Hanumanasana In Hindi Complete Guide

Hanumanasana In Hindi Complete Guide योगशास्त्र में वर्णित हनुमान आसन एक बहुत ही प्रभावी और चमत्कारी आसन है। शुरुवाती समय में हनुमान आसन का अभ्यास करते समय थोड़ी कठिनाइयाँ हो सकती है। परंतु एकाग्रता और सूझ-बुझ के साथ किया हुआ अभ्यास इस आसन में सफलता दिलाता है। हनुमान एक संस्कृत शब्द है।  हिन्दू संस्कृति में पूजे जाने वाले भगवान शिव के अवतार ,हनुमानजी से इस आसन की निर्मिति हुयी। बाल ब्रम्हचारी हनुमान की रामभक्ति आचरणीय और लोकप्रिय है। दरअसल जब माता सीता को रावण लंका ले गया था ,तब समुद्र पार कर लंका जाने के लिए रामभक्त हनुमान ने छलांग लगायी थी ,और माता सीता की खोज की थी। हनुमान आसन ,हनुमान के द्वारा लगाई गयी इसी छलांग को दर्शाती है।  इसलिए इस आसन को हनुमान आसन के नाम से जाना जाता है। इस लेख में आपको Hanumanasana In Hindi का विस्तारित वर्णन करने जा रहे है। जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। 

 Hanumanasana In Hindi - हनुमान आसन योग 


Hanumanasana In Hindi - हनुमान आसन योग
Hanumanasana Steps 

  • Hanumanasana Steps 

  1. हनुमान आसन का अभ्यास करने के लिए किसी स्वच्छ और खुले स्थान का चुनाव करे। 
  2. सर्वप्रथम निचे चटाई डालकर घुटनो के बल बैठ जाए। 
  3. शुरुवाती समय में चटाई के  स्थान पर कंबल या कोई नरम कपड़ा बिछाकर इस आसन को करे।  
  4. इस अवस्था में ध्यान रखे की घुटने एक दूसरे से थोड़ी दुरी बनाते हो। 
  5.  अपने दाहिने घुटने को आगे की और ले जाए। और दाहिने पैर की एड़ी को जमीन पर टिकाकर रखे। 
  6.  श्वास को अंदर ले ,अब श्वास को बाहर निकालते हुए अपने धड़ को धीरे धीरे आगे बढ़ाये और शरीर संतुलित करने के लिए अपने दोनों हाथों की उंगलिया फर्श पर टिकाकर सहारा ले। 
  7. इसी क्रिया को करते हुए अपने बाए घुटने को पीछे की और ले जाए और संतुलन बनाये रखे। 
  8. इस मुद्रा के अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए अपने दाहिने पैर को आगे की और बढ़ाते जाए।  
  9.  यही स्थिति होती है जहा आपको अपनी आत्मशक्ति को जगाकर धैर्य के साथ काम लेना होता है। 
  10. अभ्यास को जारी रखते हुए अपने बाए पैर को पीछे की तरफ ले जाने का प्रयत्न करे।  
  11. इस अवस्था में आपके दाहिने पैर की एड़ी और घुटना जमीन से सटा होना चाहिए तथा आपके दाहिने पैर की उंगलिया ऊपर की और होनी चाहिए। 
  12. यही दूसरी तरफ आपके बाए पैर के जांघ से लेकर उंगलियों तक का भाग जमीन से जुड़ा होना चाहिए। 
  13. जब आपके दोनों पैर सीधे हो जाए और संतुलन की स्थिति बनने लगे।  तो इस अवस्था को अधिक आरामदायक बनाने के लिए अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाकर नमस्कार की मुद्रा बनाये और अपने शरीर और पीछे की कमान दे। 
  14. जैसे किसी धनुष्य को बनाने के लिए लकड़ी को कमान देनी होती है ,और फिर उसमे धागा भरा जाता है। ठीक उसी प्रकार आपके शरीर को कमान देनी है। 
  15. अपनी श्वास को सामान्य रूप से चलते रहने दे ,तथा १ मिनट तक इस आसन में बने रहने का प्रयास करे। 
  16. शुरुवाती समय में जितना आप इस आसन में आरामदायक स्थिति महसूस करते है ,उतना ही रुके। 
  17. निरंतर अभ्यास के साथ आप अपनी समय अवधि को बढ़ा सकते है। जब इसका अभ्यास हो जाए तो आसन को छोड़ने के लिए अपने दोनों हाथों को जमीन पर रखे और पैरों को सामान्य स्थिति में लाते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाए। 
  18. इसी क्रिया को पैरों को बदलकर करे। 
  19. Hanumanasana Steps करते समय हिंदी देवता हनुमान जी के शक्ति की कामना करनी चाहिए। 
  20. इस आसन को सरल बनाने के लिए आप इसके पहले वीरासन या सुप्त वज्रासन का अभ्यास कर सकते है। {पढ़े - सुप्त वज्रासन और उसके फायदे }
  21.  जब आप हनुमान आसन का अभ्यास कर लेंगे तो इसके बाद आप पच्शिमोत्तनासन या नटराज आसन का अभ्यास कर सकते है। 





  • Hanumanasana Tips  For Beginners  

  1. हनुमान आसन सामान्य आसन नहीं है ,इस आसन का अभ्यास दोनों पैरों में खिचाव उत्पन्न करता है ,इसलिए इसे करते समय पैरों के निचे कंबल का प्रयोग करे।
  2. जब आप इस आसन का अभ्यास करते है ,तो अपने धड़ को सीधा और लंबा करने के लिए अपने पीछे के पैर पर दबाव डाले। 
  3. तथा आगे के पैर को जमीन से सटाकर पैरों की उंगलिया को स्पर्श करे एवं अपने सर को दाहिने पैर के घुटने से लगाने का प्रयास करे।





Amazing Health Benefits Of Hanumanasana - हनुमान आसन के लाभ 

Amazing Health Benefits Of Hanumanasana - हनुमान आसन के लाभ
Hanumanasana Benefits 

  1. हनुमान आसन के अभ्यास से पूर्ण शरीर में खिचाव उत्पन्न होता है ,तथा मांसपेशियां मजूबत बन कर सुचारु ढंग से अपना कार्य करती है। 
  2. ये आसन शरीर में आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाता है ,साथ ही वीर्य दोषों को दूर कर वीर्य को मजबूत बनाता है।  
  3. इसका निरंतर अभ्यास जाँघे ,पैर,कमर ,हिप्स ,को लचीला बनाकर मजबूती प्रदान करता है। 
  4. Hanumanasana Steps  जठराग्नि की तीव्रता को बढ़ाता है,और पाचनतंत्र को ठीक करता है। 
  5. भूक न लगना,मंदाग्नि ,पाचन संबंधी समस्याएं तथा पेट की समस्याओं में हनुमान आसन विशेष है। 
  6. ये आसन शरीर के प्रजनन अंगों पर प्रभाव डालता  है ,जिससे प्रजनन संस्था के सभी रोगों के लिए ये आसन फायदेमंद है। 
  7. प्रजनन शक्ति को बढाकर व्यक्ति को ओजस्वी और तेजस्वी बनाता है।
  8.  समस्त वीर्यदोष तथा गुप्तरोग इस आसन से ख़त्म हो जाते है। 
  9. नित्य हनुमान आसन के अभ्यास से छाती चौड़ी और मजबूत बनती है एवं पीठ को फ़ैलाने में ये आसन विशेष उपयोगी है। 
  10. इस आसन का अभ्यास तनाव ,चिंता,अवसाद जैसी समस्याओं को दूर रखता है। 
  11. शरीर में मौजुद विशेष गुणों में से धैर्य ,सहनशीलता और समर्पण जैसे गुणों को उजागर करता है।
  12. इसका अभ्यास स्थिरता को बढ़ाता है और शारीरिक और मानसिक शक्तियों को विकसित करता है। 
  13. मन को संयमित रखने में विशेष भूमिका निभाता है। 
  14. ये आसन शरीर में स्फूर्ति को कभी कम नहीं होने देता ,बड़ी से बड़ी कमजोरी को दूर करने में सहायक है। 
  15. सबसे महत्वपूर्ण बात ये व्यक्ति के मन डर को दूर कर ,साधक को निर्भीक बनाता है। ये सभी Hanumanasana Benefits  है। जो आपको नियमित और सावधानीपूर्वक अभ्यास से प्राप्त होते है। 




  • Things To Know While Practicing This Pose - ध्यान देने योग्य बाते
  1. हनुमान आसन का अभ्यास खाली पेट ही करना चाहिए। इसलिए हनुमान आसन का अभ्यास करने से पूर्व यह निश्चित कर ले की आपके भोजन और अभ्यास के बिच ०८ से १० घंटे का अंतराल हो। 
  2. हनुमान आसन पेट की आतों पर अपना विशेष प्रभाव दिखता है ,इसलिए इसका अभ्यास करने से पूर्व आपकी आतें खाली होना बहुत ही आवश्यक है। 
  3. इसलिए इसके अभ्यास के लिए , ब्रम्हमुहर्त (सुबह) का समय सर्वोत्तम और सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है।





Precautions For Hanumanasana - हनुमान आसन में सावधानी 

  1. हनुमान आसन सामान्य योगासनों में नहीं आता इसीलिए इसे चिकित्सक (डॉक्टर) की सलाह लेकर ,या  किसी योग्य गुरु या प्रशिक्षक के सानिध्य में ही करे ,नहीं तो आप खुद ही अपने लिए चोट या समस्या  उत्पन्न कर लेंगे। 
  2. इस आसन का अभ्यास करते समय कभी भी आपको दर्द या पीड़ा उत्पन्न हो तो आसन को तुरंत रोक दे। 
  3. पैरों को फैलाते समय जबरदस्ती बिल्कुल ना करे ,जितना संभव हो उतना ही पैरों को फैलाना चाहिए। 
  4. पहले से पैर,जाँघे ,कंधे ,हिप्स ,और कमर में किसी भी तरह की चोट या समस्या होनेपर इस आसन को ना करे।  
  5. पहली बार किसी योग्य गुरु या साथी के साथ ही इस आसन का अभ्यास करे। 


अब आपको "Hanumanasana In Hindi Complete Guide" के बारे में जानकारी मिल चुकी है। आशा करता हूँ की आप सावधानीपूर्वक और गुरु के सानिध्य में हनुमान आसन में महारथ हासिल करेंगे। 
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