Vrischikasana Yoga | वृश्चिकासन योग कैसे करे ,इसके क्या लाभ है ?

Vrischikasana Yoga संस्कृत : वृश्चिकासन ,वृश्चिक - बिच्छु ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित वृश्चिकासन एक उन्नत योगासन है। अंग्रेजी में इसे Scorpion Pose भी कहा जाता है। इस आसन का अभ्यास करने के लिए गहन संतुलन शक्ति और दृढ़ता की आवश्यकता पड़ती है। अगर कोई इस आसन को सही ढंग और एकाग्रता के साथ करता है। तो उसकी शरीर रचना बिच्छु की तरह दिखाई देने लगती है। इसके अभ्यास के लिए कंधो का स्वस्थ और मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है। यहापर Vrischikasana Yoga की संपूर्ण जानकारी देने जा रहे है ,जो आपके लिए उपयुक्त साबित होगी।




Vrischikasana Yoga | वृश्चिकासन योग 

Vrischikasana Yoga | वृश्चिकासन योग








  • Vrischikasana Steps | वृश्चिकासन योग कैसे करे 



  1. आसन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर चटाई बिछाकर घुटनों के बल खड़े रहे। 
  2. हाथों को सामने लाये और कोहनियों तक फर्श पर रखे। 
  3. मस्तक को फर्श पर रखे और शीर्षासन की मुद्रा में आ जाए (दोनों हाथ एवं सर के सहारे पैरों को ऊपर ले जाए ) . रीढ़ की हड्डी एवं पैरों को सीधा करे। 
  4. जब संतुलन पकड़ में आ जाए तो पैरों को घुटनों से मोड़ कर ९० डिग्री के कोण में लाये। 
  5. घुटनों से लेकर तलवों तक का भाग सीधा रखे। 
  6. दोनों पैरों की उँगलियों को सामने की और इंगित करे। 
  7. अब संतुलन बनाते हुए सिर को ऊपर उठाये और सामने की तरफ देखने का प्रयत्न करे। 
  8. जितने समय तक आप इस अवस्था में आरामदायक पाते है ,उतनी देर इस मुद्रा में बने रहे। 
  9. श्वास छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आ जाए।
  10. इस आसन को करते समय ध्यान को नासिका के अग्रभाग पर या भृकुटि पर लगाना चाहिए।  










Vrischikasana Benefits | वृश्चिकासन के लाभ

Vrischikasana Benefits | वृश्चिकासन के लाभ



  1. यह चर्बी घटाने के लिए एक अच्छा आसन है। 
  2. इसके अभ्यास से अतिरिक्त वसा दूर होकर शरीर हल्का महसूस होने लगता है। 
  3. नियमित अभ्यास से पीठ और कंधों की मासपेशियो को मजबूती प्रदान करता है। 
  4. यह हिप्स को खोलने एवं छाती और कंधों को विस्तारित करने में मदद करता है। 
  5. इसके अभ्यास से रक्तपरिसंचरण तेज होता है।  
  6. ह्रदय की गति को बढ़ाकर खून को शुद्ध करने में सहायक है।  
  7.  मस्तिक्ष को विकसित कर एकाग्रता क्षमता में सुधार करता है। 
  8. धारणा शक्ति को बलवान बनाता है।  
  9. मेरुदंड को मजबूत एवं लचीला बनाता है। 
  10. फेफड़ों की कार्यक्षमता में बढ़ोतरी करता है। 
  11. त्वचा को चमकदार और तेजस्वी बनाता है। 
  12. आँखों को तेज करता है। 
  13. बालों का असमय सफ़ेद हो जाना ,बालों का झड़ना इत्यादि समस्याओं को ठीक करता है। 
  14. इसका नियमित अभ्यास व्यक्ति में सहनशीलता का विकास करता है।








Beginner Tips | शुरुवात के लिए टिप्स



  1. शुरुवाती लोगों को इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। 
  2. पहली बार इसका अभ्यास करते समय दीवार का सहारा लेना सबसे अच्छा निर्णय है। 
  3. इस आसन का अभ्यास तभी किया जा सकता है ,जब आप अपने शरीर को संतुलित करने में सक्षम हो। इसलिए वृश्चिकासन का अभ्यास शुरू करने से पहले शीर्षासन में महारथ हासिल कर लेनी चाहिए। 
  4. यह आसन उन लोगों को कठिनाई दे सकता है ,जो मोटापे से ग्रसित है। इसमें पारंगत होने के लिए रीढ़ की हड्डी लचीली और मजबूत होना आवश्यक है। 
  5. पहली बार इसका अभ्यास करने के लिए ४ से ५ हफ़्तों तक ,केवल दीवार के सहारे शरीर को ऊपर उठाने कोशिश करे। 
  6. अभ्यास करते समय चोट से बचने के लिए आप अपने निचे किसी मुलायम कंबल को रख सकते है। 







Vrischikasana Precautions | वृश्चिकासन में सावधानी



  1.  इस आसन का अभ्यास गंभीर हृदयरोग से पीड़ित होनेपर ना करे।
  2. माहवारी के समय या गर्भावस्था में इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  3. कंधे ,जांघ ,नितंब ,कमर ,मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी) की चोट या गंभीर समस्या से पीड़ित होनेपर भी वृश्चिकासन ना करे। 
  4. गंभीर उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित लोगों को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  5. अगर आप पहली बार इसका अभ्यास करते है तो किसी योग्य गुरु या विशेषज्ञ की देखरेख में करे। जो आपको बता सके की आप शारीरिक एवं मानसिक रूप से इस आसन के लिए तैयार है या नहीं। 








Things You Need To Know | ध्यान देने योग्य बाते



  1. सुबह ब्रम्हमुहर्त का समय कसरत या योगासनों के लिए अच्छा माना जाता है। 
  2. इस आसन का अभ्यास खाली पेट करना चाहिए। 
  3. अगर आप शाम के समय इसका अभ्यास करना चाहते है ,तो भोजन और अभ्यास के बिच १० घंटे का समय रखना अनिवार्य है।









इस आसन से पहले आप इन आसनों का अभ्यास कर सकते है।







वृश्चिकासन के बाद किये जाने वाले आसन






इस लेख में मैंने आपको  Vrischikasana Yoga की पर्याप्त जानकारी दी।  नियमित अभ्यास के द्वारा ही इस आसन को साधा जा सकता है। देखा जाए तो ये आसन व्यक्ति की दृढ़ता ,मजबूती ,धैर्य ,और संतुलन की परख करता है। आप आपने विचार या सवाल कमेंट बॉक्स में लिख सकते है। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले।





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