Shankh Prakshalan Kriya (Step By Step)

Shankh Prakshalan Kriya क्रिया  के द्वारा पेट की अंदरूनी रूप से सफाई की जाती है। इसके नाम के अनुसार ही इस क्रिया में पेट की नली को इसतरह घुमाया जाता है ,जिसतरह किसी शंख की आकृति होती है। जिसप्रकार शंख को साफ़ किया जाता है ठीक उसी प्रकार Shankh Prakshalan Kriya में ,पानी पीकर गुदामार्ग से पानी को बाहर निकाला जाता है। 


Shankh Prakshalan Kriya - शंख प्रक्षालन क्रिया  


Shankh Prakshalan Kriya - शंख प्रक्षालन क्रिया


इस क्रिया को हठयोग में विशेष रूप से स्थान दिया गया है। इस क्रिया को करके साधक का मन शांत होता है और ध्यान और समाधी का अभ्यास करने के लिए ये क्रिया विशेष रूप से सहायक सिद्ध होती है।


  • Shankh Prakashalan Method - शंख प्रक्षालन करने की विधि 
  1. शंख प्रक्षालन क्रिया का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले २ से ३ लीटर पानी गर्म कर ले। 
  2. जब पानी गर्म हो जाए तो उसे लेकर उसमे १ लीटर ठंडा पानी और २५ ग्राम नमक मिला दे और पानी को ठंडा होने दे। 
  3. जब पानी थोड़ा गुनगुना हो जाये, तो उसमे २ नींबू  काटकर निचोड़ दे। 
  4. उसमे से २-३ गिलास पानी को निकालकर पि ले ,पानी पीते समय निचे बैठकर ही पानी पिए। 
  5. पानी पिने के बाद निचे दिए गए आसनों का क्रमवार ४-४ बार अभ्यास करे। 





  • आसनों का अभ्यास करने की विधि - 
  1. इस आसन के लिए निचे जमीन पेट के बल लेट जाए। 
  2. पैरों को मिलाकर एकदम सीधा रखे। 
  3.  अपने दोनों हाथों को अपने बगल में फर्श से टिकाकर ,सिर से नाभि तक के भाग को ऊपर की और उठाये। 
  4. इस आसन का अभ्यास आपको ४ बार करना है वो भी तेजी के साथ। 
  1. भुजंगासन का अभ्यास करने के बाद तुरंत ताड़ासन का अभ्यास शुरू करे।  
  2. ताड़ासन का अभ्यास करने के सबसे पहले सीधे खड़े हो जाए। 
  3. फिर अपने पैरों को आपस में मिलाकर अपने दोनों हाथों को आपस में फसाकर ऊपर की और उठाये। 
  4. अब अपने शरीर को ऊपर की और जितना संभव हो सके उतना खींचने की कोशिश करे। 
  5. इस आसन का अभ्यास भी आपको ४ बार करना है। 
  1. ताड़ासन का अभ्यास होने के बाद ,चक्रासन का अभ्यास करने के लिए निचे पीठ के बल लेट जाए। 
  2. अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर फर्श पर टिका दे। 
  3.  अपने दोनों हाथों को कंधो के ऊपर उलटी दिशा में रखकर अपने शरीर को अपने हाथो और पैरों के सहारे ऊपर उठाने की कोशिश करे।
  4.  इस आसन का अभ्यास सावधानी के साथ  ४ बार करे। 
  1.  चक्रासन का अभ्यास करने के बाद तुरंत उदराकर्षण आसन का अभ्यास करे। 
  2. सबसे पहले कागासन की स्थिति में निचे बैठ जाए ,फिर अपने बाएं पैर को मोड़कर नितंब के निचे रख दे। और दाएं पैर को घुटने से मोड़कर बाए पैर के पास बिल्कुल सीधा रखे। 
  3.  बाए हाथ को बाएं घुटने पर टिकाकर रखे और दाएं हाथ दाएं घुटने को दबाकर बाएं कमर के ऊपर के भाग को दाई और करे। 
  4. इसी क्रिया को दूसरे पैर के साथ भी करे। 
  5. इसका अभ्यास ४ बार करे ,ऊपर दिए गए आसनों का अभ्यास पूर्ण होने के बाद शौच के लिए जाए। 
  6. अगर शौच खुलकर ना आये तो ऊपर दिए गए आसनों का अभ्यास तब-तक करे जब-तक शौच खुलकर ना आये। 
  7. जब पेट साफ़ हो जाए तो इस क्रिया को रोक दे।  और एक ग्लास साधा पानी पि ले। 
  8. इस क्रिया के अभ्यास के २ घंटे बाद मुंग के दाल की खिचड़ी बनाकर उसका १०० ग्राम घी के साथ सेवन करे और दिनभर आराम करे। 





Amazing Health Benefits Of Shankh Steps - शंख प्रक्षालन क्रिया के लाभ 

  1. शंख प्रक्षालन क्रिया को करने के बाद साधक का शरीर प्राणायाम के योग्य बनता है। 
  2. जिससे ध्यान ,धारणा और समाधी में लाभ मिलता है। 
  3. इस क्रिया का अभ्यास करने पर व्यक्ति का शरीर कोमल और सुंदर बनता है। 
  4. जो सड़े गले मल महीनो हमारे शरीर में पड़े रहते है ,वो इस क्रिया का अभ्यास करने से बाहर निकल जाते है, और पेट साफ़ होकर पेट संबंधित सभी बीमारियां दूर हो जाती है। 
  5. इस क्रिया का अभ्यास करने से ,सिरदर्द,आँखों के रोग ,कानों के रोग ,पायरिया ,गले के रोग ,दाँतों के रोग इत्यादि ठीक हो जाते है। 
  6. महिलाओं के श्वेत प्रदर और मासिक धर्म जैसी समस्याओं से ये क्रिया मुक्ति दिलाती है।
  7. ये सभी Shankh Prakshalan Benefits है। जिसे आप गुरु के मार्गदर्शन में प्राप्त कर सकते है।  








Precautions For Shankh Prakshalan Technique - शंख प्रक्षालन में सावधानी 

  1. शंख प्रक्षालन करने से पहले योगासन का अभ्यास करना आवश्यक है। 
  2. जिस दिन आपको ये क्रिया करनी है उसके पहले किसी भी ठोस या तरल पदार्थों का सेवन ना करे। 
  3. जिस दिन इसका अभ्यास करे उस रात खिचड़ी या कोई हल्का अन्न का सेवन करे। 
  4. क्रिया हो जाने पर अगले २४ घंटों तक दूध से बनी किसी भी वस्तु का सेवन ना करे। 
  5. शंख प्रक्षालन का पहली बार अभ्यास किसी योग्य गुरु के सानिध्य में ही करे।  
                                                                                                                         

 इस लेख में आप "Shankh Prakshalan Kriya" के बारे में जान चुके है। पहली बार शंख प्रक्षालन का अभ्यास योग्य गुरु या किसी साथी के सानिध्य में करना शुभ परिणाम लेकर आता है। वही दूसरी और असावधानी में किया हुआ अभ्यास आपको मुश्किल में डाल सकता है।




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