Kukkutasana योग क्या है ? और इसके स्वास्थ लाभ क्या हैं?

Kukkutasana योग में वर्णित एक जटिल योगमुद्रा है। संस्कृत भाषा में मुर्गे को कुक्कुट कहा जाता है। इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर की रचना किसी मुर्गे की तरह दिखाई देने लगती है। इसलिए इसे कुक्कुटासन के नाम से जाना जाता है। यह एक प्राचीन और जटिल योगासनों में से एक आसन है। जिसका वर्णन योग के प्राचीन ग्रंथ हठयोग प्रदीपिका और घेरण्ड संहिता में देखने को मिलता है। Kukkutasana का अभ्यास करने के लिए हाथों का मजबूत होना आवश्यक है।


Kukkutasana - कुक्कुटासन योग 

Kukkutasana - कुक्कुटासन योग



  • How To Do Kukkutasana - कैसे करे ?


  1.  कुक्कुटासन का अभ्यास करने के लिए पद्मासन की स्थिति में बैठ जाए। 
  2. अब अपनी जांघ और बछड़े के बिच दोनों हाथों को अंदर डाले। 
  3. अगर हाथों को फ़साना मुश्किल लग रहा हो ,तो आप उस स्थान पर तेल लगा सकते है।  
  4. जब आप ऐसा करे तो दोनों हाथों को जमीन पर टिकाये और उँगलियों को फैलाये। 
  5. जितना संभव हो उतना हथेलियों को दबाने की कोशिश करे। 
  6. श्वास लेते हुए शरीर को उठाये और दोनों हाथों के सहारे संतुलन बनाने की कोशिश करे। 
  7. शुरुवाती समय में संतुलन बनाना मुश्किल लगता है। फिर जैसे जैसे आप नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करते जाएंगे ,आपका संतुलन बनने लगेगा। 
  8. इस अवस्था में जबतक रुक सकते है ,उतनी देर रुकने का प्रयास करे। 
  9. अभ्यास करते समय श्वासों की गति सामान्य चलने दे। 
  10.  श्वास छोड़ते हुए जमीन पर आ जाए और विश्राम करे। 
  11. इस आसन को करते समय साधक को मूलाधार चक्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।











Health Benefits Of Kukkutasana Pose - कुक्कुटासन के फायदे  



  1.   इस आसन के नियमित अभ्यास से हाथ और कंधे शक्तिशाली बनते है।
  2. संतुलन शक्ति को बढ़ाने के साथ आंतरिक मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है। 
  3. यह छाती को चौड़ा और मजबूत बनाने में सहायक है। 
  4. फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाकर स्वच्छ ऑक्सीजन को खून में प्रवाहित करता है। 
  5. शरीर में मौजूद घातक और विषैले पदार्थ कुक्कुटासन के अभ्यास से पसीने या मल के साथ बाहर निकल जाते है। 
  6. मस्तिक्ष को तनावरहित करता है , साथ ही एकाग्रता क्षमता बढाकर बुद्धि तिष्ण बनाता है। 
  7. यह आसन पाचनतंत्र को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। 
  8. यह भूक ,मंदाग्नि ,अजीर्ण,अपच जैसी समस्याओं को ख़त्म करता है। 
  9. पुरुषत्व को बढ़ाता है एवं आंतरिक शक्ति को विकसित करता है। 
  10. समस्त गुप्तरोग एवं मासिक धर्म की समस्याओं में लाभकारी है।
  11. धारणा शक्ति को मजबूत बनाता है। जिससे साधक का शरीर और मन ध्यान साधने के लिए तैयार होता है। 
  12. इस आसन का नियमित अभ्यास साधक में कठोरता ,सहनशीलता ,धैर्य ,तथा दृढ़ इच्छाशक्ति जैसे गुणों को उजागर करता है। 






Beginners Guide - शुरुवात के लिए टिप्स  




  1.  इस आसन को करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति का होना जरुरी है।  
  2. नए साधकों को इस आसन को करने से पहले पद्मासन में पारंगत होना आवश्यक है। 
  3. अगर आप नियमित रूप से धारणा और ध्यान का अभ्यास करते है ,तो जल्द ही आप इस आसन में महारथ हासिल कर सकते है। 
  4. यह आसन इस बात का सबूत है की किस प्रकार से शारीरिक मुद्रा ध्यांन मार्ग में साधक की सहायता कर सकती है। 








Keep This Precautions While Do This Asana - कुक्कुटासन के समय सावधानी






  1. यह एक उन्नत योगासन है। इसलिए जिन्हे अल्सर ,दिल ,फेफड़ों की समस्याएं है उन्हें इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। 
  2. शुरुवात में इस आसन को किसी मुलायम कंबल या गद्दे पर करे। 
  3. अपने गुरु के साथ किसी भी योगासन का अभ्यास करना एक विशिष्ट अनुभव कराता है।





Things To Know Before You Practicing This Asana - ध्यान रखने योग्य बाते





  1. अन्य योगासनों की तरह इस आसन का अभ्यास भी खाली पेट करना चाहिए। 
  2. सुबह सूर्योदय का समय किसी भी योगासन को करने के लिए आदर्श समय है। 
  3. पर अगर आप इसे शाम के समय करना चाहते है ,तो भोजन और अभ्यास के बिच ५ से ६ घंटे का समय अवश्य रखे।



इस आसन में पारंगत होने के लिए नियमित योगाभ्यास ,दृढ़ इच्छशक्ति ,और शरीर और दिमाग पर पूर्ण नियंत्रण होना आवश्यक है। इसके लिए आप योग के कुछ अंग जैसे धारणा ,ध्यान का उचित अभ्यास कर इस आसन में पूर्णता प्राप्त कर सकते है। अगर आपको ये लेख पसंद आया तो आप कमेंट कर के अपनी राय दे सकते है।





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