukhasana (Cow-Face-Pose) In Hindi Complete Guide" के बारे में जान गए है। ये आसन सरल और साधारण प्रतीत जरूर होता है, पर साथ ही यह बहुत फयदेमंद भी है। इस छोटेसे आसन का अभ्यास आपके जीवन में बदलाव लाने के लिए पर्याप्त है।


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