Ananda Balasana | {Happy Baby Pose} - Steps And Benefits

योग में वर्णित Ananda Balasana का अभ्यास स्वास्थ पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। आनंद बालासन का अर्थ आनंद = आनंदी ,बाल = बच्चा ,आसन= मुद्रा होता है। इस आसन को डेड बग पोज़ के नाम से भी जाना जाता है। पर क्योंकि एक आनंदित बच्चा अधिक सकारात्मक लगता है ,और इस आसन का अभ्यास शरीर पर सकारात्मक प्रभाव दिखाता है। इसीलिए इसका आनंद बालासन नाम ही प्रचलन में आता है। अंग्रेजी में इसे Happy Baby Pose के नाम से जाना जाता है। आनंद बालासन को आप बालासन के जुड़वे भाई के रूप में देख सकते है। क्योंकि बालासन की तरह Ananda Balasana का अभ्यास भी दिमाग को शांत कर साधक को तनाव से मुक्ति देता है।



Ananda Balasana (Happy Baby Pose) | आनंद बालासन योग 

Ananda Balasana (Happy Baby Pose) | आनंद बालासन योग



  • How To Do Happy Baby Pose | आनंद बालासन कैसे करे  


  1. जमीन पर चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाए। दोनों हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे को पकड़े और छाती के पास लाये। जिसतरह कोई बच्चा पैरों को ऊपर उठाकर खुश होता है, ठीक उसीतरह इस क्रिया को करना है। 
  2. धीरे धीरे अपने कूल्हों को खोलने की कोशिश करे। अपने सिर को फर्श से टिकाकर रखे ,और अपनी ठोड़ी को छाती से स्पर्श करे। जितना पैरों को पास ला सकते है लाने का प्रयास करे। और गर्दन के पीछे और कंधों में दबाव बनाये रखिए। 
  3. श्वास को सामान्य रूप से लेते रहे ,और मुद्रा में स्थिर बने रहे। आप चाहे तो इस आसन का अभ्यास करते समय आप अपने कमर निचे के अंगों को हिला सकते है। या चाहे तो किसी बालक की तरह पैरों के अंगूठों से खेल सकते है । 
  4. कुछ देर आसन में रुकने के बाद श्वास छोड़ते हुए पैरों को छोड़े और सामान्य अवस्था में आ जाए। अभ्यास हो जानेपर १० मिनट तक विश्राम करे और शरीर एवं दिमाग को रिलैक्स करे। 
  5. इस आसन का अभ्यास करते समय ख़ुशी और शांति का अनुभव करना चाहिए।








Health Benefit Of Happy Baby Pose | आनंद बालासन के स्वास्थ लाभ  

Health Benefit Of Happy Baby Pose | आनंद बालासन के स्वास्थ लाभ






  1. इस आसन का अभ्यास मेरुदंड को लचीला बनाता है तथा जाँघों और कूल्हे के भीतरी हिस्सों को फैलाने में मदद करता है। 
  2. यह पैरों और बाहु की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है। 
  3. क्योंकि इसका नाम ही आनंद बालासन है ,इसलिए ये साधक को शारीरिक एवं मानसिक रूप से तनावमुक्त करने में सक्षम है। 
  4. इस आसन का अभ्यास दिमाग की मांसपेशियों को गहन शांति का अनुभव कराता है। 
  5. एकाग्रता क्षमता तथा धारणा शक्ति को बलवान बनाता है।
  6.  यह अनिद्रा ,उदासीनता ,अवसाद, तनाव ,हायपर टेंशन ,अतिनिद्रा को दूर करने में सहायक है। 
  7. इसके नियमित अभ्यास से फेफड़ों की कार्यक्षमता में बढ़ोतरी होती है।
  8.  इसका अभ्यास छाती को चौड़ा कर शुद्ध प्राणवायु को शरीर में प्रवाहित करता है।
  9.  नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास पेट की आतंरिक मांसपेशियों की मालिश कर उन्हें मजबूत बनाता है। 
  10. कब्ज ,पेट फूलना ,भूख न लगना ,मल निष्कासन में परेशानी इत्यादि पाचन संबधी समस्याएं दूर करता है। 
  11. कमर के पीछे की त्रिकोणी हड्डी को आराम देने के लिए ये बेहतरीन आसन है।
  12. यह आसन शरीर में रक्तसंचार को नियमित कर त्वचा पर निखार लाने में सहायक है। 
  13. इस आसन का अभ्यास आपके अंदर छिपे छोटे बच्चे को ढूंढ निकालेगा।  इसके अभ्यास से मन में समर्पण की पवित्र भावना जागृत होती है। 






Precautions For Happy Baby Pose | आनंद बालासन में सावधानी



  1. आनंद बालासन एक सरल आसन है जिसका अभ्यास  कर आप जीवन में ख़ुशी ढूंढ सकते है। 
  2. पर जिन्हे उच्च रक्तचाप या घुटने की चोट है, उन्हें इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। 
  3. इसके अलावा मासिक धर्म होनेपर या गर्भवती महिलाओं को भी इस आसन से बचना चाहिए।






Few Things You Need To Know About Happy Baby Pose | ध्यान रखने योग्य बाते


  1. योगासनों का अभ्यास करने से पहले आपका पेट खाली होना आवश्यक है। 
  2. सुबह सवेरे आनंद बालासन का अभ्यास करना आपको सकारात्मक परिणाम दिलाता है। क्योंकि यही समय है जिस समय आप सभी चिंताओं तथा तान तनावों से मुक्त रहते है ,ऐसी अवस्था में अगर ऐसे आनंददायी आसन का अभ्यास किया जाए तो बात ही कुछ और होगी।
  3.  पर अगर आप काम के कारण सुबह अभ्यास नहीं कर पाते तो शाम के समय भी आप इस आसन का अनुभव ले सकते है। बस आपको भोजन और अभ्यास के बिच कम से कम ५ घंटे का समय रखना आवश्यक है ,जिससे आपका भोजन पच जाए और आप नई ऊर्जा के साथ आसन के लिए तैयार हो पाए। 
  4. इस आसन से पहले आप बालासन या वीरासन का अभ्यास कर सकते है।







 इस लेख में मैंने आपको Ananda Balasana के बारे में बताया। आज से ही अपने दैनिक योगसत्र में इस आसन को शामिल करे। इस आसन का अभ्यास करते समय अपने आप को बालक के रूप में देखना अच्छा अनुभव देता है। अगर आपको यह लेख उपयुक्त लगता है तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में दे सकते है।




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