Kurmasana Yoga | कुर्मासन योग कैसे करे ,इसके क्या लाभ है

Kurmasana Yoga या कुर्मासन एक योगासन है। संस्कृत नाम : कुर्मासन ,कुर्मा - कछुआ ,आसन - मुद्रा होता है। इसका अभ्यास व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करता है। इस लेख में Kurmasana Yoga की संपूर्ण जानकारी देने जा रहे है।

योग में वर्णित कुर्मासन का अभ्यास करते समय व्यक्ति की मुद्रा कछुए के समान दिखाई देती है। इसका अभ्यास आपको बाहरी तनाव एवं चिंताओं को काटकर ,आतंरिक शांति की भावना प्रदान करता है। कछुए को संयम का प्रतिक माना जाता है। इस योगासन का अभ्यास आपको शारीरिक एवं मानसिक रूप से संयमित और स्थिर रखने में मदद करता है।

Kurmasana Yoga | कुर्मासन योग 

Kurmasana Yoga | कुर्मासन योग






  • How To Do Kurmasana | कुर्मासन कैसे करे  



  1. जमीन पर चटाई बिछाकर पैरों को सामने फैलाकर बैठ जाए।
  2.  दोनों हाथों को कूल्हों के पास फर्श पर टिका दे।
  3.  मेरुदंड को सीधा रखे और जांघों को जमीन पर दबाये। 
  4. एक लंबी और गहरी श्वास ले। दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर कूल्हों के पास लाये। 
  5. धड़ को आगे ले जाए और दोनों हाथों को ,पैरों के निचे ले जाए। 
  6. इसी स्थिति में आगे बढ़ते जाए ,आसानी के लिए पैरों को आगे फैलाते जाए। 
  7. कंधो पर खिचाव महसूस करे। आगे बढ़ते हुए धड़ को फर्श पर रख दे। अपनी भुजाओं को जितना हो सके फैलाने की कोशिश करे। 
  8. मस्तक को जमीन पर रख दे और कुछ देर इसी अवस्था में बने रहे। 
  9. कम से कम ४० सेकंड इस अवस्था में रुकने के बाद पुनः सामान्य स्थिति में आ जाए।










Kurmasana Benefits | कुर्मासन के लाभ


  1. इसके नियमित अभ्यास से आप प्राकृतिक और नियमित श्वास लेते है ,जिससे कई बीमारिया अनायास ही समाप्त हो जाती है।
  2.  ये आपकी शारीरिक रचना में सुधार करने के लिए बेहतरीन आसन है। 
  3. इससे पाचन प्रणाली तंदरुस्त बनी रहती है। 
  4. यह कब्ज ,अपच ,अम्लता ,गैस ,अकड़न ,भूक न लगना ,मोटापा ,थकान ,कमजोरी ,अनिद्रा को दूर करने में सहायक है। 
  5. इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार होता है,ये अस्थमा जैसे शवनविकारों को दूर करता है।  
  6. इसके अभ्यास से शुद्ध खून मस्तिक्ष की और बहने लगता है। 
  7. ये स्मरणशक्ति को बढ़ाता है और धारणा शक्ति को बलवान बनाता है। 
  8. इसका नियमित अभ्यास आपके जांघ ,कूल्हे ,कंधे एवं पीठ की मांसपेशियों को फैलाता है। 
  9. ये आसन मस्तिक्ष को ध्यान साधना के लिए तैयार करता है। 
  10. शरीर की अरबों खरबों पेशियों को फ्रेश करता है और शरीर को तरोताजा रखता है। 
  11. ये आसन त्वचा संबंधी बीमारियों में लाभकारी है।
  12. यह गर्भाशय ग्रीवा से पीड़ित रोगियों के लिए अच्छा आसन है। 
  13. नियमित कुर्मासन का अभ्यास व्यक्ति में उत्साह ,साहस ,कठोरता ,सहनशीलता ,एकाग्रता एवं शांति को उजागर करता है।









Beginner Tips |  टिप्स



  1. कुर्मासन उन्नत अवस्था का योगासन है। इसमें महारथ हासिल करने के धैर्य रखना आवश्यक है। 
  2. समय के साथ साथ आप इसमें पारंगत हो सकते है। इसके लिए आपको नियमित और सावधानीपूर्वक अभ्यास करना आवश्यक है।  
  3. अगर आप शुरुवात में ही इसका अभ्यास करना चाहते है तो आपको शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है। 
  4. पहली बार इसका अभ्यास करते समय अपने पैरो के निचे कोई मुलायम कंबल या तकिया रख सकते है।   








Kurmasana Precautions | कुर्मासन में सावधानी



  1. यह एक कठिन योगासनों में से एक आसन है। इसमें पारंगत होने के लिए आपको अपने शरीर को इसके लिए पूरी तरह सक्षम बनाना होगा। 
  2. गठिया एवं कटिस्नायुशील जैसी बीमारियों में इस आसन को ना करे। 
  3. इसे माहवारी और गर्भावस्था के दौरान भी नहीं करना चाहिए। 
  4. हाथ ,पैर ,कंधे एवं पीठदर्द से पीड़ित होनेपर इस आसन को ना करे। 
  5. गंभीर पीठदर्द या पेट की सर्जरी या समस्या होनेपर भी इस आसन से बचना चाहिए।







Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते



  1. इस आसन का अभ्यास सुबह ब्रम्हमुहर्त में करना शुभ परिणाम देता है। 
  2. आप चाहे तो इसे शाम के समय भी कर सकते है। बस आसन करते समय आपका पेट खाली होना आवश्यक है। 
  3. इसके लिए भोजन और अभ्यास के बिच कम से कम ६ घंटे का समय जरूर रखे।









इस आसन से पहले किये जाने वाले आसन








इस आसन के बाद इन आसनो का अभ्यास करे








इस लेख में मैंने आपको Kurmasana Yoga के बारे में बताया। कुर्मासन का नियमित अभ्यास आपको कई सारी परेशानियों से बचाता है ,आवश्यक है इसे योग्य गुरु के सानिध्य में करने की। किसी भी योगासन या प्राणायाम का अभ्यास शांत और निवांत स्थान पर करना उपयुक्त होता है। जहा आपको प्राकृतिक शांति का अनुभव हो।




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