Feb 6, 2019

Katichakrasana | कटिचक्रासन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है

Katichakrasana संस्कृत: कटिचक्रासन ,कटी -कमर ,चक्र - पहिया ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित कटिचक्रासन एक सरल योगासन है। इसे हर कोई अपने स्वास्थ अनुसार कर सकता है। ये  एक सरल और चमत्कारी आसन है। इसका अभ्यास करते समय कमर को दोनों तरफ मोड़ा जाता है। इसीकारण यह कटिचक्रासन के नाम से प्रचलित है। अनावश्यक चर्बी से छुटकारा पाकर ,शरीर को लचीला बनाने के लिए इस आसन का अभ्यास आवश्यक है। प्रस्तुत लेख में  "Katichakrasana" की संपूर्ण जानकारी देने जा रहे है ,  जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगी।


Katichakrasana Yoga | कटिचक्रासन योग 

Katichakrasana Yoga | कटिचक्रासन योग








  • How To Do Katichakrasana | कटिचक्रासन कैसे करे



  1. इस आसन का अभ्यास किसी स्वच्छ और एकांत जगह पर करे। जमीन पर चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाए। 
  2. अपने कंधों और मेरुदंड को सीधा तान कर रखे। 
  3. दोनों पैरों में कम से कम आधे से एक फिट का आवश्यक अंतर ले । 
  4. दोनों हाथों को कंधों के बराबर ऊपर उठाये। जिससे आपके  दोनों हाथ और कंधे एक सीधी रेखा बनाएंगे। 
  5. एक लंबी श्वास भरे और श्वास छोड़ते हुए अपनी दाहिनी और मुड़े। 
  6. दाहिनी और मुड़ते समय इस बात का ध्यान रखे की, आपकी कमर के ऊपरी भाग को मोड़ना है। किसी भी अवस्था में अपने पैरों को अपनी जगह से ना हिलाये। 
  7. गर्दन को दाहिनी और मोड़कर रखे। 
  8. जितनी देर इस अवस्था में रुकना संभव हो उतनी देर श्वास को बाहर रोककर आसन में बने रहे। 
  9. कुछ देर बाद पुनः सामान्य अवस्था में आ जाए।
  10.  इसी क्रम को अपने बायीं और से करे। 
  11. दिनभर में आप इसे १० से १५ बार दोहरा सकते है। 
  12. आसन के दौरान थकावट महसूस होनेपर कुछ देर विश्राम करे।
  13.  इस मुद्रा का अभ्यास करते समय साधक अपना ध्यान रीढ़ का निचला हिस्सा या मूलाधार चक्र पर केंद्रित करता है।






Katichakrasana Benefit | कटिचक्रासन के लाभ



  1. नियमित  इस आसन का अभ्यास शरीर को लचकदार एवं हल्का बनाता है। 
  2. इससे कमर आकर्षक और सुंदर दिखने लगती है। 
  3. यह शरीर में मौजूद अतिरिक्त वसा को दूर कर वजन कम करने में सहायक है।  
  4. इसके अभ्यास से आलस्य दूर होकर शरीर और दिमाग को तरोताजा करता है।  
  5. यह मेरुदंड से जुडी समस्त नाड़ियों को शुद्ध करता है। 
  6. मेरुदंड और कमर को मजबूती प्रदान करता है। 
  7. गर्दन एवं कंधों की मांसपेशियों को खोलता है। 
  8. नियमित रूप से इसका अभ्यास किया जाए, तो ये संपूर्ण शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन (शुद्धिकरण) करता है।
  9.  पाचनक्षमता को मजबूत बनाकर भूक को बढ़ाता है। 
  10. यह कब्ज ,मंदाग्नि ,अम्लता ,तनाव ,मलावरोध ,हाइपोथॉयरॉइड जैसे रोगों में लाभदायक है।







Some Points You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बातें



  1. इस आसन का अभ्यास खाली पेट किया जाना चाहिए। 
  2. सुबह सवेरे इसका अभ्यास करना सकारात्मक लाभ प्रदान करता है। 
  3. आप चाहे तो शाम के समय भी इसका अभ्यास कर सकते है ,बस आपको अपने भोजन और अभ्यास के बिच ५ से ६ घंटे का समय छोड़ना आवश्यक है। 
  4. जिससे आपका खाना आसानी से पच जाए और आप नई ऊर्जा के साथ कटिचक्रासन का अभ्यास कर सके।







Katichakrasana Precautions | कटिचक्रासन में सावधानी



  1. यह आसन गर्भवती स्त्रियों के लिए नहीं है। 
  2. इसके अलावा अगर आप हर्निया ,पेट या रीढ़ की सर्जरी या स्लिप डिस्क  से पीड़ित है तो भी इसका अभ्यास ना करे।








कटिचक्रासन से पहले किये जाने वाले आसन









कटिचक्रासन के बाद आप इन आसनों का अभ्यास कर सकते है।






आज मैंने आपको Katichakrasana के बारे में उपयुक्त जानकारी दी। कटिचक्रासन योग की शुरुवात करने के लिए भी एक सरल और फायदेमंद आसन है। जिसे कोई भी चाहे वो नया हो या पुराना हर कोई आसानी से कर सकता है। क्या यह लेख आपके लिए उपयोगी था ? आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दे। साथ ही लेख पसंद आनेपर अपने दोस्तों के साथ जरूर बाटे।









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