Virasana In Hindi Complete Guide

Virasana In Hindi Complete Guide योग में वर्णित वीरासन एक साहसी मुद्रा है। वीरासन का अभ्यास व्यक्ति की साहसी प्रवृत्ति को दर्शाता है।हठयोग में वीरासन का विशेष महत्व है। संस्कृत शब्द वीरासन दो शब्दों से मिलकर बना है , वीर + आसन। संस्कृत में साहसी तथा पराक्रमी व्यक्तित्व को वीर शब्द से संबोधित किया जाता है। तथा एक ही स्थिति में बने रहने की अवस्था आसन कहलाती है। वीर को आप नायक शब्द से भी प्रतिभाषित कर सकते है। नायक जो दुनियां के लिए झगड़ता है तथा अपने अस्तित्व की लड़ाई लढ़ता है। वो तब तक शांत नहीं बैठता जब तक वो अपने शत्रु पर विजय ना प्राप्त कर ले। परंतु एक योगी नायक अपने भीतर की अशांति एवं विकारों को दूर करने में लगा रहता है। यही Virasana In Hindi का उद्देश्य है ,की आप अपने भीतर की अशांति एवं विकारों पर विजय प्राप्त कर सच्चे अर्थ में वीर बने।

Virasana In Hindi - वीरासन योग 

Virasana In Hindi - वीरासन योग
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  • Virasana Steps 

  1. Virasana Yoga शांत और स्वच्छ स्थान पर करना स्वास्थ के लिए उपयुक्त रहता है। सबसे पहले  जमीन पर चटाई बिछाकर अपने घुटनो के बल बैठ जाएँ। 
  2. अब अपने घुटनो को एक दूसरे के पास लाये जिससे आपके पैरों के बिच का अंतर् स्वचलित रूप से बढ़ जाएगा।  
  3. ध्यान रखे की यह अंतर आपकी कूल्हों की चौड़ाई से थोड़ा बड़ा हो ,तथा जब आप जमीन पर बैठे तो आपके घुटनों से लेकर पैरों की उँगलियों तक का भाग  जमीन से सटा होना चाहिए।
  4.  अपने पैरों को , निचे फर्श पर दबाये और अपने कूल्हों को कम करे। 
  5. आप देखेंगे की आपके कूल्हे फर्श पर टिके हुए है तथा आपके पैर ,कूल्हों को किनारे से स्पर्श कर रही है।
  6.  जब आप कूल्हों को फर्श पर टिकाते है तो इस बात पर विशेष ध्यान दे की निचे बैठते समय घुटनों में तीव्र घुमाव या संवेदना न होने पाए।
  7.  अगर ऐसा हो तो Virasana Steps को रोक दे और आसन से बचे। 
  8. अब अपने दोनों हथेलियों को अपने घुटनों पर रखे और अपना ध्यान नाभि पर केंद्रित करने का प्रयास करे। 
  9.  इस अवस्था में कम से कम ३० से ६० सेकंड तक बने रहे ,नियमित अभ्यास के द्वारा समय अवधि को बढ़ाकर २ से ३ मिनट तक ले जाए। 
  10.  नियमित अभ्यास द्वारा जब आप इस आसन में महारथ हासिल कर लेंगे तो आप इस आसन का प्रयोग ध्यान करते समय भी कर सकते है। .
  11. इस आसन से पहले बालासन का अभ्यास करना उपयुक्त होता है। { पढ़े - बालासन योग }





  • टिप्स | Tips For Beginners




  1. शुरुवाती समय में जब आप Virasana Steps पहली बार करते है तो कूल्हों को फर्श पर टिकाते समय कठिनाई होती है।
  2.  इसलिए पहली बार Virasana Yoga करते समय अपने घुटनों के निचे कोई  नरम मुलायम कपडा या कंबल का प्रयोग करे।
  3.  और निचे बैठते समय अपने कूल्हों के निचे लकड़ी का क्यूब इस्तेमाल करे ,जिससे आप उस क्यूब पर बैठ पाएं और सरलता से आसन को कर पाएं।
  4.  जब आप  Virasana में पारंगत हो जाए तो क्यूब को निकालकर आसन को सिद्ध करने का प्रयास करे।





 Amazing Health Benefits Of Virasana Yoga - वीरासन के लाभ

Amazing Health Benefits Of Virasana Yoga - वीरासन के लाभ
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  1. अपनी शारीरिक रचना एवं कंधे ,पैर,जाँघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए Virasana Yoga उपयुक्त आसन है।
  2.  यह घुटने ,जांघ तथा पैरों में एक अच्छा खिचाव देता है और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक है। 
  3. Virasana Steps पैरों में रक्तसंचालन कार्यों में सुधार करता है ,जिससे पैर तनावमुक्त अनुभव करते है। 
  4. यह जठराग्नि को प्रदीप्त कर भूक को बढ़ाता है साथ ही मंदाग्नि ,एसिडिटी ,अन्न न पचना ,गैस ,कब्ज जैसी पेट की समस्याओं को समाप्त कर देता है। 
  5. इससे पाचनप्रणाली सुचारु ढंग से कार्य करने लगती है ,जिससे भूक खुलकर लगती है ,यह धीरे धीरे अतिरिक्त चर्बी को दूर करता है, तथा मोटापे को घटाने में सहायक है।
  6.  यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाकर ,दमा ,अस्थमा,जैसे श्वसन विकारों को ठीक करता है। 
  7. इसका नियमित अभ्यास दिमाग शांत एवं तनावमुक्त रखता है, उच्च रक्तचाप को ठीक करने में सहायक है।
  8.  नित्य Virasana Pose का अभ्यास पेट के कीड़े नष्ट कर देता है। 
  9. यह रजोनिवृति संबंधित समस्याओं को खत्म करने में सक्षम आसन है।
  10.  शरीर में स्थित चक्रों में से मूलाधार ,स्वाधिस्ठान एवं मणिपुर चक्र पर ये अपना विशेष प्रभाव डालता है ,कुंडलिनी जागरण में यह  आसन विशेष सहायक है।
  11.  यह धारणा को बल देता है ,तथा दृढ़ता ,सहनशीलता ,धैर्य ,तेज जैसे गुणों को उजागर करता है।
  12. ये सभी Benefits Of Virasana है। जो आपको वीरासन के नियमित अभ्यास से प्राप्त होते है।  





  • Things To Know Before You Do Virasana Pose - ध्यान रखने योग्य बातें

  1.  अगर आप केवल Virasana Steps करते है ,तो यह बात आवश्यक नहीं की आपका पेट खाली हो। 
  2. परंतु अगर आप वीरासन का अभ्यास अन्य योगासनों के साथ करते है ,तो यह निश्चित करे की आपका पेट और आतें खाली एवं साफ़ हो।
  3.  भोजन उपरांत ५ से ६ घंटे बाद आप Virasana Yoga  कर सकते है। 
  4. सुबह सूर्योदय का समय वीरासन के अभ्यास के लिए अच्छा माना जाता है ,पर अगर आप किसी कारण सुबह इसका अभ्यास ना कर पाए तो शाम के समय भी आप इसका अभ्यास कर सकते है।



Precautions For Virasana Yoga - वीरासन में सावधानी 


  1. ह्रदय संबंधित समस्या या पीड़ित होनेपर वीरासन का अभ्यास ना करे। 
  2. तीव्र सिरदर्द से पीड़ित होनेपर भी Virasana Steps करने से बचना चाहिए। 
  3. पैर एवं घुटने की चोट होनेपर इस आसन का अभ्यास ना करे।
  4.  पहली बार किसी योग्य गुरु के सानिध्य में ही Virasana Yoga करना चाहिए। 
  5. जब आप इस आसन का अभ्यास करते है तो अपने पैरों पर जबरदस्ती दबाव ना डालें।

  • वीरासन के अभ्यास के बाद इन आसनों का अभ्यास करे। 

  1. बकासन 
  2. पद्मासन

इसतरह आप वीरासन का अभ्यास कर ,अपने अंदर साहसी भाव को जागृत कर सकते है । आशा करता हूँ ,की आपको  "Virasana In Hindi" के बारे में पर्याप्त जानकारी मिल गयी होगी।

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