Naukasana In Hindi {Paripurna Navasana} - Steps And Benefits

Naukasana In Hindi योग में वर्णित नावासन के विभिन्न प्रकार प्रचलन में है। जैसे अर्ध नावासन ,एकपाद नावासन या परिपूर्ण नावासन। संस्कृत शब्द परिपूर्ण नावासन का अर्थ परिपूर्ण= संपूर्ण ,नाव = कश्ती या जहाज ,आसन = मुद्रा होता है। इस लेख में Naukasana In Hindi की संपूर्ण जानकारी देने जा रहे है ,जो आपके लिए काफी उपयोगी साबित होगी।


इस आसन का अभ्यास साधक के शरीर में संतुलन और ताकद पैदा करती है। पर इसके लिए आवश्यक है की इसका अभ्यास संपूर्ण समर्पण तथा नियमितता के साथ किया जाए। इस आसन का अभ्यास करते समय व्यक्ति की शारीरिक रचना नाव की तरह दिखाई देती है। क्योंकि संस्कृत में नाव या कश्ती को नौका कहा जाता है ,इसलिए इसे नौकासन के नाम से भी जाना जाता है।


 Naukasana In Hindi (Paripurna Navasana) | परिपूर्ण नावासन (नौकासन) 

Naukasana In Hindi (Paripurna Navasana) | परिपूर्ण नावासन (नौकासन)



  • How To Do Naukasana | नौकासन कैसे करे 


  1. जमीन पर चटाई बिछाकर बैठ जाए। दोनों पैरों को सामने लाये। 
  2. हाथों को ठीक कूल्हों के पीछे फर्श से सटाकर रखे। कमर (मेरुदंड) को सीधी रखे। 
  3. मेरुदंड को सीधा करने के लिए गर्दन से लेकर पेट तक की हड्डी को ऊपर की और खींचे और पुनः वापस आये। इसतरह आपको अपनी आतंरिक मांसपेशियों की स्थिति का अनुभव हो जाएगा। 
  4. श्वासों को बाहर निकालते हुए अपने पैरों को ४५ डिग्री के कोण में ऊपर उठाये। जब आप पैरों को ऊपर की और उठाते है तो आपकी बंदर हड्डी (पूछ) फैलने लगेगी ,उसे फैलने  दे। 
  5. पैरों पर ध्यान दे ,उन्हें सीधा रखे। फर्श पर से हाथों को हटाकर संपूर्ण शरीर को केवल अपने कूल्हों पर संतुलित करे। पैरों की उँगलियों को सीधा तान कर उन्हें सामने की और इंगित करे। इस स्थिति में आप  केवल अपने कूल्हों पर पैठे है ,तथा आपके हाथ एवं पैर सीधे है। 
  6. इस स्थिति में श्वासों को सामान्य गति से लेते रहे। कम से कम ३० सेकंड तक आसन में बने रहे। कुछ देर बाद पैरों एवं हाथों को  वापस लाये और सामान्य स्थिति में आ जाए। श्वास छोड़े और थोड़ी देर बाद  फिर इसी क्रिया को दोहराये। दिनभर में आप इसे ३ से ५ बार कर सकते है।










Health Benefits Of Naukasana Pose | नौकासन के स्वास्थ लाभ 

Health Benefits Of Naukasana Pose | नौकासन के स्वास्थ लाभ


  1. इस आसन का नित्य अभ्यास व्यक्ति के रीढ़ की हड्डी ,कूल्हे तथा पीठ एवं पेट की मांसपेशियों बलवान बनाती है। 
  2. यह गुर्दे ,पेट की ग्रंथिया ,तथा आतंरिक मांसपेशियों को सुदृढ़ बनाने में मदद करता है। 
  3. यह आसन नाभिचक्र पर विशेष प्रभाव डालता है ,इससे जठराग्नि सुचारु ढंग से कार्य करने लगती है। 
  4. पीनियल और पिट्यूटरी ग्रंथि को प्रभावित कर थायरॉइड को सक्रियता प्रदान करता है। भूख न लगना  ,पेट में कीड़े हो जाना ,जी मचलना ,कब्ज ,अम्लता ,अन्न का न पचना ,पैखाना साफ़ न होना ,सिरदर्द ,गले के रोग ,टॉन्सिल्स ,थायरॉइड,मंदाग्नि ,इत्यादि गंभीर बीमारियों को जड़ से दूर करने में सहायक है। 
  5. यह आसन शुद्ध प्राणवायु को ह्रदय तक पहुंचाने में मदद करता है। 
  6. रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। 
  7. दिमाग को शांत एवं तनाव से मुक्त करने में लाभकारी आसन है।
  8. इससे साधक की एकाग्रता में असामान्य बदलाव देखने को मिलता है। 
  9. इसका अभ्यास ध्यान साधना में अग्रेसर होने के लिए कारीगर है। 
  10. यह आसन प्रजनन प्रणाली को स्वस्थ बनाये रखता है। 
  11. समस्त गुप्तरोगों एवं स्त्रिदोषों में सहायक है। 
  12. यह संतुलन शक्ति का विकास करने के लिए अच्छे आसन के रूप में सामने आया है। 
  13. यह अनावश्यक चर्बी को दूर कर वजन घटाने में सहायक है। 
  14. शरीर में नयी ऊर्जा और ताजगी का संचार करता है। 
  15. चेहरे की रौनक को बढ़ाता है और शारीरिक मुद्रा को टोन करता है।


Tips | सुझाव

  1. इस आसन को करने के लिए आपको ताकद के साथ साथ गहन एकाग्रता और संतुलन की भी आवश्यकता पड़ती है। 
  2. इसलिए शुरुवाती समय में कठिनाई आने पर डरे नहीं ,नियमित अभ्यास से आप  संतुलन और एकाग्रता के साथ इस आसन में महारथ हासिल कर सकते है। 
  3. जो व्यक्ति मोटापे से पीड़ित है उन्हें थोड़ी कठिनाई आ सकती है ,पर अगर आप योग के प्रति अपना समर्पण दिखाएँगे तो इस आसन को करना आपके लिए सरल होगा।
  4. आसन को और सरल बनाने के लिए आप इस आसन से पहले अधो मुख श्वानासन या उत्तानासन का अभ्यास कर सकते है। 








Naukasana Precautions | नौकासन में सावधानी  



  • ध्यान दे ,अगर आप निचे दिए गए किसी समस्या या बिमारी से पीड़ित है ,तो इस आसन का अभ्यास करने बचे। 
  1. दमा   -  दमा या अस्थमा की गंभीर समस्या से पीड़ित होनेपर इस आसन का अभ्यास ना करे। 
  2. सिरदर्द   -  अगर आप रोज के सिरदर्द से परेशान है तो भी आसन से बचना ही उत्तम होगा। 
  3. दस्त   -  गंभीर दस्त की समस्या होनेपर भी इस आसन का अभ्यास ना करे। 
  4. ह्रदय की समस्या  -  तीव्र ह्रदय पीड़ा या हृदयरोग से ग्रसित होनेपर भी इसे अवॉयड करे। 
  5. अनिद्रा    -  अगर आप नियमित अनिद्रा यानी नींद ना आने की बिमारी से ग्रसित रहते है ,तो ये आसन आपके लिए नहीं है। 
  6. लो बीपी   - निम्न रक्तचाप की समस्या से पीड़ित होनेपर इस अभ्यास से बचे। 
  7. मासिक धर्म  -  स्त्रियों को माहवारी के दिनों में इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। 
  8. गर्भावस्था  - ये आसन गर्भवती स्त्रियों के लिए नहीं है। 
  9. मधुमेह  -  मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति इस आसन का अभ्यास ना करे। 
  10. पेट की समस्या  -  गंभीर पेट दर्द या पेट की सर्जरी होनेपर भी इसे ना करे ,ये आपके लिए नहीं है। 


  • पहली बार इस आसन का अभ्यास अपने किसी साथी या प्रमाणित योग शिक्षक के मार्गदर्शन में करे।





Things You Need To Know Before You Do Naukasana | ध्यान देने योग्य बाते



  1. किसी भी योगासन या प्राणायाम का अभ्यास सुबह सूर्योदय के समय करना अच्छा होता है। 
  2. क्योंकी इस समय पेट खाली रहता है, जिससे किसी भी योगासन के शुभ परिणाम मिलते है। 
  3. पर अगर आप इसका अभ्यास शाम के समय करना चाहते है तो अपने भोजन और योगाभ्यास के बिच   कम से कम ६ घंटे का अंतर् जरूर रखे।












इस लेख में मैने आपको Naukasana In Hindi के बारे में जानकारी दी। इस आसन को अपने दैनिक योगसत्र में सम्मेलित करना आपको अच्छे परिणामों से अवगत कराएगा। लेख पसंद आये तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। साथ ही कमेंट बॉक्स में अपनी राय देना ना भूले।




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