Astavakrasana In Hindi | अष्टवक्रासन कैसे करें और इसके लाभ क्या हैं ?

Astavakrasana In Hindi योग में वर्णित अष्टवक्रासन का अभ्यास शरीर के आठ अंगों को प्रभावित करता है। संस्कृत शब्द अष्टवक्रासन का अर्थ अष्ट + वक्र + आसन , यानी आठ जगह से टेढ़ी शरीर रचना होता है। अष्टवक्रासन की निर्मिति महान ऋषि अष्टावक्र के द्वारा हुयी है। प्राचीन कथा के अनुसार ऋषि अष्टावक्र जब अपनी माता के गर्भ में थे ,तो गर्भ से वेदवाणी सुनाई देने लगती थी। अष्टावक्र के पिता जो अपने आप को महाज्ञानी समझते थे ,वो इस घटना को देख विचलित हो गए और उन्होंने गुस्से में आकर ऋषि अष्टावक्र को श्राप दे दिया। श्राप के अनुसार जब अष्टावक्र का जन्म हुआ तो उनका शरीर आठ जगह से टेढ़ा था। इसीकारण उनका नाम अष्टावक्र रखा गया। यह आसन शारीरिक तथा मानसिक दोनों रूप से व्यक्ति को स्वतंत्रता का अनुभव कराता है।  इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर आठ जगह से मोड़ा जाता है ,इसीकारण इस आसन को अष्टवक्रासन के नाम से जाना जाता है। आईये देखते है Astavakrasana In Hindi 


Astavakrasana In Hindi - अष्टवक्रासन योग 

Astavakrasana In Hindi - अष्टवक्रासन योग






  • How To Do Astavakrasana -  कैसे करे  


  1. अष्टवक्रासन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर चटाई बिछाकर  बैठ जाए।  दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा करे। दाहिने पैर को घुटने से मोड कर, दोनों हाथों से पकड़े और पैर को छाती के करीब लाये।जितना आप घुटने को गले लगा सकते है ,लगाने का प्रयत्न करे। इस स्थिति अपने बाए पैर को सीधा रखने की कोशिश करे। अपने कूल्हों को ढीला छोड़े और श्वास ले। 
  2. थोड़ा आगे झुके और जिस पैर को आपने गले लगाया है, उसे उठाकर अपने दाहिने कंधे के पीछे रखे। इस स्थिति में दाहिनी जांघ ,दाहिनी बगल को पीछे से स्पर्श करती है। दोनों हाथों को मजबूती के साथ जमीन पर रखे। 
  3. अब श्वास भरते हुए दोनों हाथों के सहारे शरीर को ऊपर उठाये। दाहिने पैर से बाएं पैर के टखने को पकडे और दोनों पैरों को क्रॉस में मिलाये। शरीर को संतुलित रखते हुए कोहनियों को मोड़कर आगे की और झुके और बने रहे। 
  4. संतुलन बनाने के लिए आप फर्श पर किसी बिंदु या वस्तु पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकते है। कम से कम १ मिनट तक इस स्थिति में बने रहे और श्वास छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में आ जाए। 
  5. इसी क्रिया को अपने बाए पैर के साथ करे। शुरू में पैरों को उठाने और संतुलन बनाने के लिए कठिनाई आ सकती है। इसलिए संतुलन बनाये रखने के लिये आप बाहरी पैरों और कूल्हों के निचे तकिया रख सकते है।








Health Benefits Of Astavakrasana Yoga - अष्टवक्रासन योग के स्वास्थ्य लाभ

Health Benefits Of Astavakrasana Yoga - अष्टवक्रासन योग के स्वास्थ्य लाभ






  1. अष्टवक्रासन के नियमित अभ्यास से शरीर लचीला और मजबूत बनता है। 
  2. यह आसन हाथों की कलाई और बाजुओं को शक्ति प्रदान करता है।
  3.  इसका अभ्यास पाचनतंत्र को प्रभावित करता है ,जिसके कारण पाचन तंत्र सुचारु ढंग से कार्य करता है। 
  4. यह कब्ज ,ऐसिडिटी ,वायु विकार ,वात विकार ,पेट फूलना ,भूक न लगना ,मंदाग्नि ,मल निष्कासन ,भोजन का न पचना ,खट्टी डकारे इत्यादि पेट संबंधित बीमारियों में लाभदायक है। 
  5. यह शरीर रचना को विकसित करता है। तथा संतुलन शक्ति को बढ़ाता है।
  6.  नित्य इस आसन का अभ्यास एकाग्रता क्षमता को बढ़ाता है। 
  7. बुद्धि को तिष्ण और धारणा को विकसित करने के लिए अष्टवक्रासन अत्यंत गुणकारी है।
  8.  ये आसन समस्त रक्तदोषों को समाप्त कर शरीर में शुद्ध प्राणवायु का संचार करता है। 
  9. यह दिमाग को शांति प्रदान करता है ,तथा अत्यधिक तनाव ,चिंता ,उदासीनता को दूर कर साधक को प्रफुल्लित बनाये रखता है। 
  10. स्त्रियों के मासिक धर्म या रजोनिवृत्ति जैसी समस्याएं खत्म करता है।
  11.  अष्टवक्रासन का अभ्यास धैर्य ,दृढ़ता ,एकाग्रता ,कठोरता ,साहस जैसे गुणों को विकसित करता है। 




Beginner Tips - शुरुवात के लिए टिप्स  



शुरुवात में इस आसन का अभ्यास करने से पहले कुछ सरल परंतु महत्वपूर्ण आसनों का अभ्यास करना चाहिए। जैसे - उत्तानासन ,बद्ध कोणासन  जिससे आपका शरीर इस आसन के लिए पूरी तरह तैयार हो और आप आसानी से इस आसन का अभ्यास कर पाएं।




Precautions For Astavakrasan Pose  - अष्टवक्रासन के लिए सावधानियां

  1. इस आसन को देखते ही यह आसन कठिन लगने लगता है ,पर वास्तविकता में अगर आप नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने की कोशिश करेंगे ,तो यही आसन आपको सरल लगने लगेगा। 
  2. इस आसन का अभ्यास केवल उन्हें नहीं करना चाहिए जो कंधे ,हाथ ,या कोहनी की चोट या समस्या  से पीड़ित है। 






Things To Keep In Mind - ध्यान रखने योग्य बातें



बाकी योगासनों की तरह ही इस आसन का अभ्यास करते समय आपका पेट खाली होना चाहिए। सुबह सूर्योदय के समय इस आसन का अभ्यास आपको प्रसन्नता की अनुभूति कराएगा। पर अगर आप शाम के समय इसका अभ्यास करना चाहते है तो भोजन और अभ्यास के बिच ५ से ६ घंटे का समय अवश्य रखे।



अब आप Astavakrasana In Hindi का अभ्यास कैसे करे , और इसके लाभ और सावधानियों के बारे में जान चुके है ।  दूर से कठिन दिखाई देने वाला ये आसन आपके लिए सरल बन सकता है ,बस आवश्यकता है तो केवल दिल  और दिमाग को स्वतंत्र करने की। अगर आपको ये लेख पसंद आता है  तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भुले , आप कमेंट बॉक्स में अपनी राय दे सकते है।




आप इन्हे भी पढ़ सकते है


Previous
Next Post »