Jan 27, 2019

Mahavir Asana | महाविरासन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है

Mahavir Asana संस्कृत : महाविरासन ,महावीर - पराक्रमी ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित महाविरासन एक योगासन है। पवनपुत्र हनुमान जो विशेषतः बल बुद्धि के देवता है , उनका एक नाम महावीर भी है। ठीक उन्ही की तरह यह आसन भी शक्ति का खजाना है। इसलिए यह महाविरासन के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त इसे "मारुती आसन" के नाम से भी लोग जानते है। इसका अभ्यास साधक में शौर्य और पराक्रम की भावना को उजागर करता है। प्रस्तुत लेख में Mahavir Asana की संपूर्ण जानकारी देने जा रहे है ,जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगी।





Mahavir Asana | महाविरासन योग 

Mahavir Asana | महाविरासन योग






  • How To Do Mahavir Asana | महाविरासन कैसे करे



  1. इस आसन का अभ्यास किसी शांत और एकांत जगह पर करे। जमीन पर चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाए। 
  2.  बाए पैर को एक से दो फिट पीछे ले जाकर ,पंजे को जमीन से सटाकर रखे। 
  3. दाहिने पैर को घुटने से मोड़ कर ,धड़ का झुकाव आगे की और रखे। जब आप ऐसा करते है तो आपका बाया पैर जो पीछे है ,उसे (जमीन से सटाकर ) स्थिर रखे। 
  4. धड़ को आगे झुकाते समय अपने मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी ) को कमान दे ,और अपनी छाती को  फुलाये। 
  5. अपने दोनों हाथों से मुट्ठी बांधे (अपने अंगूठे को अंदर दबाकर) दोनों हाथों को छाती से ८ से १० इंच आगे ले जाए। 
  6.  एक लंबी श्वास लेकर , दोनों मुठियों को जोरदार दबाये और अपने गर्दन की मांसपेशियों को सख्त करे। श्वास बाहर छोड़ दे। 
  7. पुनः श्वास लेते हुए  पेट को फुलाये और धीरे-धीरे श्वास बाहर छोड़े। 
  8. इसप्रकार २ मिनट तक आसन में रहते हुए इस क्रिया को जारी रखे। 
  9. २ मिनट के बाद वापस सामान्य अवस्था में आकर कुछ देर विश्राम करे। 
  10. उपरोक्त क्रिया को अपने दूसरे पैर के साथ भी करे। इसीप्रकार पैरों को बदलकर ५-५ बार करे। 
  11. इस आसन का अभ्यास करते समय संपूर्ण शरीर को सजग और तान कर रखे। 
  12. मन में साहस और पराक्रम की दिव्य भावना को उजागर होने दे। 
  13. इस मुद्रा का अभ्यास करते समय साधक अपना ध्यान किसी एक बिंदु पर नहीं बल्कि संपूर्ण शरीर पर केंद्रित करता है। (संपूर्ण शरीर एवं आत्मा के प्रति सजग रहता है )






Mahavir Asana Benefit | महाविरासन के लाभ



  1. प्रतिदिन इस आसन का अभ्यास संपूर्ण शरीर को मजबूत रखता है। 
  2. इसके अभ्यास से प्राणवायु प्राकृतिक रूप से शरीर में प्रवाहित होती है। 
  3. यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढाकर छाती को चौड़ा एवं मजबूत बनाता है। 
  4. इसका नियमित अभ्यास मोटापे को दूर कर वजन कम करने में सहायक है।  
  5. यह कद को बढ़ाता है एवं शरीर को हल्का रखता है। 
  6. इसका नियमित अभ्यास शरीर में खून का  संचार बढ़ाता है ,और रक्त को शुद्ध करता है। 
  7. शारीरिक रचना में सुधार लाने के लिए यह अत्यंत फायदेमंद आसन है। 
  8. इसका अभ्यास जठराग्नि को प्रदीप्त कर पाचनतंत्र को विकसित करता है। 
  9. यह मंदाग्नि ,कमर दर्द ,वायुविकार ,अतिनिद्रा ,वीर्यविकार इत्यादि समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। 
  10. नित्य इस आसन का अभ्यास व्यक्ति में धैर्य ,शक्ति ,साहस ,शौर्य जैसे गुणों को बढ़ाता है।







Some Point You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते



  1. इस आसन का अभ्यास खाली पेट करे। 
  2. सुबह सूर्योदय के समय शुद्ध वायु प्रवाहित होती है। यह इस आसन के लिए उपयुक्त समय है।  
  3. आप चाहे तो इसका अभ्यास अपने शाम के सत्र में भी कर सकते है। बस अपने पेट को कुछ खाली रखना याद रखे। जिससे आप सकारात्मक  ऊर्जा के साथ इस आसन का अभ्यास कर पाए।







Mahavir Asana Precautions | सावधानी



  1. जिन्हे उच्च रक्तचाप या हृदयरोग की समस्याएं है ,वो इस आसन का अभ्यास ना करे।
  2. गर्भवती स्त्रियों के लिए यह आसन नहीं है। 
  3. अगर आपको कोई गंभीर शारीरिक या मानसिक बिमारी है ,तो आपको इस आसन का अभ्यास करने से पूर्व अपने चिकित्सक (डॉक्टर) की सलाह लेना आवश्यक है।








महाविरासन से पूर्व किये जानेवाले आसन









महाविरासन के बाद किये जानेवाले आसन







इस  लेख में मैंने आपको "Mahavir Asana" के बारे में जानकारी दी। क्या यह जानकारी आपके लिए उपयुक्त थी ? आप अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में दे सकते है। इसे अपने दोस्तों के साथ बांटना ना भूले। महाविरासन का अभ्यास जीवन में संयम ,धैर्य ,बल ,साहस ,स्वास्थ जैसे अनगिनत गुणों को  लेकर आता है। यह रचना आंजनेय हनुमानजी को समर्पित है ,जो बल ,बुद्धि और विद्या के स्वामी है।