Ujjayi Pranayama In Hindi (Step By Step)

Ujjayi Pranayama In Hindi उज्जायी एक संस्कृत शब्द है ,जिसका अर्थ होता है विजयी यानि जितने वाला। इस प्राणायाम का अभ्यास करने से  साधक अपनी श्वसन वायु पर विजय प्राप्त कर लेता है। अभी बारिश का मौसम शुरू हो रहा है ,ऐसे में कई बार हमारे शरीर में ठंड भर जाती है।  ऐसे में उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास करना हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकता है। उज्जायी प्राणायाम ना केवल बारिश के मौसम में बल्कि सर्दियों के मौसम में भी हमें कई तरह के लाभ प्रदान करता है। नियमित इसका अभ्यास थोड़े ही दिनों में आपको इसके परिणामों से अवगत करा देता है। कुंडलिनी जागरण हेतु करवाए जाने वाले प्राणायामों में भी उज्जायी प्राणायाम अपना एक विशेष स्थान रखता है। इसका निरंतर अभ्यास हमें कई प्रकार की गंभीर बिमारियों से बचाता है। स्त्री हो या पुरुष कोई भी इस प्राणायाम का अभ्यास करके लाभ प्राप्त कर सकता है। सामान्यतः इसे बैठकर ही किया जाना चाहिए ,परंतु  अगर आप किसी कारणवश बैठने में अक्षम हो तो आप इसे लेटकर या खड़े होकर भी कर सकते है। इस लेख में Ujjayi Pranayama In Hindi का विस्तारित वर्णन करने जा रहे है। जिसके अभ्यास से आप अनगिनत लाभों को प्राप्त कर सकते है। 

Ujjayi Pranayama In Hindi - उज्जायी प्राणायाम 

Ujjayi Pranayama In Hindi - उज्जायी प्राणायाम
Ujjayi Pranayama
            


  1. उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले किसी ध्यानात्मक आसन ,जैसे सुखासन ,पद्मासन में स्वच्छ और हवादार स्थान पर बैठ जाए। 
  2. अपना मुँह बंद करे और अपनी नाक के दोनों छिद्रों से हवा को तबतक अंदर खींचे जबतक फेफड़ों में पूरी तरह हवा ना भर जाए। 
  3. हवा को अंदर खींचते समय अपना ध्यान गले पर रखे ,और श्वास को अंदर लेते समय गले को सिकुड़कर श्वास ले ,जिससे गले में घर्षण हो। 
  4. इसप्रकार श्वास लेते समय आपके गले से एक ऐसी आवाज निकलने लगेगी जैसी किसी लोहार की भट्टी की आवाज होती है। 
  5. फिर कुछ देर श्वास को अंदर ही रोककर अपने नासिका के दाए छिद्र को बंद करके बाए छिद्र से श्वास को धीरे धीरे बाहर निकाल दे।  
  6. बाहर निकालते समय भी आपके गले से वही आवाज निकलेगी। शुरवाती समय में इस क्रिया को केवल ५ बार ही करे ,फिर जैसे जैसे आप इसमें पारंगत होते जाएंगे ,वैसे वैसे इसे २० तक ले जाए। 
  7. अगर आपके गले में कोई संक्रमण ,बलगम या  थॉयरॉइड जैसी कोई समस्या है ,तो इस क्रिया को करते समय वो बाहर निकलने लगेंगे ,ऐसे मे घबराने वाली कोई बात नहीं है ,उज्जायी  प्राणायाम से गले का शोधन ( शुद्ध ) होता है ,इसीकारण शरीर में पड़े विषैले तत्व बाहर निकलने लगते है। 
  • उज्जायी प्राणायाम लेटकर करने की विधि -  उज्जायी प्राणायाम लेटकर करने के लिए निचे जमीन चटाई बिछाकर  सीधे लेट जाए। अपने दोनों पैरों को एक दूसरे के साथ जोड़कर रखे ,अपने दोनों हाथों को अपने बगल में जमीन पर रखे ,अपनी नजर ऊपर की और रखे और शरीर को बिलकुल ढीला छोड़ दे। अब नाक की दोनों छिद्रों से धीरे धीरे लम्बी और गहरी श्वास भरे। अब अपने शरीर को जितना हो सके ताने और श्वास को अंदर की और रोककर रखे। अब अपने शरीर को फिरसे ढीला छोड़ते हुए श्वास को बाहर निकाले। ये आपकी एक आवृत्ति हो गयी ,३-४ सेकंड आराम करके फिरसे इस आवृत्ति को दोहराये।



  •  उज्जायी प्राणायाम खड़े होकर करने की विधि - उज्जायी प्राणायाम के लिए सबसे पहले खड़े हो जाए ,अपने दोनों हाथों को अपने बगल में रखे ,दृष्टी को सामान्य रखे और अपने पैरों की एड़ियों एकसाथ मिलाकर रखे। अब अपनी जीभ को थोड़ा बहार निकाल कर नली जैसा बनाले और श्वास को पूर्ण रूप से इस नली के द्वारा बाहर निकाल दे। अब मुँह को बंद करके नाक के दोनों छिद्रों से श्वास को धीरे धीरे ,बिना कोई जोर लगाए ,अंदर ले और यथासंभव इसे रोककर रखे।
  •  अब अपने शरीर को ढीला छोड़ते हुए श्वास को बाहर निकाल दे। इसप्रकार एक क्रिया करने के बाद ६ से ७ सेकंड तक आराम करे और फिरसे इस क्रिया को करे ,शुरवात में  उज्जायी प्राणायाम केवल दो बार ही करे। 

         


Amazing Benefits Of Ujjayi Pranayama -  उज्जायी प्राणायाम के लाभ



  1. उज्जायी प्राणायाम को ध्यान साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। 
  2. इससे मन शांत एवं प्रसन्न रहता है ,इस प्राणायाम का अभ्यास प्राणशक्ति को बढ़ाकर जिव को आध्यात्मिक लाभ पहुचाता है। 
  3. साथ ही जिन्हे गले संबंधित समस्याएं जैसे गण्डमाला ,ग्वाइटर ,खासी है उन्हें इस प्राणायाम से काफी आराम मिलता है।
  4.  हाइपोथॉयरॉइड रोगियों को इस प्राणायाम को अवश्य करना चाहिए। 
  5. यह जठराग्नि को प्रदीप्त कर भूक को बढ़ाता  है और पाचनक्षमता को विकसित करता है। 
  6. अस्थमा ,दमा ,और समस्त कफ विकारो को उज्जायी प्राणायाम के अभ्यास से नष्ट किया जा सकता है। 
  7. उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास करने से शरीर में शुद्ध वायु प्रवेश करती है ,जिससे रक्तदोष दूर होकर रक्त शुद्ध होता है।
  8. डिसमोनिरिया ,सफ़ेद पदर ,गर्भाशय ,मासिक धर्म संबंधी सभी स्त्री रोगों में उज्जायी प्राणायाम अत्यंत उपयुक्त है। 
  9. नपुंसकता ,वीर्यदोष ,स्वप्नदोष ,जैसी समस्याएं इस प्राणायाम का अभ्यास करने से मिट जाती है। 




Precautions For Ujjayi Pranayam - उज्जायी प्राणायाम में सावधानी 


  1.  उज्जायी प्राणायाम अत्यंत उपयुक्त और लाभकारी प्राणायाम है ,इसका अभ्यास स्त्री और पुरुष दोनों को लाभ पहुंचाता है। 
  2. पर इस प्राणायाम का अभ्यास करते समय आपके शरीर में ज्यादा मात्रा में गर्मी महसूस होने लगे ,तो इस क्रिया को रोक दे।
  3.  एक निरोगी व्यक्ति के लिए २४ घंटो में केवल २ या ३  बार ही उज्जायी प्राणायाम को करना लाभकारी है ,पर अगर आप किसी समस्या से पीड़ित है तो आप इसे अपनी प्रकृति नुसार कर सकते है। 
  4. जैसे जिन्हे  हाइपोथॉयरॉइड है उन्हें सुबह और शाम दोनों समय इस प्राणायाम को करना चाहिए ,क्योकि इस रोग में ज्यादा आलस्य आता है इसलिए  उत्साह बनाये रखने के लिए इन्हे ७ या ८ बार इसका अभ्यास करना चाहिए। 
  5. साथ ही अगर खड़े होकर या लेटकर इस क्रिया को करते समय चक्कर आना या कोई और समस्या हो तो इस प्राणायाम को रोक दे।    



इस लेख में आपने "Ujjayi Pranayama In Hindi" के बारे में जाना। इसका अभ्यास करना आपको अनगिनत लाभ देने के लिए पर्याप्त है। 
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