Natarajasana In Hindi Complete Guide

Natarajasana In Hindi Complete Guide योगशास्त्र में वर्णित Natraj Asana दुःख ,भय ,शोक ,पीड़ा ,व्याधि और रोगों को हरनेवाला माना गया है। नटराज भगवान शिव का नाम है ,नट यानि नृत्य और राज का अर्थ राजा होता है। सटीक शब्दों में कहा जाए तो जो नृत्य और कला का राजा है ,वही नटराज कहलाता है। नटराज भगवान महादेव का नृत्य अवतार है जो कला ,प्रेम और संगीत के लिए उनके प्रेम को दर्शाता है। नटराज आसन भगवान् शिव का प्रिय आसन है ,अगर इस आसन को ठीक तरह से किया जाएँ तो व्यक्ति की आकृति ठीक उसी प्रकार बन जाती है ,जिस तरह शिव, तांडव नृत्य करते समय दर्शाये जाते है। इस लेख में Natarajasana In Hindi Complete Guide की विस्तृत जानकारी देने जा रहे है।

Natarajasana In Hindi - नटराज आसन योग 


Natarajasana In Hindi - नटराज आसन योग
Nataraj Asana 


  • Natraj Asana Steps 

  1. नटराज आसन का अभ्यास किसी स्वच्छ और खुले स्थान करे। जिससे आपको अच्छे से अच्छे परिणाम प्राप्त हो सके। 
  2. सर्वप्रथम निचे चटाई बिछाकर ताड़ासन की स्थिति में सीधे खड़े हो जाए। { पढ़े - ताड़ासन और उसके लाभ }
  3.  श्वास को अंदर लेते हुए अपने बाए पैर को बाएं हाथ से ,पिछेसे ऊपर उठाने की कोशिश करे। 
  4. इस स्थिति में जितना आपका बायां पैर पीछे जाता है ,उतना ही जाने दे। 
  5. नियमित अभ्यास से जैसे जैसे आपके अंदर लचीलापन बढ़ता जाएगा ,वैसे वैसे पैर ऊपर उठने लगेगा। 
  6. इस स्थिति में आपके शरीर का पूरा भार आपके दाएं पैर पर आएगा।  
  7. अपने शरीर का भार अपने दाएं पैर और दाएं नितंब में समान रूप से वितरित करने का प्रयत्न करे।
  8. संतुलन स्थापित करने के लिए अपना दाया हाथ कंधे की सीधी रेखा में रखे ,और ध्यान को अपनी भृकुटि ,दाएं हाथ की मध्यमा उंगली या किसी बिंदु पर केंद्रित करके रखे। 
  9. अब धीरे धीरे अपने बाएं पैर को ऊपर की और खींचने का प्रयत्न करे। 
  10.  इसी अवस्था में संतुलन बनाने का प्रयत्न करे ,अगर संतुलन ना बन पाए तो शुरुवाती समय में दीवार या किसी वस्तु को पकड़कर सतुंलन बनाने का प्रयत्न करे। या फिर किसी साथी या मित्र की सहायता से भी आप संतुलन बना सकते है। 
  11.  इसी क्रिया को अपने दाएं पैर के साथ भी करे। 
  12. शुरुवाती समय में इसका अभ्यास 20 से 25 सेकंड तक ही करे ,नियमित अभ्यास से संतुलन बनने लगेगा फिर आप इसकी समय अवधि बढ़ा सकते है।






Amazing Health Benefits Of Natraj Asana - नटराज आसन के लाभ 

Amazing Health Benefits Of Natraj Asana - नटराज आसन के लाभ
Natarajasana




  1. नटराज आसन का नियमित अभ्यास मनुष्य को रोग ,शोक और व्याधियों से  मुकत करता है। 
  2. नियमित अभ्यास से शरीर का लचीलापन बढ़ता है तथा हार्मोन्स को संतुलित रखने में मदद करता है। 
  3. Natraj Asana  धारणा शक्ति में वृद्धि करता है ,जिससे आप किसी भी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होते है। 
  4. ये मस्तिक्ष को विकसित कर आपकी एकाग्रता क्षमता में सुधार लाता है ,तथा मानसिक एकाग्रता बढ़ाता है। 
  5. नटराज आसन दिमाग को शांत कर तनाव रहित रखता है ,जिससे व्यक्ति छोटी मोटी परेशानियों से घबराता नहीं और चिंता रहित जीवन जीता है। 
  6. नटराज आसन मोटापे को दूर कर वजन को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। 
  7. इस आसन का नियमित अभ्यास से शरीर रचना को विकसित कर संतुलन को दृढ़ बनता है। 
  8. नित्य नटराज आसन का अभ्यास मेटाबॉलिज्म प्रणाली को संतुलित रखता है और पाचनतंत्र को सुदृढ़ बनाता है।
  9. पेट संबंधित तथा पाचनक्रिया से संबंधित समस्याओं के लिए Natraj Yogasana विशेष लाभदायी है।
  10.  पैर ,कूल्हे ,जाँघ और पेट पर प्रभाव पड़ने के कारण नटराज आसन पैर,कूल्हे ,जांघ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत और निरोगी बनाता है। 
  11. छाती को चौड़ा कर फेफड़ों को मजबूती प्रदान करता है ,जिससे फेफड़े अधिक प्राणवायु लेने के लिए सक्षम होते है। 
  12. रोजाना नटराज आसन का अभ्यास हमें कई प्रकार की मानसिक एवं शारीरक बीमारियों से बचाता है।  
  13. पुराणों में वर्णन के अनुसार जो साधक इस आसन को सिद्ध कर लेता है वो रोग ,काल, और समय पर विजय प्राप्त कर लेता है,उसे किसी बात का भय नही रहता।
  14. ये सभी Benefits Of Natraj Asana  है। जिसे आप नियमित अभ्यास से प्राप्त कर सकते है। 




  • Everythings To Know Before Practicing Natraj Asana - ध्यान दे।
  1.  नटराज आसन का अभ्यास खाली पेट करे।  
  2. भोजन के ६ या ७ घंटे बाद इस आसन का अभ्यास करना स्वास्थ  के दृष्टी से उत्तम है। 
  3. अगर आपको लगे की आपका पेट साफ़ नहीं है ,तो सर्प्रथम पेट को साफ़ करे और इसके उपरांत आसन का अभ्यास करे। 


Precautions For Natraj Asana -नटराज आसन में सावधानी  

  1. हठयोग में वर्णित नटराज आसन अतिशय सुन्दर रचना है ,जो व्यक्ति के ना केवल शरीर को बल्कि आत्मा को भी प्रभवित करती है। 
  2. नटराज आसन का अभ्यास उन व्यक्तियों के लिए नहीं है जिन्हे निम्न रक्तचाप की शिकायत रहती है। 
  3. इस आसन की शुरुवात किसी योग्य प्रशिक्षक या चिकित्सकीय (डॉक्टर) परामर्श नुसार करे। 
  4. याद रखे की किसी भी आसन का उपयोग दवाई के जगह पर करना मूर्खता है। 




इस लेख में आपने "Natarajasana In Hindi Complete Guide" के बारे में जाना ,नटराज आसन देवाधिदेव महादेव को समर्पित रचना है ,जो हमारे प्रथम योग गुरु और कालों के काल महाकाल है।  
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