Matsyasana In Hindi Complete Guide

Matsyasana In Hindi Complete Guide योग में वर्णित मत्स्यासन को मछली से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। मत्स्यासन दो शब्दों का मेल है ,मत्स्य + आसन. संस्कृत भाषा में मछली को मत्स्य कहा जाता है ,और स्थिर बने रहने की स्थिति आसन कहलाती है। मत्स्यासन को इंग्लिश में फिश पोज के नाम से जाना जाता है। दरअसल हिंदू पुराणों के अनुसार जब सतयुग अपने विनाश की चरम सीमा पर था , तब पालनकर्ता विष्णु ने विभिन्न कलाओं का ज्ञान सुरक्षित रखने के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था। और जब एक तरफ धरती जलमग्न हो रही थी ,वही दूसरी तरफ धरती और समुद्र के बिच संतुलन स्थापित कर मत्स्य अवतार श्रीविष्णु ने ऋषियों के प्राणों को बचाकर दिव्य ज्ञान की रक्षा की थी। इसीतरह मत्स्यासन का अभ्यास भी शरीर की संतुलन शक्ति को बढाकर ,शरीर को लचीला बनाने में मदद करता है। जब कोई योगी मत्स्यासन को सिद्ध कर लेता है तो वो पानी में भी बिना हाथ पाँव हिलाये तैरने लगता है। इस लेख में Matsyasana In Hindi की विस्तारित जानकारी देने जा रहे है,जो आपको बीमारियों को दूर रखने के साथ-साथ स्वस्थ और आनंदी जीवन जीने के लिए भी लाभदायी रहेगी।


Matsyasana In Hindi - मत्स्यासन योग 

Matsyasana In Hindi - मत्स्यासन योग


  • Matsyasana Steps


  1. Matsyasana Practice करने के लिए किसी स्वच्छ और खुली जगह आसन बिछाकर पीठ के बल लेट जाए। 
  2. इस स्थिति में अपने पैर जुड़े हुए तथा अपने दोनों हाथों को अपनी बगल में रखे। .
  3. अपने  दोनों हाथों को अपने कूल्हों के निचे रखे ,और अपनी दोनों कोहनियों को एक दूसरे के समीप लाकर अपने कमर के पास रखे। 
  4. अब धीरेसे अपने दोनों पैरों को मोड़कर तलवों को एक दूसरे की जांघ पर रखकर पद्मासन की मुद्रा बनाये। {जाने -पद्मासन विधि और लाभ
  5. जब आप ऐसा करे, तो अपनी दोनों जाँघों को जमीन से सटाकर रखे। 
  6. एक लंबी श्वास लेते हुए कमर को कमान दे ,और छाती को ऊपर उठाये। 
  7. इसके साथ ही अपने सिर के उस भाग को, जहाँपर शिखा होती है ,जमीन पर टिकाये। 
  8. यहापर इस बात पर ध्यान देना चाहिए की शरीर का वजन केवल सिर पर ना हो ,बल्कि दोनों कोहनियों पर हो। 
  9. जबतक आप इस आसन में रुक सकते है ,तबतक श्वासों को सामान्य रूप से लेते हुए, इसी अवस्था में बने रहने का प्रयास करे। 
  10. श्वास को बाहर छोड़ते हुए सिर को उठाकर सामान्य अवस्था में आ जाए। 
  11. Matsyasana Pose आप ३० से ६० सेकंड तक कर सकते है। इसका एकबार अभ्यास करना ही शरीर के लिए पर्याप्त होता है।






Amazing Health Benefits Of Matsyasana Yoga - मत्स्यासन के लाभ 



  1. शरीर को लचीला एवं हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए Matsyasana एक अच्छा आसन है। 
  2. Matsyasana Steps का नियमित अभ्यास शरीर में पाए जाने वाले पोषक तत्वों को अवशोषित करने में सहायता प्रदान करता है। 
  3. यह छाती को मजबूत और चौड़ा बनाकर ,फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। 
  4. Matsyasana Pose के अभ्यास से साधक प्राकृतिक रूप से श्वास लेता है ,जिससे अनेक श्वासनविकार दूर हो जाते है। 
  5. यह दमा ,अस्थमा ,खांसी ,नजला ,जुकाम जैसी भयानक बीमारियों को शरीर से दूर रखता है।  
  6. Matsyasana Yoga विशेषकर  शरीर में स्थित पीनियल पिट्यूटरी ग्रंथि को प्रभावित करता है। जिसके कारण ये हार्मोन्स को संतुलित बनाये रखने में मदद करता है और साधक थॉयरॉइड जैसी गंभीर बीमारियों पर विजय प्राप्त कर लेता है। 
  7. पीठ में उत्पन्न होनेवाले तनाव एवं पीड़ा को Matsyasana Practice से ठीक किया जा सकता है। 
  8. रोजाना   Matsyasana Yoga का अभ्यास हाथ ,कंधे ,पैर और गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करता है ,तथा उन्हें फैलाने में मदद करता है। 
  9. इससे जठराग्नि तीव्र होती है ,साथ ही ये भूक को बढ़ाकर पाचन शक्ति को बढाता है। 
  10. यह कब्ज ,श्वसन रोग ,थकान ,मानसिक तनाव में राहत देता है। 
  11. मोटापे से पीड़ित व्यक्तियों को Matsyasana को अपनी जीवन शैली में जरूर शामिल करना चाहिए। 
  12. इससे अतिरिक्त चर्बी दूर होकर वजन आसानी से कम किया जा सकता है। 
  13. नियमित  ८ से १० दिन तक अगर आप Matsyasana Practice करते है ,तो आप अपनी शारीरिक मुद्रा में सकारात्मक बदलावों का अनुभव कर सकते है। 
  14. मासिक धर्म से संबंधित समस्याओं को भी Matsyasana के नियमित अभ्यास से दूर किया जा सकता  है।
  15. यह आसन शरीर में स्थित षट्चक्रों में से मणिपुर ,स्वाधिस्ठान ,अनाहत और विशुद्ध चक्र को प्रभावित करता है। तथा कुंडलिनी को उर्ध्व बनाता है। 
  16. ये सभी Benefits Of Matsyasana है। जो Matsyasana Yoga के नियमित अभ्यास से आप प्राप्त कर सकते है। 







  • Things To Know Before Practicing Matsyasana Pose - ध्यान रखने योग्य बातें   



  1. Matsyasana Steps  आप सुबह और शाम दोनों समय कर सकते है। 
  2. बाकी योगासनों की तरह ही  Matsyasana Practice करते समय आपका पेट खाली होना आवश्यक है। 
  3. जब आप इसका अभ्यास खाली पेट करते है, तो ये आपके पेट को स्वस्थ बनाने के साथ साथ भोजन को पचाने में भी मदद करता है। 
  4. सुबह सूर्योदय के समय अपने दैनिक योगासनों के साथ Matsyasana Yoga करना सकारात्मक परिणाम लेकर आता  है।







  • Precautions For Matsyasana Pose - मत्स्यासन योग में सावधानी 



  1. जब आप Matsyasana Practice करते है तो किसी भी परिस्थिति में शरीर पर अत्यधिक दबाव या जोर ना डाले। 
  2. शुरुवाती  समय में Matsyasana Steps करने से पूर्व कंधों से संबंधित आसनों का अभ्यास करे ,जिससे आप अधिक निपुणता और सक्रियता के साथ Matsyasana कर पाए। .
  3. अगर आप उच्च या निम्न रक्तचाप की समस्या से पीड़ित है ,तो आप Matsyasana Pose ना ही करे तो अच्छा होगा।





  • Tips For Beginners - टिप्स 


  1. शुरुवाती समय में Matsyasana Steps करते समय गर्दन में तनाव महसूस हो सकता है ,इस समस्या से बचने के लिए आप अभ्यास करते समय अपनी छाती को ज्यादा ऊपर ना उठाये। 
  2. तथा शुरुवाती काल में अपने सर के निचे कोई मुलायम कपड़ा या कंबल रखे। जब आप आसन में आरामदायक स्थिति का अनुभव करे तो कंबल निकालकर Matsyasana Pose का अभ्यास करे। 
  3. Matsyasana Yoga को दो विधियों द्वारा किया जाता है, एक जो ऊपर दी है। और दूसरी विधि जो खासकर उन लोगों के लिए लाभदायक है जो पद्मासन नहीं कर सकते। 
  4. इस विधि में पैरों को बिना मोड़े बिल्कुल सीधा रखकर आप Matsyasana Practice कर सकते है।





  • मत्स्यासन से पहले इन आसनों का अभ्यास करे 


  1. धनुरासन
  2. भुजंगासन
  3. वीरासन



  • मत्स्यासन के बाद आप इन योगासनों का अभ्यास कर सकते है 



  1. सेतुबंधासन
  2. उष्ट्रासन
  3. वीरासन
  4. गोमुखासन


इस लेख में आपने "Matsyasana In Hindi" के बारे पढ़ा। मत्स्यासन योगियों का सबसे प्रिय आसन है। इसे अपने दैनिक जीवन में अपनाना सही अर्थ में जिंदगी जीने की शुरुवात करना है।



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