Paschimottanasana In Hindi Complete Guide

Paschimottanasana In Hindi Complete Guide योग में वर्णित पश्चिमोत्तानासन एक सरल और परिणामकारक योगमुद्रा है, जो मधुमेह और रक्तचाप जैसी समस्याओं के लिए एक उत्तम योग रसायन है। संस्कृत शब्द पश्चिमोत्तानासन तीन शब्दों का मेल है, पश्चिम +उत्तान +आसन । योग में शरीर के अगले भाग को पूर्व तथा पिछले भाग को पश्चिम कहा जाता है। सटीक शब्दों में इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के आगे का भाग घुटनों से सटा होता है और पीछे का भाग उन्नत होकर ध्यान को केंद्रित करता है ,इसीलिए इस आसन को  पश्चिमोत्तानासन के नाम से जाना जाता है। Paschimottanasana In Hindi संपूर्ण शरीर में एक उत्तम खिंचाव उत्पन्न करता है, तथा समस्त मांसपेशियों को राहत दिलाता है। कुंडलिनी जागरण में पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास विशेष सहायक है।


 Paschimottanasana In Hindi - पश्चिमोत्तानासन योग 


Paschimottanasana In Hindi - पश्चिमोत्तानासन योग
Paschimottanasana Yoga 


  • Paschimottanasana Steps
  1. Paschimottanasana Steps किसी शांत एवं स्वच्छ वातावरण में करना स्वास्थ को उत्तम और सकारात्मक परिणाम देता है। 
  2. सबसे पहले जमीन पर चटाई डालकर बैठ जाए। अब अपने पैरों को सामने की और फैलाये तथा मेरुदंड ,छाती ,और गर्दन को सीधा रखे। 
  3.  अपने दोनों हाथों को उठाये तथा श्वास को लेते हुए ,हाथों को पैरों के अंगूठे से मिलाने का प्रयास करे। तथा कूल्हों के दुरी बनाने की भावना को महसूस करे। 
  4. हाथों को पैरों से मिलाते समय ,दोनों घुटने सीधे एवं तने हुए होने चाहिए।
  5.  हाथों से पैरों को ठीक तरह से पकडे ,और अपनी कमर को फैलाकर धड़ को  आगे की और ले जाए। 
  6. अब अपनी ठोड़ी को घुटनो से लगाए ,हाथों को पैरों से पकडे रहे तथा सिर को पैरों पर टिका दे। 
  7. श्वास को सामान्य स्थिति में लेते रहे और आरामदायक स्थिति का अनुभव करे। 
  8. इस मुद्रा में अपने शरीर को यथाशक्ति रोकने का प्रयत्न करे और श्वास को छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में आ जाये। 
  9. इस क्रिया को ५ से ६ बार करे। शुरुवात में २ से ३ हप्तों तक हाथों से पैरों की उंगलियां छूने का प्रयास करे ,फिर जब आप उँगलियों को पकड़ने में सक्षम हो तो अभ्यास को आगे बढाए। 
  10. Paschimottanasana Pose करते समय अपने ध्यान को कमर के पीछे के भाग पर केंद्रित करना चाहिए।








Amazing Health Benefits Of Paschimottanasana - पश्चिमोत्तानासन के लाभ

Amazing Health Benefits Of Paschimottanasana - पश्चिमोत्तानासन के लाभ
Paschimottanasana Benefits

  1. Paschimottanasana Pose मस्तिक्ष को ठंडा एवं शांत रखता है तथा अवसाद ,चिंता ,तनाव जैसे विकारों को दूर करता है। 
  2. इससे स्मरणशक्ति में वृद्धि तथा दिमाग तेज होता है। 
  3. यह आसन कंधे और मेरुदंड में खिचाव उत्पन्न करता है तथा रक्तसंचार सुचारु ढंग से कार्य करता है। 
  4. गर्भाशय ,गुर्दे ,यकृत तथा अंडाशय पर Paschimottanasana Steps का विशेष प्रभाव पड़ता है। 
  5. नियमितता के साथ अभ्यास करने से ये सभी अवयव सुचारु और बेहतर तरीके से अपना कार्य करते है।
  6.  इससे जठराग्नि प्रदीप्त होती है और पाचन संबंधी समस्याएं समाप्त हो जाती है। 
  7. मोटापे से ग्रसित व्यक्तियों को Paschimottanasana Yoga का अवश्य लाभ लेना चाहिए। इससे अनावश्यक चर्बी दूर होकर पेट कम होने में मदद मिलती है।
  8.  यह आसन उत्तेजना को शांत करने हेतु सक्षम है ,तथा गुप्तरोग ,स्वप्नदोष जैसे विकार इस आसन के नियमित अभ्यास से दूर हो जाते है। 
  9. योग में इस आसन का उल्लेख वीर्यवर्धक के रूप में आता है ,इसके अभ्यास से मन पर संयम रखना सरल हो जाता है ,यह वीर्य को बढ़ाकर उसे उर्ध्व बनाने में सहायक है। 
  10. रजोनिवृति जैसी महिलाओं की समस्याएं इस आसन के अभ्यास से समाप्त हो जाती है।
  11.  कम या उच्च रक्तचाप ,बाँझपन ,साइनसिटिस,अनिद्रा ,वीर्य विकारों में ये आसन चिकित्सकीय पद्धतिसे कार्य करता है। 
  12. यह कुंडलिनी को उर्ध्व बनाने में सहायक है ,इससे धारणा शक्ति को बल मिलता है। 
  13. यह मनुष्य के संयम ,वैराग्य ,हठ और एकाग्रता जैसे गुणों को उजागर करता है। 
  14. योग में उल्लेखित चित्तवृत्तिनिरोधः शब्द का पश्चिमोत्तानासन पूर्ण रूप से पालन करता है।
  15. ये सभी Benefits Of  Paschimottanasana है। जिसे आप नियमित अभ्यास से प्राप्त कर सकते है। 



  • Things To Know Before You Practicing Paschimottanasana Pose - ध्यान देने योग्य बातें




  1. पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास सुबह सूर्योदय के समय करना अच्छा होता है। 
  2. सुबह के समय आपका पेट खाली होता है ,जिससे आप आसानी से इस आसन का लाभ प्राप्त कर सकते है।
  3. पश्चिमोत्तानासन   का अभ्यास करने से पूर्व आपका पेट और आतें पूर्ण रूप से खाली होनी चाहिए। भोजन के बाद इस आसन का अभ्यास करने के लिए भोजन और अभ्यास में कम से कम ५ से ६ घंटे का अंतर रखना अनिवार्य है ,जिससे सरलता के साथ आप इस आसन का अभ्यास कर पाएंगे।


Precautions For Paschimottanasana - पश्चिमोत्तानासन में सावधानी 



  1.  पश्चिमोत्तानासन  को हठयोग में विशेष स्थान प्राप्त है, पर जिन्हे अस्थमा ,दस्त ,पीठ की चोट ,गर्दन की चोट जैसी समस्याएं है उन्हें इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  2.  इसीप्रकार जो महिलायें गर्भवती है उन्हें भी पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  3.  अगर आप शुरुवाती समय में इस आसन को कर रहे है तो किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करे। 
  4. कमर तथा मेरुदंड से पीड़ित व्यक्तियों को चिकित्सकीय (डॉक्टर) के परामर्श अनुसार इस आसन का अभ्यास करना चाहिए।






आपने इस लेख में "Paschimottanasana In Hindi" के बारे में जाना ,पश्चिमोत्तानासन बहुत ही लाभदायी आसन है ,इसे अपने जीवन में शामिल करना आपकी लिए एक अच्छा निर्णय साबित हो सकता है ,खासकर अगर आप युवावस्था में है।





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