15 Easy Yoga Asanas For Beginners: Poses To Try If You Are New To Yoga

15 Easy Yoga Asanas For Beginners योग हमारे जीवन में कई सारे अनुभव लेकर आता है।  नियमित योगासनों के अभ्यास से हमारा शरीर एवं दिमाग स्वस्थ रहता है।  और हमें मानसिक शांति का अनुभव होने लगता है। नियमित योगाभ्यास कर व्यक्ति स्वस्थ और आनंदी जीवन व्यतीत कर सकता है। नियमित योगासनों का अभ्यास करने वाले लोगों को ये सरल बात लगती है । पर जो नए अभ्यासक अपने जीवन में योग को अपनाना चाहते है ,उन्हें शुरुवाती समय थोड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है । ऐसे में सरल योगासनों के साथ योग की शुरुवात करना एक अच्छा निर्णय साबित होता है। फिर जैसे जैसे आप इन योगासनों में पारंगत होते जाएंगे ,वैसे आपका शरीर लचीला एवं उन्नत योगासनों का अभ्यास करने हेतु सक्षम होता जाएगा । आज हम आपको 15 Easy Yoga Asanas For Beginners के बारे में बताने जा रहे है ,जिसका अभ्यास कर आप सहजता से योग की शुरुवात कर सकते है।




15 Easy Yoga Asanas For Beginners - शुरुआत के लिए 15 आसान योग आसन

15 Easy Yoga Asanas For Beginners - शुरुआत के लिए 15 आसान योग आसन






  1. योग की शुरुवात  करने के लिए पश्चिमोत्तानासन एक अच्छा और सरल आसन है। 
  2. सामान्यतः शुरू-शुरू में इस आसन में हाथों को पैरों से मिलाने में थोड़ी कठिनाई जरूर होती है।
  3.  पर अगर आप इसका नियमित अभ्यास करते है तो ये आपके लिए एक लाभदायक आसन साबित होगा। 
  4. इस आसन का अभ्यास पैरों की मांसपेशियों में खिचाव उत्पन्न करता है। 
  5. तनाव दूर कर मस्तिक्ष को शांत रखने में पश्चिमोत्तानासन उपयुक्त आसन है। 
  6. गुप्तरोग तथा वीर्यविकार को इस आसन का नियमित अभ्यास करने से दूर होते है, तथा ब्रम्हचर्य को बनाये रखने में मदद करता है। 
  7. विद्यार्थियों को इस आसन का नियमित अभ्यास करना चाहिए।




पश्चिमोत्तानासन योग





  • कैसे करे  -  
  1. पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर चटाई बिछाकर शांति से बैठ जाए। 
  2. पैरों  को आगे की और फैलाये, और दोनों पैर तथा कमर को सीधी रखे। 
  3. एक लंबी श्वास भरे और श्वास छोड़ते हुए आगे की और झुके। 
  4. अपने दोनों हाथों से पैरों की  उँगलियों को पकडे और सिर को घुटनों से लगाने का प्रयत्न करे। 
  5. जब आप आगे की और झुकते है तो इस बात पर ध्यान दे की घुटने जमीन से सटे हो तथा आगे की और झुकते समय ऊपर ना उठ पाए। { आप पढ़ सकते है - पश्चिमोत्तानासन }












  1. वज्रासन का अभ्यास शरीर को वज्र की तरह कठोर बनाता है।  
  2. नियमित वज्रासन का अभ्यास चयापचय संस्था को प्रभावित कर पाचन क्षमता को बढ़ाता है। 
  3. शुरुवात में वज्रासन को किसी मुलायम कंबल या गद्दे पर करना चाहिए ,जिससे तलवों को नुकसान ना हो। और पारंगत हो जाने पर चटाई पर इसका अभ्यास करे। 
  4. इस आसन का अभ्यास आप बिना किसी योग प्रशिक्षक के घरपर सहज रूप से कर सकते है।





वज्रासन



  • कैसे करे 


  1. वज्रासन का अभ्यास करने के लिए घुटनो को जमीन पर टिकाये। 
  2. पैरों के तलवों को जमीन से सटाकर रखे और धीरे से टखनों पर बैठ जाए। 
  3. दोनों हाथों को जाँघों पर आराम करने दे, और मेरुदंड को तानकर रखे।
  4.  इसे करते समय केवल इस बात का ध्यान रखना होता है ,की जब आप निचे बैठे तो शरीर का संपूर्ण भार दोनों तलवों पर समान रूप से पड़े। { आप पढ़ सकते है - वज्रासन }













  1. वृक्षासन के नियमित अभ्यास से शरीर में स्थिरता एवं मानसिक शांति बनी रहती है। 
  2. इस आसन की सरलता को देख आप बिना किसी मार्गदर्शन में इसका अभ्यास कर सकते है। 
  3. शुरुवाती स्थिति में दीवार का सहारा लेकर संतुलन बनाने की कोशिश करे, और पारंगत हो जाने पर बिना किसी सहारे के वृक्षासन का अभ्यास करे।



वृक्षासन



  • कैसे करे  


  1. वृक्षासन का अभ्यास करने के लिए ताड़ासन में (सीधे) खड़े हो जाए। 
  2. अपने दाहिने पैर के तलवे को ऊपर उठाकर अपनी बायीं जांघ पर रखे या घुटने के थोड़ा निचे रखे। 
  3. अपने दोनो हाथों को ऊपर ले जाकर नमस्कार की मुद्रा में जोड़ दे। 
  4. और अपने ध्यान को किसी बिंदु पर लगाने का प्रयास करे। 
  5. २ मिनट बाद इसी क्रिया को दूसरे पैर के साथ करे । 
  6. इस आसन को करते समय केवल इस बात का ध्यान रखे की पैर को सीधे घुटने पर ना रखे। 
  7. आप इसे घुटने के निचे या घुटने के ऊपर जांघ पर रख सकते है। { आप पढ़ सकते है - वृक्षासन }













  1.  कमर को लचकदार बनाने के साथ ही त्रिकोणासन का अभ्यास आपके शरीर में स्थित अनावश्यक चर्बी को दूर कर वजन घटाने में सहायता करता है। 
  2. अपने दैनिक योगसत्र में आप इस आसन का अभ्यास घर पर, सरलता से कर सकते है।

त्रिकोणासन




  • कैसे करे 


  1. त्रिकोणासन का अभ्यास करने के लिए पैरों में ३ से ४ फिट की दुरी बनाकर खड़े हो जाए। 
  2. अपने दाहिने पैर को सीधा ९० डिग्री के कोण में रखे। 
  3. और दाहिने पैर की एड़ी के ठीक समांतर रेखा में बाएं पैर को रखे। 
  4. अपने बाएं पैर को, अपनी बायीं और घुमाये और १५ डिग्री के कोण में रखे। 
  5. अब कमर से दायी और निचे झुकते हुए अपना बायां हाथ ऊपर उठाये ,तथा दाएं हाथ को दाए पैर पर रखे। { अधिक जानकारी के लिए पढ़े - त्रिकोणासन }  














  1. भुजंगासन का अभ्यास आपकी पीठ कमर तथा छाती को प्रभावित करता है। 
  2. इसके अभ्यास से छाती मजबूत और चौड़ी होती है ।
  3. दमा ,अस्थमा,तथा अन्य श्वासनविकारों को दूर कर फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। 
  4. योग की शुरुवात करने के लिए योगासनों की सूचि में आप भुजंगासन को शामिल कर सकते है।

भुजंगासन





  • कैसे करे -


  1.  भुजंगासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाए। 
  2. दोनों पैरों को एकसाथ जोड़कर सीधा रखे। 
  3. दोनों हथेलियों को बगल में छाती की समांतर रेखा में जमीन पर टिकाये। 
  4. अपने शरीर के नाभि तक के भाग को ऊपर उठाये।  
  5. कुछ देर इसी अवस्था में रुके रहे और वापस सामान्य स्थिति में आ जाए।
  6. { आप पढ़ सकते है - भुजंगासन }







  1. बकासन का अभ्यास शरीर को संतुलन शक्ति प्रदान करता है। 
  2. साथ ही इसके अभ्यास से आँखों  की रौशनी बढ़ती है ,और आँखें निरोगी बनी रहती है। 
  3. बालों का झड़ना या असमय सफ़ेद हो जाना जैसी  समस्याएं दूर करता है। 
  4. नियमितता और एकाग्रता के साथ इसका अभ्यास करने पर कुछ समय में ही आप बकासन में महारथ हासिल कर सकते है।
  5.  इस आसन को करते समय एक सावधानी अवश्य रखनी चाहिए की पहली बार इसका अभ्यास किसी मुलायम कंबल पर करे ,जिससे शरीर असंतुलन होनेपर चोट ना लग सके ।



बकासन






  • कैसे करे - 


  1. बकासन का अभ्यास करने के लिए दोनों हाथों को जमीन पर टिकाएं । 
  2. अपने दोनों घुटनों को कोहनियों के ऊपर रखे और शरीर का वजन दोनों हथेलियों पर संतुलित करने का प्रयत्न करे। 
  3. जब आप ऐसा करते है तो दोनों पैरों को जोड़कर रखे इससे संतुलन बनाने में आसानी होती है।{ आप पढ़ सकते है - बकासन }










  1. दिनभर की थकावट तथा तनाव एवं अवसाद को दूर कर ,शरीर और आत्मा में नई ताजगी लाने के लिए बालासन एक उपयुक्त आसन है। 
  2. शरीर और दिमाग को विश्राम देने के लिए मुख्यतः बालासन का अभ्यास किया जाता है।
  3.  इस आसन का अभ्यास व्यक्ति की समर्पित भावना को उजागर करता है। 
  4. शुरुवाती अभ्यासक इस आसन को सरलता के साथ कर सकते है।




बालासन





  • कैसे करे 


  1. बालासन का अभ्यास करने के लिए वज्रासन की स्थिति में बैठ जाए। 
  2. श्वास को बाहर छोड़ते हुए हाथों को ऊपर उठाये और आगे की और झुककर हाथों को जमीन पर टिका दे। 
  3. शरीर को हल्का महसूस करे। 
  4. कुछ देर इसी अवस्था में रुके और फिर अपनी सामान्य स्थिति में आ जाए। 
  5. { आप पढ़ सकते है - बालासन }






  1.  मलासन के अभ्यास से पाचनसंस्था विशेष रूप से प्रभावित होती है। 
  2. ये पेट में जमी हुई सड़ी गलि मल को बाहर निकालने में सहायक है। 
  3. पेट निष्कासन कर शरीर को नई ऊर्जा प्रदान करता है। 
  4. तथा अनेक घातक बीमारियों से शरीर की रक्षा करता है। 
  5. नए योगसाधक इसे आसानी से कर सकते है। 

मलासन





  • कैसे करें 


  1.  मलासन का अभ्यास करने के लिए दोनों पैरों में थोड़ी दुरी बना कर श्वास को बाहर छोड़ते हुए निचे बैठ जाए। 
  2. दोनों हाथों को घुटनों के बिच लाकर नमस्कार की मुद्रा बनाये। 
  3. जब आप ऐसा करते है तो अपनी कोहनियों से जाँघों को फ़ैलाने की कोशिश करे। 
  4. इस आसन को ३ से ४ बार करे। { आप पढ़ सकते है - मलासन }







  1.  मत्स्यासन का अभ्यास समस्त श्वासनविकारों को दूर कर मानसिक एवं शारीरिक स्वस्थता प्रदान करता है।
  2. इसके अभ्यास से पीनियल पिट्यूटरी ग्रंथि सुचारु ढंग से कार्य करने लगती है। 
  3. इस आसन को दो तरीकों से किया जाता है ,एक पद्मासन की स्थिति में और दूसरा पद्मासन के बिना। 
  4. अगर आप पद्मासन लगा सकते है तो अच्छी बात है ,नहीं तो आप इसे पद्मासन के बिना भी अच्छे ढंग से कर सकते है।


 मत्यासन






  • कैसे करे 


  1.  मत्स्यासन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर पीठ के बल लेट जाए। 
  2. हाथों को बगल में रखे। 
  3. अपनी पीठ को कमान देकर थोड़ा ऊपर उठाये और गर्दन को ऊपर उठाते हुए शिखा स्थान को जमीन पर टिका दे। 
  4. इस स्थिति में श्वास को सामान्य रूप से चलने दे। 
  5. आप अपने हाथो को जाँघों पर रख सकते है , या सिर के ऊपर नमस्कार मुद्रा में जोड़ सकते है।
  6. { आप पढ़ सकते है - मत्स्यासन }





  1. गोमुखासन का अभ्यास मांसपेशियों को मजबूत बनाकर शरीर के आंतरिक अंगों को पुष्ट करता है। 
  2. मधुमेह ,दमा ,अस्थमा से पीड़ित व्यक्तियों के लिए ये आसन किसी चिकित्सा से कम नहीं। 
  3. योग की शुरुवात करने के लिए आप बिना किसी उलझन के गोमुखासन को अपना सकते है।

गोमुखासन





  • कैसे करे 


  1.  गोमुखासन का अभ्यास करने के लिए अपने बाएं पैर को घुटने से मोड़ कर अपने दाएं हिप्स (नितंब) के निचे रखे।
  2. अपने दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर अपने बाएं पैर पर रखे। 
  3. पैर ऊपर रखते समय दोनों घुटनो को एक के ऊपर एक रखा जाना चाहिए। 
  4. दाहिने हाथ को कंधे के ऊपर से ले जाएँ  ,तथा बाएं हाथ को पीछे ले जाकर दोनों हाथों को मिलाये।
  5.  कुछ देर रुकने के बाद इसी क्रिया को अपने दूसरे पैर के साथ भी करे।{ आप पढ़ सकते है - गोमुखासन }  





  1. मार्जारी आसन के नित्य अभ्यास से मेरुदंड संबंधित बीमारियां दूर रहती है। 
  2. ये आसन शरीर में चुस्ती और स्फूर्ति का संचार कर व्यक्ति को उत्साहित एवं ताजगी का अनुभव कराता है। 
  3. सरलता के कारण हर कोई इसे कर इसके लाभों को प्राप्त कर सकता है।

मार्जारी आसन



  • कैसे करे 
  1. मार्जारी आसन के लिए सर्वप्रथम घुटनों के बल बैठ जाए। 
  2. दोनों हाथों को जमीन पर टिकाये ,जिससे आपके शरीर का आकर किसी टेबल की तरह दिखने लगे। 
  3. कमर को निचे की तरफ मोड़कर कूल्हों को ऊपर उठाये। और लंबा श्वास लेते हुए सर को ऊपर ले जाए । 
  4. इस स्थिति में कुछ देर रुकने के बाद सर को निचे ले आये ,और ठोड़ी को छाती से छूने दे। 
  5. पूर्ण शरीर को तनावरहित करने की कोशिश करे ,और वापस सामान्य स्थिति में आ जाए। मार्जारी आसन की संपूर्ण विधि जाने = मार्जारी आसन  






  1. सेतु बंधासन एक शक्तिशाली मुद्रा है। 
  2. ये शरीर की स्थिरता को बढ़ाकर शरीर में रक्तसंचार को संतुलित करती है। 
  3. ये मेरुदंड को लचीला और शक्तिशाली बनाती है। 
  4. हर व्यक्ति जो किसी भी कमर की समस्या से ग्रसित ना हो ,सेतु बंधासन का अभ्यास कर सकता है।

सेतु बंधासन





  • कैसे करे 


  1. सेतु बंधासन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर पीठ के बल लेट जाए। 
  2. पैरों को घुटनों से मोड़कर जाँघों के पास लाये ,और तलवों को जमीन पर सटा कर रखे। 
  3. हाथों को अपनी बगल में रखे। श्वास को अंदर लेते हुए पैरों पर दबाव डाले। और शरीर का निचला ,मध्य तथा ऊपर का भाग ऊपर उठाये। 
  4. जब आप ऐसा करते है ठोड़ी को छाती से छूने दे।
  5.  संतुलन के लिए अपने दोनों हाथों को पीठ के निचे मिलाकर रखे। जिससे पैरों पर अधिक दबाव नहीं पड़ेगा। 
  6. श्वास को सामान्य गति से लेते रहे। कुछ देर इसी अवस्था में बने रहे ,और पुनः सामान्य अवस्था में आ जाए। { आप पढ़ सकते है - सेतु बंधासन }













  1.  योग की शुरुवात करने के लिए अधो मुख श्वानासन एक बेहतरीन आसन है।
  2.  ये नाभिचक्र को प्रभावित कर पाचनसंस्था को पुष्ट बनाता  है। 
  3. कब्ज ,भूक न लगना ,मल निष्कासन में परेशानी ,वातरोग ,गैस इत्यादि रोगों में विशेष लाभदायी है।




अधो मुख श्वानासन





  • कैसे करे 


  1. अधोमुख श्वानासन का अभ्यास करने के लिए घुटनों के बल बैठ जाए। 
  2. दोनों हाथों को जमीन पर टिकाये और पैरों को पीछे ले जाकर शरीर को संतुलित करे। 
  3. इस अवस्था में आपका शरीर किसी टेबल की तरह दिखाई दे ने लगेगा। 
  4. हाथों को स्थिर रखते हुए कमर को ऊपर उठाये और सर को अंदर की और ले जाकर नाभि को देखने का प्रयत्न करे। 
  5. कुछ देर इसी अवस्था में बने रहे और वापस सामान्य अवस्था में आ जाए।{ पढ़े - अधो मुख श्वानासन }






  1.  वीरभद्रासन १  का अभ्यास शरीर में लचक ,साहस एवं उत्साह का जागरण करता है। 
  2. इसके अनगिनत लाभ और सरलता को देख कर इसे करनेवाला व्यक्ति हमेशा ऊर्जा तथा शक्ति का अनुभव करता है।

वीरभद्रासन १





  • कैसे करे 
  1.  पैरों में ३ से ४ फिट की दुरी बनाकर सीधे खड़े हो जाए।
  2. दोनों हाथों को ऊपर ले जाकर नमस्कार की मुद्रा बनाये। 
  3. दाहिने पैर को दाहिनी और मोड़े और ९० डिग्री का कोण बनाये तथा बाए पैर से १५ डिग्री का कोण बनाये। 
  4. पीठ को कमान दे और छाती को विस्तारित करे। 
  5. अपनी दृष्टी को ऊपर की और बनाकर रखे। 
  6. इसी क्रिया को अपने दूसरे पैर के साथ भी करे। {आप पढ़ सकते है - वीरभद्रासन १ }









  1. शवासन एक संपूर्ण आराम दायक आसन है।
  2.  इसका अभ्यास शरीर एवं दिमाग को तनावरहित कर शांति का अनुभव करता है। 
  3. दैनिक योगासनों के बाद शवासन का अभ्यास करना उत्तम माना जाता है। 
  4. दिनभर की थकावट के बाद शवासन का अभ्यास कर आप नई ताजगी का अनुभव कर सकते है।



शवासन





  • कैसे करे 
  1. शवासन के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाए। 
  2. हाथों को बगल में विश्राम करने दे। पैरों में उचित दुरी बनाकर ढीला छोड़ दे। 
  3. आँखों को बंद करे ,जब आप इस आसन का अभ्यास करते है तो अभ्यास करते समय दिमाग को पूरी तरह रिलैक्स कर दे। 
  4. इसी अवस्था में शरीर को बिना हिलाये ,दीर्घ श्वास लेते रहे और मन ही मन शरीर के प्रत्येक अंग को देखते जाए। 
  5. जिस अंग पर तनाव की अनुभूति हो उसे रिलैक्स करते जाए। 
  6. अभ्यास के दौरान अगर नींद आने लगे तो लंबी श्वास भरते जाए। 
  7. लगभग १० से १५ मिनट के बाद ,बिना आँखों को खोले बैठ जाए और शांति का अनुभव करे।
  8. { आप पढ़ सकते है - शवासन }   




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